मीडिया के बयानवीर-जनसभाओं में गप्प गप्प और संसद में चुप !


रकार के कामकाज को प्रश्नकाल की कसौटी पर कसी जाती है, लेकिन क्या हमारे सांसद वास्तव में सवालों के हल ढूंढ़ने में रुचि रखते हैं? सवाल यह भी उठता है कि हम सांसद क्यों चुनते हैं? हम सांसद चुनते हैं, ताकि वह हमारे क्षेत्र की समस्याओं को व्यवस्था के सामने रख सके। उसे दूर कर सके। सांसद के पास ऐसा करने का पहला औजार होता है संसद का ‘प्रश्नकाल’। प्रश्नकाल के दौरान सरकार को कसौटी पर परखा जाता है और प्रत्येक मंत्री, जिनके  प्रश्नों का उत्तर देने की बारी होती है, उनको खड़े होकर अपने अथवा अपने प्रशासनिक कृत्यों में भूल-चूक के संबंध में उत्तर देना होता है। प्रश्नकाल के माध्यम से सरकार राष्ट्र की नब्ज को तुरंत पहचानकर अपनी नीतियों को ठीक करने का काम करती है।

सांसद चाहे किसी पक्ष का हो,उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी उस क्षेत्र को लेकर होनी चाहिए जहां का वह प्रतिनिधित्व कर रहा है। आम मतदाताओं को इस बात की जानकारी होनी ही चाहिए कि आपके 543 सांसदों में हर कोई अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है।

16वीं लोकसभा में  सांसदों ने जनता से जुड़े कितने सवाल किए?

  • 16वीं लोकसभा में कुल 79050 सवाल पूछे गए। 
  • 26% सांसदों ने संसद में औसत (140) से भी कम सवाल पूछे
  • 31- सांसदों ने नहीं पूछा एक भी सवाल
  • 53- सांसदों ने 20 या उससे कम सवाल पूछे
  • 11- सांसदों ने सिर्फ एक सवाल पूछा

16वीं लोकसभा के दौरान विभिन्न मंत्रालयों में सबसे अधिक सवालों का सामना वित्त विभाग को 5176 प्रश्नों का सामना करना पड़ा। इसके बाद मानव संसाधन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का नंबर रहा। उन्हें क्रमश: 4791 और 3995 सवालों का सामना करना पड़ा। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (472), प्लानिंग मिनिस्ट्री (461), ऊर्जा (461), पंचायती राज (430), अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (598), अंतरिक्ष (317), स्टैटिक्स और प्रोग्राम इम्प्लिमेंटेशन मिनिस्ट्री (300) ऐसे मंत्रालयों में रहे जिन पर संसद में कम सवाल-जवाब हुए।

प्रधानमंत्री से मात्र पांच सवाल पूछे गए।

आमतौर से मीडिया में विपक्ष के नेता इस बात का आरोप लगाते हैं कि प्रधानमंत्री सवालों के जवाब नहीं देते, लेकिन 16वीं लोकसभा के आंकड़े बताते हैं कि संसद में प्रधानमंत्री से सिर्फ पांच सवाल ही पूछे गए। अंतिम बार प्रधानमंत्री से संसद में किसी ने साल 2016 में कोई सवाल पूछा था। 14 दिसंबर 2016 को सांसद चंदूलाल साहू ने प्रधानमंत्री से कार्य-निष्पादन निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (पीएमईएस) के बारे में सवाल किया था। प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या सभी विभागों को पीएमईएस के अंतर्गत कवर किया गया है? प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब में सदन को बताया था कि ‘सरकार ने वर्ष 2014-15 के दौरान और उसके बाद कार्य-निष्पादन निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (पीएमईएस) के तंत्र पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की है।

सोनिया,आडवाणी, मुलायम पांच साल में कुछ नहीं पूछे

लोकसभा की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक 16वीं लोकसभा में 59 मंत्रालयों से सांसदों ने अलग-अलग सवाल पूछे। इनमें कुल 31 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने एक भी सवाल पूछना मुनासिब नहीं समझा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा, सपा के दिग्गज नेता मुलायमसिंह यादव आदि ने इन पांच साल में एक भी सवाल नहीं पूछा। 

शिवसेना - एनसीपी ने हजार-हजार सवाल पूछे

कई ऐसे सांसद भी रहे, जिन्होंने 16वीं लोकसभा में हजार से भी ज्यादा सवाल पूछे। महाराष्ट्र के मावल संसदीय क्षेत्र से शिवसेना के सांसद श्रीरंग अप्पा बर्ने (1000), मध्यप्रदेश के मंदसौर से भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता (1015), दक्षिण-पश्चिम मुंबई से शिवसेना सांसद गजानन चंद्रकांत किरीटकर (1011), महाराष्ट्र के कोल्हापुर से एनसीपी के सांसद भीमराव महादिक (1182), बारामती से एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले (1192) के अलावा भी कुछ और सांसद हैं, जिन्होंने वर्तमान लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों से 1000-1000 से ज्यादा सवाल किए। इन सवालों की संख्या कई मंत्रालयों से पूछे गए कुल सवालों से भी ज्यादा है। हालांकि ऐसे सांसदों की संख्या महज 11 ही है।


मीडिया के बयानवीर,सदन में चुप्पी साध लेते हैं।

डिम्पल यादव (1), रामकृपाल यादव (1), जयंत सिन्हा (10), गिरिराज सिंह (5), डॉ. सत्यपाल सिंह (23), मेहबूबा मुफ्ती (26), वीरप्पा मोइली (12), साध्वी निरंजन ज्योति (1), डॉ. मुरली मनोहर जोशी (4), बंडारु दत्तात्रेय (12), मध्यप्रदेश से सांसद नंदकुमारसिंह चौहान (6), डॉ. फारुख अब्दुल्ला (13) ये कुछ खास बयानवीरों के नाम हैं, जो देशभर के मीडिया में छाए रहते हैं। लगभग हर मुद्दे पर इस अधिकार से बात करते हैं जैसे हर समस्या का हल इनके पास हो। लेकिन, जब बात सदन में सवाल पूछने और गंभीर मुद्दे उठाने की आती है तो बयानवीर चुप्पी साध लेते हैं।


संसद में गले मिले,लेकिन सवाल नहीं पूछे

16वीं लोकसभा में  में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को पिछली सरकार का पाप बताया,लेकिन मनरेगा को न केवल जारी रखा बल्कि उसका बजट भी बढ़ाया। आजदी के बाद पहली बार आधी रात को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया और जीएसटी का बिल पास हो गया। लोकसभा अध्यक्ष के कामकाज के तरीके पर प्रश्न चिह्न उठे और बाद में उस ‘प्रश्न’ को कार्यवाही निकाल दिया गया। सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार पर कई सवाल उठाए। सवाले उठाते हुए वह प्रधानमंत्री से गले भी जा मिले। लेकिन अफसोस की उन्होंने अपने क्षेत्र से, देश से जुड़ा ऐसा कोई सवाल प्रश्नकाल में नहीं उठाया। जिसका कुछ न कुछ जवाब सरकार को देना ही पड़ता।

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