नए इंडिया की नई पीढ़ी ने दिखाया अपना दम

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2019 का हुआ समापन।


स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2019 का हुआ समापन
जीत नारायण सिंह 
न्यू इंडिया निर्माण के तहत डिजिटल सेवा को बढ़ावा देने व युवा पीढ़ी के हुनर को एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म दे रहे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2019 का आज समापन हो गया। प्रतियोगिता में देश के लगभग हर कोने से आए प्रतिभागियों ने लगातार 36 घंटे तक कार्य कर वास्तविक समस्याओं के वास्तविक समाधान निकाल डिजिटल क्षेत्र में भारत के उज्जवल भविष्य की चमक बिखेरी।

आपको बता दें प्रतियोगिता सरकार की योजना है लेकिन इसे प्राइवेट कंपनियां स्पॉन्सर कर रही है। विभिन्न प्राइवेट कंपनियों ने अपनी विभिन्न डिजिटल समस्या के समाधान इन प्रतिभागियों से मांगे थे और जिस टीम ने उनकी समस्या का सबसे बेहतर समाधान दिया कंपनी की तरफ से उसे नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। क्यूंकि समस्या कंपनी द्वारा दी गई थी इसलिए उन डिजिटल समस्या के समाधान कितने प्रभावी हैं इसका आकलन करने में निर्णायक की भूमिका की जिम्मेवारी भी कंपनी द्वारा संभाली गई। आपको बता दें प्रतिभागियों में विजेता के चुनाव के 5 पैमाने बनाए गए थे। 

पहला यह था कि उन्होंने जो एप या सॉफ्टवेयर डेवलप किया है वो कितनी जल्दी बाजार में उतारी जा सकती है। उसकी तकनीक कितनी विकसित है। उसका उपयोग करना कितना आसान है, कितनी आसानी से उसे आम लोगों की पहुंच में लाया जा सकता है और उसने किस हद तक कंपनी की समस्या समाधान में सफलता पाई है। इसके साथ ही कंपनी द्वारा कुछ टीमों को एक लाख, कुछ को 75,000 व कुछ टीमों को 50,000 की राशि सौंपी गई क्यूंकि कंपनी ने अपने प्रॉब्लम्स के अनुरूप ही उसके सॉल्यूशन में खर्च राशि का अनुमोदन किया था।

प्रतियोगिता का आयोजन देश के 42 शहरों के 48 नोडल केंद्रों में किया गया था, जिसमे लगभग 1400 टीमों (एक टीम में 6 छात्र छात्राएं व दो मेंटर) ने फाइनल राउंड के लिए अपना स्थान सुनिश्चित किया था।

इसी क्रम में बीएचयू के सीडीसी सेंटर को भी एक नोडल केंद्र बनाया गया था जिसमें कुल 29 टीमें हिस्सा लेने अाई थी। इन 29 टीमों से गूंज फाउंडेशन, मारुति सुजुकी, एमएसएमई व मिक्स ओ आर जी जैसी विभिन्न संस्थानों, कंपनी द्वारा अपनी समस्या के समाधान मांगे गए थे।

इनमें से जिन तीन टीमों ने गूंज फाउंडेशन द्वारा दिए गए प्रॉब्लम के सॉल्यूशन निकलकर विजेता होने का गौरव प्राप्त किया वे टीमें हैं वेलोसिटी, स्पेक् कॉडर्स व अच्छे दिन जिन्हें क्रमशः 50,000, 75,000 व 75000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इन टीमों ने क्रमशः उत्पादन क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए, पुनरुपयोग में लाई वस्तुओं का पर्यावरण पर क्या असर होता है और कैसे आपदा के समय आपदा पीड़ित को तत्काल जरूरी वस्तुओं की पहुंच बनाई जाए इन समस्याओं का हल ढूंढकर विजेता होने का गौरव प्राप्त किया।

एम.एस.एम.ई कंपनी द्वारा दिए गए प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन ढूंढ़ने में बिटवाइज टीम व साइबर ठग स्क्वाड टीम ने बाजी मारी जिन्हें 50000 व 75,000 की नकद राशि प्राप्त की। इन्हें यह पुरस्कार राशि क्रमशः आवासीय कॉलोनी में कैसे सस्ते कैमरे लगाए जा सकते ताकि आने जाने वाली गाड़ियों पर नजर रखी जा सके व एंब्रायडरी मशीन को कैसे बेहतर तरीके से ऑनलाइन मॉनिटर किया जाये जैसी समस्याओं का सबसे बेहतर सॉल्यूशन देकर अपने नाम किया।

वहीं 1 लाख के लिए मारुति सुजुकी द्वारा दिए गए समस्या का समाधान ढूंढने में टीम महा इंफ्रा टेक, मुस्कीटर्स व आई/ओ हैकर्स ने सफलता पाई। इन्हें क्रमशः सड़क दुर्घटनाओं की तत्कालीन सूचना कैसे मिले व कैसे बीमा के लिए क्लेम करना आसान हो, यातायात समस्या से निपटारे के लिए तथा पानी में पनपे बमरियों से संबधित समस्याओं के समाधान ढूंढकर यह पुरस्कार राशि अपने नाम किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम समापन का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि प्रो.नीरज त्रिपाठी (रजिस्ट्रार बीएच यू), प्रो.राजीव कुमार (एआईसीटीइ कमेटी सदस्य), डॉ.नितिन भीडे (एआईसीटीइ बीएचयू कॉर्डिनेटर) सह कविता साह (कन्वेनर, एसआईएच 2019, बीएचयू) द्वारा किया गया। 

समापन समारोह में मुख्य रूप से प्रो. वीसी कापरी, प्रो.विवेक सिंह, डॉ.वीरेंद्र मिश्रा, डॉ बिनायक दुबे, डी वी एल के डी पी वेणु, डॉ मनीष अरोड़ा, प्रो. वीएन मिश्रा, डॉ सुनीता वर्मा, संजय अग्रवाल, सुनील साह, वी के मिश्रा, सचिन कुमार तिवारी, उपेन्द्र सिंह, डॉ गीता गौतम, डॉ रीचा रघुवंशी, डॉ विनोद कनैज्जा, प्रो.निर्मल होडो, डॉ प्रदीप, प्रो.शशि पांडेय, डॉ राजीव श्रीवास्तव, डॉ राजीव मिश्रा, डॉ दीपक डोगरा, डॉ बीनायक दुबे उपस्थित थे। कार्यक्रम में मंच संचालक की भूमिका सुनीता वर्मा व मयूरी पांडेय न निभाई।

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