जानिए कौन है देश के पहले लोकपाल प्रमुख पीसी घोष


राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शनिवार को लोकपाल प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई। आधिकारिक बयान में कहा गया,'राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में शपथ दिलाई गई।'उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति घोष को 19 मार्च को देश के पहले लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। 

जानिए कौन है पीसी घोष 

पूर्व जस्टिस पीसी घोष का पूरा नाम पिनाकी चंद्र घोष है। उनका जन्म 1952 में हुआ था। इनके पिता शंभू चंद्र घोष भी जस्टिस थे। पीसी घोष 1997 में कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बने। दिसंबर 2012 में वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इसके बाद वो 8 मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। वह 27 मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे। बता दें कि जस्टिस पीसी घोष अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने शशिकला और अन्य को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया था। 

पूर्व जस्टिस पीसी घोष 29 जून 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति ने की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसे मंजूरी दी। चयन समिति में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और प्रख्यात कानूनविद् मुकुल रोहतगी भी शामिल हैं। 

लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। यह कानून (2013)यूपीए सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया था। 
ये नियुक्तियां सात मार्च को उच्चतम न्यायालय के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 10 दिन के भीतर लोकपाल चयन समिति की बैठक की संभावित तारीख के बारे में सूचित करने को कहने के एक पखवाड़े बाद हुईं। न्यायालय के इस आदेश के बाद 15 मार्च को चयन समिति की बैठक हुई थी। 
नियमों के अनुसार लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिये। इनमें से कम से कम 50 फीसदी सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिये।
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