पुलवामा आतंकी हमले का मास्टर माइंड मसूद अजहर मारा गया?

1999 में भारत से रिहा हुआ था मसूद


आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का चीफ और पुलवामा आतंकी हमले का मास्टर माइंड मसूद अजहर के मारे जाने की खबर है। हालांकि पाकिस्तान ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।भारतीय सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि इस संबंध में जानकारी इकट्ठा की जा रही है कि वास्तव में मसूद अजहर मुर्दा है या जिंदा।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में किए गए एयर स्ट्राइक में वह बुरी तरह घायल हो गया था। गौर हो कि जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर विस्फोटक भरी कार को टकरा दी थी। जिसकी वजह से सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर स्ट्राइक के वक्त मसूद अजहर कैंप में सो रहा था। रावलपिंडी के अस्पताल में दो मार्च को मौत हो गई। हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि जैश चीफ मौलाना मशूद अजहर पाकिस्तान में है लेकिन उसकी तबीयत बहुत खराब है। 

1999 में भारत से रिहा हुआ था मसूद

मसूद अजहर को भारत ने फरवरी 1994 में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग से गिरफ्तार किया गया था। इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अगवा किए गए यात्रियों को छुड़ाने के बदले 24 दिसंबर 1999 में मसूद अजहर समेत दो साथियों को मजबूरन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को उसे रिहा करना पड़ा। रिहा होने के बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया था। इस संगठन का भारत में कई आतंकी हमलों के पीछे हाथ रहा है।

जैश ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली है।

14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करके बड़ी घटना को अंजाम दिया है।सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इसके बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। मसूद अजहर के आतंकी संगठन ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली है। यही नहीं कश्मीर में बॉर्डर पर लगातार गोलाबारी के लिए भी जैश को ही जिम्मेदार माना जा रहा है।

एयर स्ट्राइक जैश का सबसे बड़ा ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त हो गया था।

भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां स्थित बालाकोट में जैश के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी जिसमें जैश का सबसे बड़ा ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त हो गए थे। 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे। सूत्रों के मुताबिक करीब 300 से अधिक आतंकी हमले में मारे गए। 1971 के युद्ध के बाद भारतीय वायुसेना ने पहली बार पाकिस्तान के भीतर ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया।
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