आरोपपत्र राजनीति से प्रेरित - कन्हैया कुमार



नई दिल्ली।।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, शहला रशीद, अनिर्बाण और उमर खालिद के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब 3 साल पुराने 'देशद्रोह' मामले में चार्जशीट दाखिल किया है।

इसके अलावा चार्जशीट में आक़िब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशीर भट और बशरत का नाम शामिल है।

कुमार ने पीटीआई से कहा, ‘‘आरोपपत्र राजनीति से प्रेरित है। हालांकि, हम चाहते हैं कि आरोप तय किए जाएं और इस मामले में त्वरित सुनवाई हो ताकि सच्चाई सामने आ सके। हम उन वीडियो को भी देखना चाहते हैं जो पुलिस द्वारा सबूत के तौर पर रखे गए हैं।’’

खालिद ने बेंगलुरू में सेंट जोसेफ कॉलेज में छात्रों के एक समूह को ‘‘संविधान की रक्षा में युवकों की भूमिका’’ विषय पर संबोधित किया। खालिद ने कहा, ‘‘हम आरोपों को खारिज करते हैं। कथित घटना के तीन साल बाद आरोपपत्र दाखिल करने का कदम चुनावों के ठीक पहले ध्यान भटकाने का एक प्रयास है।’’ 

इस मामले में अन्य आरोपियों में आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईया रसूल, बशीर भट, बशरत को भी आरोपी बनाय गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपपत्र की कॉलम संख्या 12 में भाकपा नेता डी राजा की पुत्री अपराजिता, जेएनयूएसयू की तत्कालीन उपाध्यक्ष शहला राशिद, राम नागा, आशुतोष कुमार और बनोज्योत्सना लाहिरी सहित 36 अन्य लोगों के नाम हैं क्योंकि इन लोगों के खिलाफ सबूत अपर्याप्त हैं।
शहला राशिद ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से एक फर्जी मामला है जिसमें अंतत: हर कोई बरी हो जाएगा। चुनावों के ठीक पहले आरोपपत्र दाखिल किया जाना दर्शाता है कि किस प्रकार भाजपा इससे चुनावी फायदा उठानी चाहती है। मैं घटना के दिन परिसर में भी नहीं थी।’’ 

भाकपा नेता राजा ने कहा, ‘‘यह राजनीति से प्रेरित है। तीन साल बाद दिल्ली पुलिस इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर रही है। हम इसे अदालत में और अदालत के बाहर राजनीतिक रूप से लड़ेंगे।’’

जानिए,आख़िर मामला था क्या?

9 फरवरी 2016 में को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ अज्ञात युवकों ने संसद पर हमले के दोषी अफ़जल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था।इस विरोध प्रदर्शन में कुछ युवाओं ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे। इसके बाद कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।

ज्ञात हो की,दिल्ली पुलिस ने बीजेपी सांसद महेश गिरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की शिकायत के बाद दिल्ली के वसंत कुंज थाने में 11 फरवरी, 2016 को 124 ए (राजद्रोह) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था।
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