मध्यप्रदेश - मैं तीन बेटों की मां हूं, एक साल से शौचालय में रह रही हूँ !

एक माँ को क्यों शौचालय को बनाना पड़ा आशियाना

प्रतीकात्मक तस्वीर

सतना(मध्यप्रदेश)।।स्वच्छ भारत अभियान के तहत 4 बरस पहले जब बुटनिया साकेत के घर पर मझोले बेटे के हिस्से में शौचालय बना था तो उसने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन वही शौचालय उसका आशियाना बन जाएगा। जिस उम्र के नाजुक पड़ाव में बेटे बुजुर्ग मां-बाप के सहारे की लाठी बनते हैं उस उम्र में कलयुगी पुत्र के लिए मां बोझ बन गई। महिला की उम्र 70 साल है और वह अपना सारा सामान भी उसी शौचालय में रखती है। खुद के किए खाना भी वो वहीं बनाती हैं और शौचालय के अंदर ही सोती भी हैं। यह कोई कहानी नहीं सच्ची घटना,मध्यप्रदेश में सतना जिले के अमरपाटन विकासखण्ड अंतर्गत बर्रेह गांव का है।

रिपोर्ट के अनुसार,70 वर्षीय महिला को उसके परिवार के सदस्यों ने एक निजी मुद्दे पर शौचालय में रहने के लिए मजबूर किया। घटना की जानकारी के बाद,अधिकारियों को मामले को सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास भेजना पड़ा।तहसीलदार मवेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि इस मामले को एसडीएम तक पहुंचा दिया गया है और वे अभी उस महिला के लिए घर खोजने की कोशिश कर रहें है

मीडिया से बात करते हुए महिला ने बताया
“मैं तीन बेटों की मां हूंमेरी बहू और मुझमें हमेशा से कुछ न कुछ मुद्दों पर बहस हो जाया करती थी। मुझे बाद में घर से बाहर निकाल दिया गया। मैं अब एक साल से शौचालय में रह रही हूँ। मैं अपने लिए खाना बनाती हूं और वहीं सोती हूं।”
‘पूत कपूत हो सकता है पर माता कभी कूमाता नहीं होती’. ऐसी कहावत ऐसे बच्चों के ऊपर ही लिखी गयी है। जब मीडिया वालों ने उस महिला से उसके स्थिति के बारे में पूछा तब भी उसने अपने बेटे को बेटा ही कह कर संबोधित किया। ये होती है माँ,और माँ की ममता। 

आज आप अपने माँ बाप के साथ बुरा कर रहे हैं तो आप भी तैयार रहिए,अपनी बारी के लिए.क्योंकि वक़्त बहुत जल्दी पलटता है।आप जो कर रहें हैं,वह आपका बच्चा देख रहा है,और बच्चे जो देखता है,वाही सीखता हैं। 

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