पाकिस्तान पर कठोर कार्यवाही अति अनिवार्य !

कठोर आर्थिक प्रतिबंध में कोताही क्यों? जैसे पाकिस्तानी सीमेंट का आयात भारत में बंद हो

राहुल लाल 
जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला किया है,जिसमें सीआरपीएफ के कम से कम 44 जवान शहीद हो गए तथा 45 जवान घायल हैं।अवंतीपुरा के गोरीपोरा इलाके में सुरक्षाबलों के काफिले पर आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के आतंकी ने यह शर्मनाक एवं कायरतापूर्ण कार्यवाई की है।इस काफिले में लगभग 78 गाड़ियां शामिल थी,जिसमें 2,547 जवान सवार थे।यह आतंकवादी हमला पूर्व के हमलों से काफी अलग रहा।पहली बार मानव बम में के रुप में आतंकवादियों ने एक भारतीय का प्रयोग किया,जबकि इसके पूर्व जितने भी फिदायिन हमले हुए,उसमें मानव बम पाकिस्तानी आतंकवादी ही हुआ करते थे।

इस हमले को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने जो तरीका अपनाया वह भी अलग था।आतंकी आदिल अहमद ने 350 किलोग्राम के अत्यंत खतरनाक विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी।जम्मू कश्मीर में हमला करने का यह एकदम नया तरीका था।यह धमाका इतना तीव्र था कि बस के परखच्चे उड़ गए और चंद मिनटों में बस के आसपास लाशें बिखर गई।इस तरह के अधिकांश हमले अफगानिस्तान या इराक में होता था।इस पैटर्न का प्रथम आतंकी हमला फ्रांस के नीस शहर में हुई थी,जहाँ आतंकी ने बास्तील डे का जश्न मना रहे लोगों पर ट्रक चढ़ा दिय था।

आखिर भारत अपनी सॉफ्ट स्टेट की छवि को क्यों नहीं तोड़ पा रहा है?
प्रश्न उठता है कि आखिर भारत अपनी सॉफ्ट स्टेट की छवि को तोड़ क्यों नहीं पा रहा है।आजादी के बाद अबतक भारतीय सेना के करीब 48 हजार से ज्यादा जवान आतंकवादी हमलों में शहीद हुए हैं,जबकि प्रत्यक्ष युद्ध में मरने वालों की संख्या इससे कम रही है।इस तरह पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद के छद्म युद्ध के द्वारा भारत को लगातार नुकसान पहुँचा रहा है।ऐसे में आतंकवाद के प्रति हमारा रवैया रक्षात्मक क्यों है?आवश्यकता है कि हम लोग आतंकवाद के प्रति पूर्णतः आक्रामक रवैया अपनाएँ।अब देश के लिए आवश्यक है कि हम लोग पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करने के स्थान पर अब आतंकवाद के जड़ पर कठोर प्रहार करें।इसके लिए आवश्यक है कि लड़ाई देश के भीतर नहीं होनी चाहिए, अपितु देश के बाहर होनी चाहिए।अगर हमारा रूख आक्रामक होता तो यह युद्ध स्वाभाविक तौर पर देश के बाहर होगा।इस मामले में हमें कठोर इजराइली रणनीति का पालन करना चाहिए। रक्षात्मक कार्यवाई के कारण हमारे सुरक्षाबलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

कठोर आर्थिक प्रतिबंध में कोताही क्यों? जैसे पाकिस्तानी सीमेंट का आयात भारत में बंद हो

शुक्रवार को सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने पाकिस्तान के" मोस्ट फेवर्ड नेशन"के दर्जें को समाप्त करने की घोषणा की,जो सराहनीय कदम है,परंतु पर्याप्त नहीं है।इसके लिए पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंधों को सख्त करने की आवश्यकता है।उदाहरण के लिए वर्ष 2007 से पाकिस्तान से आ रहे सीमेंट पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है,जिससे भारतीय सीमेंट उद्योग नष्ट हो रहे हैं।भारतीय सीमेंट उद्योग को 28% ऊँचे जीएसटी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पाकिस्तानी सस्ता सीमेंट हमारे उद्योग को लील रहा है।वित्तीय वर्ष 2017-18 में 16.82 लाख टन का पोर्टलैंड सीमेंट भारत ने आयात किया,जिसमें से 12.72 टन सिर्फ पाकिस्तान से आयात।अर्थात पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने कुल सीमेंट का 76% सिर्फ पाकिस्तान से आयात किया,जिसे अब जल्द से जल्द रोकने की आवश्यकता है।

पाकिस्तान पर कठोरतम कार्यवाई क्या हो?

पाकिस्तान पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक भी पाकिस्तान के व्यवहार में ज्यादा परिवर्तन नहीं ला पाया।भारतीय सेना के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक में नष्ट किए गए आतंकी लांचपैड फिर सक्रिय हो गए हैं।ऐसे में भारत द्वारा योजनाबद्ध तरीके से पुन: पाकिस्तान पर कठोर कार्यवाही अति अनिवार्य है।

अब मुख्य प्रश्न उठता है कि पाकिस्तान पर कठोरतम कार्यवाही क्या हो,जिससे हमें पाकिस्तान के प्रति निवारक निरोध प्राप्त हो सके? इसके लिए भारत को पाकिस्तान पर बहुस्ततरीय कार्यवाही करनी होगी,जिसमें सैन्य कार्यवाही, कूटनीतिक कार्यवाही, आर्थिक प्रतिबंध जैसे तमाम विकल्प उपलब्ध हैं।सैन्य कार्रवाई के अंतर्गत और भी कठोर कई सर्जिकल स्ट्राइक किए जा सकते हैं।यह कार्यवाही कब और किस रुप में क्रियान्वित की जाए,इस पर सेना को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ कार्यवाई का अधिकार उपलब्ध होना चाहिए।दीर्घावधि समाधान हेतु हम लोग देख रहे हैं कि पाकिस्तान की सेना अभी दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ रही है,एक अफगानिस्तान के सीमा पर तथा दूसरा भारतीय सीमा पर।अफगानिस्तान के साथ मिलकर भारत को दोनों ही सीमाओं पर दबाव बनाना चाहिए।
पाकिस्तान का परम प्रिय मित्र चीन भी भारत के विरोध के कारण ही उसका घनिष्ठ मित्र है।अगर पाकिस्तान भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध बंद कर देगा,तो चीन का भी पाकिस्तान से मोहभंग हो जाएगा।ऐसे में भारत के लिए सैन्य दृष्टि से यह आवश्यक है कि वह पाकिस्तान पर और भी कठोर सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकवादियों की कमर तोड़ दे।साथ ही वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग करने के लिए चीन को भी अति विशिष्ट ढंग से संतुलित करने की कूटनीति पर कार्य करे।इसके लिए आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक गोलबंदी और तेज करके चीन पर दबाव बनाना होगा।

पुलवामा आतंकवादी हमला की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है,जिसका सरगना मसूद अजहर है।इसके पूर्व उड़ी आतंकवादी हमलों को भी जैश ने ही अंजाम दिया था।भारत संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का प्रयास करता रहा है।लेकिन चीन द्वारा वीटो के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।चीन ने पुनः इस मामले में सहयोग से इंकार कर दिया है।भारत के लिए आवश्यक है कि वह चीन पर भी यथोचित दबाव बनाएँ।
  • भारत को इस संपूर्ण मामले पर पाकिस्तान पर मुँहतोड़ कार्यवाई करनी होगी।सीमा पर हमारे सुरक्षाकर्मी पाकिस्तान पर कठोर कार्यवाई कर रहे हैं,लेकिन इस जवाबी कार्यवाई को और घातक बनाने की आवश्यकता है,जिससे पाकिस्तान पुन: इस तरह का दुस्साहस नहीं कर सके।

  • इसके अतिरिक्त कूटनीतिक तौर पर सिंधु जल समझौता को अब हथियार बनाने की आवश्यकता है।अगर भारत अपने इस निर्णय पर कायम रहा तो पाकिस्तान एक-एक बूँद पानी के लिए परेशान हो जाएगा।इससे न केवल पाकिस्तान की कृषि प्रभावित होगी,अपितु संपूर्ण अर्थव्यवस्था थम जाएगा।

  • सर्जिकल स्ट्राइक्स के अतिरिक्त भारत के पास "सीमित युद्ध"के विकल्प भी उपलब्ध हैं।भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में बल प्रयोग कर उसे आतंकवादियों से पूर्णतः मुक्त करा सकता है।पाकिस्तान के ऊपर अंततः ऐसी सैन्य कार्यवाई करने की आवश्यकता है कि वह कभी पुनः भारतीय सीमा की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखे।

  • पाकिस्तान आखिर जिस कीमत पर झुकने पर बाध्य हो,उसी कीमत पर उसे बाध्य किया जाए।प्रायः ऐसे हालात में पाकिस्तान न्यूक्लियर वार की गीदड़भभकी देता है। 1999 के तीन माह के कारगिल वार में पाकिस्तान ने आखिर कितना बार न्यूक्लियर हथियार प्रयोग किया? भारत भी एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है।
संवेदनशील क्षेत्रों में मूवमेंट के लिए हेलीकॉप्टर का प्रयोग

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर(SOP) को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।कश्मीर के घाटी क्षेत्र में मूवमेंट के लिए जहाँ तक संभव हो,हेलीकॉप्टर प्रयोग हो।कई लोग इसके व्यवहारिकता पर प्रश्न उठा सकते हैं।लेकिन अब जब भारत दुनिया की 6 ठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है,तो जवानों के सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया ही जा सकता है।हमारे वीआईपी मूवमेंट के लिए जब हेलीकॉप्टर हो सकते हैं,तो जवानों के लिए क्यों नहीं।

तकनीक का उच्चतम प्रयोग

अगर इन 2500 जवानों के काफिले में कई ड्रोन कैमरे होते,तो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की कमियों के बावजूद दूर से ही हमारे जवान संदिग्धों पर हमला कर सकते थे।इसी तरह सीमा को सुरक्षित करने के लिए भी हमें इजराइली पद्धति से सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस लगाना चाहिए, जिससे जैसे ही कोई आतंकवादी बॉर्डर क्रॉस कर सीमा में प्रवेश करे,स्वत:स्फूर्त रूप से उसपर हमला हो जाए।इस तरह तकनीक के प्रयोग से कठोर सुरक्षा के साथ ही सुरक्षा कर्मियों के अमूल्य जीवन को सुरक्षित किया जा सकेगा।

विभिन्न खुफिया एजेंसियों में बेहतर समन्वय की आवश्यकता

आखिर 350 किलोग्राम के विस्फोटक का संग्रहण और गाड़ी में प्रयोग जैसी बड़ी घटना खुफिया एजेंसियों को पता क्यों नहीं लगी?जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी इस चूक को स्वीकार किया है।जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आर्मी,जम्मू कश्मीर पुलिस इत्यादि की खुफिया एजेंसियाँँ लगातार सक्रिय रहती है।ऐसे में इन खुफिया एजेंसियों को यह गंभीर सूचना क्यों नहीं मिल पाई।स्पष्ट है कि इन खुफिया एजेंसियों में समुचित समन्वय की और भी आवश्यकता है।इसके लिए सभी खुफिया एजेंसियों की सूचना को किसी एक एजेंसी के पास केंद्रीकृत कर आवश्कतानुसार संबंधित एजेंसियों के साथ डेटा शेयर करने की जरूरत है।

स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने पर भी बल देना

सीमापार आतंकवाद को अगर पंजाब से खत्म किया जा सकता है,तो जम्मू कश्मीर से क्यों नहीं?इसके लिए स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना भी अपरिहार्य है।अब तक पाकिस्तान भाड़े के आतंकवादियों को मानव बम के रुप में प्रयोग कर रहा था,लेकिन अब पहली बार उसने एक स्थानीय युवक को मानव बम बनाया।यह आतंकवाद के खतरनाक दौर के तरफ संकेत कर रहा है।इसलिए आवश्यकता है कि इस संपूर्ण मामले के लिए जहाँ एक ओर कठोर सैन्य कार्यवाई हो,वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पहल भी अनिवार्य है।

पुलवामा शहीदों को तकनीकी तौर पर भी शहीद का दर्जा मिले

इस संपूर्ण मामले में सबसे दुखद बात यह है कि सीआरपीएफ के 44 शहीद जवान तकनीकी तौर पर शहीद नहीं माने जाएँगें।सीआरपीएफ,बीएसएफ, आइटीबीपी इत्यादि को पैरामिलिट्री कहते हैं।इनके जवान अगर ड्यूटी के दौरान मरते हैं,तो उन्हें शहीद नहीं कहा जाता है।वहीं थल सेना,नौसेना एवं वायु सेना के जवानों की ड्यूटी के दौरान अगर जान जाती है,तो उन्हें शहीद का दर्जा मिलता है।स्पष्ट है कि सभी सरकारों ने जवानों के लिए बड़ी-बड़ी बातें तो जरूर की,लेकिन असल में देश के इन जवानों के लिए बड़ा कदम नहीं उठाया गया।

पाकिस्तान को जवाब देना ही होगा।

क्वेटा आतंकवादी हमले से यह स्पष्ट हो चुका है कि जिन आतंकवादियों को पाकिस्तान भारत पर हमले के लिए तैयार करता है,वे उनके लिए भी खतरनाक होते हैं,परंतु पाकिस्तानी नीति निर्माताओं को शायद भस्मासुर की कहानी की मूल प्रेरणा समझने की कोई दिलचस्पी नहीं है।

इसका मूल कारण है कि पाकिस्तान भारत से सीधे युद्ध कर परास्त करने की हालत में नहीं है,इसलिए सीमापार आतंकवाद हो या सीसफायर का उल्लंघन इत्यादि के माध्यम से धद्म युद्ध में भारत को पराजित करना चाहता है।लेकिन अब पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए,अब जब भारत घातक कठोर कार्यवाई करेगा,तो इस छद्म युद्ध की अवधि ज्यादा अधिक नहीं है।भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है,उसे हर हाल में पाकिस्तान को समुचित सैन्य और कूटनीतिक जवाब देना ही होगा।

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