पढ़िए,अमेरिका भारत से क्यों वापस ले रहा है GSP का दर्जा !

अमेरिका के एक फैसले से भारत को 40,000 करोड़ रुपए का होगा नुक्सान?


जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेंज GSP पर अमेरिका भारत को बड़ा झटका देने जा रहा है। अमेरिका ने कहा है कि वह भारत से जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेंज (GSP) का दर्जा वापस लेगा। 

सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद में ये जानकारी दी। अमेरिकी कानून के मुताबिक यह बदलाव नोटिफिकेशन जारी होने के 2 महीने बाद लागू हो पाएंगे। जीएसपी के दर्जा वापस लिए जाने से भारत को 5.6 अरब डॉलर यानी कुल 40 हजार करोड़ का नुकसान होगा।

ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि भारत अब वैधानिक पात्रता मानदंडों का पालन नहीं कर रहा है। अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है। अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता।

जानिए जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेंज GSP है क्या ?

जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) अमेरिकी ट्रेड प्रोग्राम है जिसके तहत अमेरिका विकासशील देशों में आर्थिक तरक्की के लिए अपने यहां बिना टैक्स सामानों का आयात करता है। अमेरिका ने दुनिया के 129 देशों को यह सुविधा दी है जहां से 4800 प्रोडक्ट का आयात होता है। अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 1 जनवरी 1976 को जीएसपी का गठन किया था।

अमेरिका का इस फैसले पर क्या है तर्क?

ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है कि ,बीते साल अमेरिका ने अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी।भारत जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है।  उन्हें भारत से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। उनका कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है।  

भारत के अर्थव्यवस्था पर क्या  होगा असर?

अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम के लाभार्थी विकासशील देशों के उत्पादों पर अमेरिका में कोई आयात शुल्क नहीं लगता। इसके तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के एक्सपोर्ट पर छूट मिलती है। जीएसपी से बाहर होने पर भारत को यह फायदा नहीं मिलेगा। भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।
वाणिज्य सेक्रेटरी अनूप वाधवा नें इस बारे में कहा है, “हमारा मानना है कि इस फैसले से भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात किये जा रहे 5.6 अरब डॉलर के व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”अनूप नें यह भी कहा कि “अमेरिका को यह देखना चाहिए कि भारत मुख्य रूप से दवाइयों का निर्यात करता है, जिनपर मुनाफा काफी कम होता है और जिनका उद्देश्य लोगों की भलाई होता है।”

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