बिहार शेल्टर होम मामला - CM नीतीश कुमार पर आई जांच की आंच

बच्चों को तो बख्श दीजिए। सरकार आप चला रहे हैं हम नहीं।


मुजफ्फरपुर।।पॉक्सो कोर्ट ने सीबीआई को मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। पोक्सो की एक विशेष अदालत ने यहां एक आरोपी अश्विनी की ओर से दायर आवेदन पर शुक्रवार को यह आदेश दिया।अश्विनी पेशे से एक चिकित्सक है,जो कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किये जाने से पहले बच्चियों को नशीली दवाएं देता था।

अश्विनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सीबीआई जांच में उन तथ्यों को छुपाने की कोशिश कर रही है, जो मुजफ्फरपुर के पूर्व डीएम धर्मेंद्र सिंह, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अतुल कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर के पूर्व डिवीजनल आयुक्त और मौजूदा प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिकाओं की जांच करने के बाद सामने आ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

इससे पहले शेल्टर होम केस की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कुमार को जमकर फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटना और सरकार की तरफ से कमजोर दलीलों पर बिहार सरकार को लताड़ लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था,अब बस बहुत हो गया, बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। बच्चों को तो बख्श दीजिए। सरकार आप चला रहे हैं हम नहीं। लेकिन सवाल ये उठता है कि आप किस तरह से सरकार चला रहे हैं?

ट्रांसफर कैसे हुआ ट्रांसफर जांच अधिकारी का?

कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की जांच कर रहे अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी। सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में अभी तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है। कोर्ट ने पूछा, इस मामले की जांच कर रहे एक सीबीआई ऑफिसर का ट्रांसफर बिना सुप्रीम कोर्ट के इजाजत के कैसे किया गया? क्या कैबिनेट कमेटी, जिसने अधिकारी का तबादला किया उन्हें कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई थी?
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