कहानी - संपन्न होना ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं है



नीरज त्यागी


राखी एक बहुत ही समझदार लड़की है और अपने बचपन से बड़े होने तक उसने हमेशा अपने घर वालों की बातचीत मानते हुए अपना जीवन आगे बढ़ाया।बचपन से बड़े होने तक उसने अपने पिता को हमेशा ईमानदारी से अपने कार्य करते हुए देखा। 

हमेशा उसने पाया कि उसके पिता जो कि हाइडल में बिजली विभाग में कार्यरत हैं उन्होंने बड़ी ईमानदारी से अपना जीवन बिना रिश्वत लेते हुए जीया और राखी इस बात से काफी प्रेरित भी थी। उसने हमेशा सोचा था कि वह अपने जीवन में बिल्कुल अपने पिता के समान आदर्शों को जगह देगी। 

राखी धीरे धीरे शादी के लायक हुई और हर माता पिता की तरह राखी के माता पिता ने भी उसका विवाह करने के लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी।राखी पढ़ी लिखी समझदार लड़की थी। B.Ed तक राखी ने पढ़ाई की हुई थी। बहुत ढूंढने के बाद राखी के लायक एक लड़का उसके मां बाप को पसंद आ गया। 

हालांकि बचपन से लेकर बड़े होने तक राखी ने अपना सारा जीवन शहर में यापन किया था।किंतु परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी की राखी को जिस लड़के से शादी होना तय हुआ उसके माता पिता एक शहर से ना होकर एक छोटे कस्बे में रहते थे।आखिर वह दिन आ ही गया जब राखी और राहुल की शादी हो गई। 

राहुल बचपन से पढ़ाई में अच्छा रहा।अपनी मेहनत से पढ़ाई करके आज वह गुड़गांव में एक बीपीओ में कार्यरत है। नई बहू आने पर राहुल के माता पिता विचार किया कि अभी कुछ समय के लिए वह उनके साथ ही रहेगी खैर इस बात से राखी को कोई परहेज नहीं था और राखी अपने सास ससुर के साथ रहने लगी।राखी का पति राहुल शनिवार इतवार की छुट्टी होने पर हमेशा मिलने आता था। 
रिश्वत लेना ही भ्रष्टाचार नहीं है,अलग अलग तरीके से कई और कुछ भी होता रहा,हालांकि राहुल के माता पिता धन से काफी संपन्न थे किंतु धीरे धीरे राखी को सब समझ आने लगा। 
अक्सर कस्बों में लंबे लंबे समय के लिए बिजली चली जाती है या 1 फेस में आ रही होती है दूसरी फेस में आ रही नहीं आ रही होती राखी ने पाया लाइट जाने के बाद अक्सर लाइट की चोरी करते हुए उनके साथ ससुर को कोई भी शर्म महसूस नहीं होती थी। कई बार तो राखी को यह भी अंदाजा हुआ कि शायद मीटर में भी कुछ गड़बड़ी कर आई हुई है। गर्मियों में हर समय ऐसी का चलना और बहुत ही कम रकम का आना कुछ इसी तरफ इशारा कर रहा था राखी कुछ परेशान से क्योंकि उसका लालन-पालन एक बहुत ही ईमानदार माता पिता के यहां पर हुआ था। 

शुरू शुरू में राखी को यह सब चीजें बहुत ही विचलित करने वाली लगती थी। किंतु क्योंकि ससुराल में रहना था और उसका पति राहुल उससे प्यार भी बहुत करता था तो उसने धीरे-धीरे अपने आदर्शों से समझौता कर लिया और सोचने लगी कि क्या यह छोटी-छोटी चोरियां कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देती।खाली धन-संपत्ति से ही संपन्न होना किसी व्यक्ति का ईमानदार होने का सर्टिफिकेट नहीं है और बस यूं ही राखी अपना जीवन अपने ससुराल में व्यतीत करने लगी।
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