हे मानवी, तुम लुकाछुपी के खेल में जीत गयी।



हे मानवी,तुम लुका छुपी के खेल में जीत गयी, तुम्हारे मातापिता,तुम्हारे चाहने वाले, शंकर मार्किट के सभी लोग,प्रशासन अमला,जन प्रतिनिधि और हमलोग सब के सब हार गए.तुम सदा के लिए विदा हो गयी। जन्म से सिर्फ नो साल तक तुमने माता पिटा के गोंड में खेलना तय किया था। बीस जनवरी के दोपहर तक तुम हमलोग के साथ  रही। फिर जलधारा में हमेशा के लिए डुबकी  लगा ली।

आज दसवां दिन है,मानवी अपने मातापिता के साथ बीस जनवरी रविवार को पिकनिक मनाने रसगण्डा गयी थी। पप्पू ठककर अपने दोस्तों के साथ जब पिकनिक मनाने छतीसगढ़ जिला सूरजपुर के चान्दपुर थानार्गत रसगण्डा जलप्रपात शंकर मार्किट जिला सिगरौली मध्ययप्रदेश से सुबह चले तो उन्हें क्या पता था कि, वह अपनी नौ वर्षीय लाडली को हमेशा-हमेशा के लिए विदा कर मायुश हो लौट आयेंगे।

मानवी के जल प्रपात में बह जाने का मायुश खबर जब शंकर मार्केट में पहुंची तब पूरा मार्किट और चाहने वाले लोग गम में डूब गए। सभी आवाक और किम्कर्तव्य विमूढ़ हो आधी रात तक मार्किट में गुशुम खड़े रहे। अगले दिन सोमवार से अपने व्यक्तिगत संसाधनों द्वारा मार्किट की तरफ से रेस्क्यू शुरू कर दिया गया।प्रशासनिक अमला सक्रीय तो हुआ पर गंभीरता से नहीं लिया। किसी भी पार्टी के नेताओं का कुछ अता पता नहीं था। फलतः पुरे चार दिन तक शंकर मार्किट वासी ही आपने संसाधनों के बल पर जल प्रपात कि धारा को रोकने के लिए रेत भरी बोरियों से बांध-बांध कर खोजबीन शुरू की और जल प्रपात के ताल पर रस्सी के सहारे लोकल लोंगो के साथ मार्किट के नौजवान उतर गये,लेकिन परिणाम  शून्य रहा। 
अंत में जब उर्जांचल टाइगर ने जन्न प्रतिनिधि विधायक और सांसद के उदासीनता की पोल 24 जनवरी को खोल कर रख दी तो जनप्रतिनिधियों को झटका लगा। 25 को विधायक और 26 को सांसद महोदया और 27 को महापौर पीड़ित के घर पहुंची। 24 जनवरी की ही शाम भाजपा जिलाध्यक्ष कान्तिदेव सिंह नौ बजे पीड़ित परिवार के घर पाहूच गए थे।वहां उन्हें उर्जांचल टाइगर के "कार्यकारी सम्पादक" ने वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि यहाँ पर इस तरह का रेस्क्यू केवल और केवल एनडी आर ऍफ़ की टीम ही कर सकती है। उन्हें बताया कि केवल सांसद महोदया और आप ही के प्रयास से एन डी आर ऍफ़ की टीम आ सकती है। 

सांसद महोदया ,आपकी संवेदनहीनता के लिये शंकरमार्केट धन्यवाद करता है।

सहायता को कौन कहे सिगरौली के सांसद रीति पाठक और राम लल्लु पीडित पप्पू ठक्कर के यहां संवेदना देने भी नही पहुंचे | ग्यातव्य हो कि शंकर जयंत निवासी पप्पु ठक्कर की नौ वर्षीय मानवी रसगंडा़ झरना में रविवार बीस जनवरी को गिर कर बह गयी। पीडित परिवार अपने मित्तों
अध्यक्ष जी ने स्तिथि की गंभीरता को समझा और साढ़े नौ बजे के लगभग केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से बात चित कर ली और उर्जांचल टाईगर को बताया कि मंत्री जी ने टीम को भेजने की बात कही है। इस बात के 36 घंटे के अन्दर-अन्दर टीम घटना स्थल पर पहुंची, फिर प्रशासन और मार्किट के नौजवानों ने मेहनत कर एक बार फिर का बहाव को बांधने की कोशिश की लेकिन पानी पूर्णतया पानी रुक न सका।उसी दिन देर शाम महापौर ने स्टील प्लेट और जेसीवी जलप्रपात तक पहुंचवा दिया।अगले दिन यानी 28को जेसीवी और प्लेट्स से बंधा मजबूती से बाँध कर प्रवाह पुर्णतः रोक दिया गया और तब एन डी आर ऍफ़ की टीम ताल तक उतर कर रेस्क्यू शुरू कर दिया। दुखःद,परिणाम एक बार फिर शुन्य रहा। आज 29 जनवरी को टीम पुनः ताल तक पहुंची और गाद तथा चट्टानों की दरारों में तलाश की। छत्तीसगढ़ के जिला सूरजपुर और एमपी के सिंगरौली  के कलेक्टर, एसपी और उनका अमला पूरी तरह पिछले चार दिन से लगा रहा पर सबकुछ बेकार रहा। 
 मानवी को नहीं मिलना था नहीं मिली, कहाँ छुप गई पता नहीं,मानवी, तुम्हें हर चाहने वाला तुम्हारे इन्त्जार में ..
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