पुस्तक समीक्षा- जीवन के अनसुलझे रहस्य को सुलझाने की तदबीर


  • एम. अफसर खान ‘सागर’
  • पुस्तक - जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज
  • लेखक - मनीष
  • प्रकाशक - नोशन प्रेस, चेन्नई
  • कीमत - 199 रुपए

जिन्दगी की भाग दौड़ में इंसान भौतिक संसाधन जरूर हासिल कर रहा है मगर उसके जीवन से सकून गायब सा होने लगा है। तनाव रहित जीवन जीने के लिए लोग न जाने कितने तदबीर कर रहे हैं। ‘जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज’ पुस्तक के माध्यम से मनीष ने मेडिटेशन और योग को अपना कर तनाव रहित जीवन जीने की कला को बहुत फलसफाने अंदाज में बयान किया है। लेखक ने बतलाया है कि योग सही तरह से जीवन जीने का विज्ञान है। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है - भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक। पुस्तक के माध्यम से लेखक ने लोगों को योग के गूढ़ रहस्यों से परिचय कराया है। भारतीय रेल सेवा के अधिकारी मनीष ने अति दुरूह ध्यान प्रयोगों के माध्यम से उस रहस्य को जानने का कामयाब कोशिश किया है। लेखक ने तकरीबन पन्द्रह सालों तक विश्व के तमाम धर्मों के विभिन्न शाखओं का अध्ययन एवं समकालीन विचारकों के ग्रंथों का गहन अध्ययन एवं विशलेषण करने के पश्चात यह पुस्तक लिखा है। लेखक ने बतलाया है कि भारतीय दर्शन की नींव सत्य, प्रेम, अहिंसा एंव सर्व कल्याण को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है। इस संस्कृति में सत्य को प्रतिपादित करते हुए मानव कल्याण की खातिर मनसा, वाचा, कर्मणा की अवधारणा को महत्व दिया गया है। लेखक बतलाता है कि हमारा सबका सुख सामूहिक सुख है, और दुःख है। भारतीय दर्शन में अध्यात्म मनुष्य के वास्तविक स्वरूप को जानने के साथ-साथ भौतिक जगत के सम्बंध को भी पहचाना है।
जीवन के अनसुलझे रहस्य को सुलझाने की तदबीर,  
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लेखक ने पुस्तक में हमारे जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं के मूल कारण एवं उनके निराकरण के उपायों पर विस्तार से चर्चा किया है। रूपक कथाओं एवं मोबाइल फोन के माध्यम से जीवन के अनसुलझे रहस्यों को आसानी से समझाने का प्रयास किया है। लेखक ने समझाया है कि इंसान कुछ को पाने और इस कुछ को खोने के चक्कर में हमारा पूरा जीवन व्यर्थ चला जाता है। परंतु जीवन के अंत में हर इंसान यही महसूस करता है कि इस तथाकथित कुछ को पाने के चक्कर में उसने बहुत कुछ यानि स्वयं को खो दिया है। इस पुस्तक को पढ़ने से आम इंसान भी ध्यान की विभिन्न विधियों, समाधि के रहस्य एवं जीवन के सत्य के बारे में बड़ी आसानी से ज्ञान हासिल कर सकता है। लेखक मनीष योग एवं मेडिटेशन के बेहतरीन ट्रेनर हैं। मनुष्य के दिमाग में भरी पुरानी व बेकार स्मृतियों को किस तरह हटाकर नई उर्जा एंव ताजा विचार के संचार हेतु मोबाइल के मेमोरी का उदाहरण देकर समझाते हैं कि जिस तरह मोबाइल में एप्प और गैलेरी के फुल हो जाने से मोबाइल हैंग करने लगता है तथा फार्मेट अथवा डिलीट कर उसे खाली करना पड़ता है, ठीक उसी तरह मानाव दिमाग में बचपन से ही धर्म, व्यापार, भाषा सहित बहुत सी बातें जमा होती हैं जिससे पैदा तनाव व डिप्रेशन से मुक्ति के लिए योग और मेडिटेशन के जरिये फारमेट किया जाना चाहिए। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने आत्म साक्षात्कार से प्राप्त अपने अनुभवों के आधार पर जीवन के उस परम रहस्य को वर्तमान युग के परिप्रेक्ष में रेखा चित्रों, रूपक कथाओं एवं संकेतों के माध्यम से हल करने का सफल प्रयास किया है। यह पुस्तक सात भागों में है, जिसका यह पहला भाग है। पुस्तक ने आनलाइन बिक्री में एक नया रिकार्ड कायम किया है। ई-मार्केटिंग साइट अमेजन सहित दूसरे प्लेटफार्म पर आसानी से उपलब्ध है। निःसंदेह यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी एंव संग्रहणीय है।

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