सोशल मीडिया का दौर है,इसकी ताक़त को समझिए - एन के सिंह

मौजूदा वक्त में टीवी पत्रकारिता तमाशबीन हो गया है।


जीत नारायण सिंह 
वाराणसी।।पत्रकारिता नैसर्गिक रूप में एक पेशा नहीं अपितु प्रतिबद्धता है। प्रतिबद्धता, समाज की सेवा करने की अगर इसे पेशे रुप में अपनाया जाए तो इसका अवमूल्यन निश्चित है और इसे सेवा के रुप में अपनाए तो समाज के उत्थान को कोई नहीं रोक सकता। ये बातें ‘जनसंचार में नवाचार विषय’ पर सात दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ में बतौर मुख्य वक्ता ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एन के सिंह ने कही. इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग सहित अन्य विभाग से उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एन के सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में अपने 40 वर्षों के अनुभव में मैंने यही जाना है कि वर्तमान समय के टीवी पत्रकारिता के सन्दर्भ में बात करते हुए कहा कि भारतीय मीडिया तमाशबीन हो गया है। 

संख्या के बारे में बात करें तो तकरीबन पौने तीन सौ समाचार चैनल है लेकिन ज्यादातर चैनलों पे समाचार नहीं सिर्फ तमाशा चल रहा है। वर्तमान पत्रकारिता को ऐसे रसातल में गिरता देख शर्म आती है। वर्तमान समय में पत्रकारिता के संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का दौर है, इसकी ताक़त को समझिए, अगर आपकी बात में दम है तो इसके माध्यम से वो लोगों तक पहुँच जायेगी। 

· सेवा के रुप में अपनाए तो समाज के उत्थान को कोई नहीं रोक सकता।
· मौजूदा वक्त में टीवी पत्रकारिता तमाशबीन हो गया है।
· ज्यादातर चैनलों पे समाचार नहीं सिर्फ तमाशा चल रहा है।
· वर्तमान पत्रकारिता को ऐसे रसातल में गिरता देख शर्म आती है।
· सोशल मीडिया का दौर है, इसकी ताक़त को समझिए।

उन्होंने बीएचयू के छात्र-छात्रओं से आह्वाहन करते हुए कहा कि आप सब मिलकर पत्रकारिता के भविष्य को बदलने की अलख जगाएं। अपने छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक बड़ी लकीर खींचने का प्रयास करें। इसके लिए प्रौद्योगिकी का सहारा लें क्योंकि प्रौद्योगिकी लोकतंत्रीकरण की दिशा में मदद करता है। उन्होंने कहा की मीडिया के माध्यम से कॉर्पोरेट तेजी से हमारे नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन कर रहा है।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अथिति प्रो. एम के सिंह ने कहा कि कला और मानविकी के विद्यार्थियों को भी विज्ञान के विद्यार्थियों की तरह नवीन प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाना चाहिए, क्योंकि हम इस दिशा में नहीं सोचेंगे तो समाज में हमारा योगदान न्यूनतम होता जाएगा. इस मौके पर डॉ. मनीष अरोड़ा ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य साहित्य, कला संस्कृति में नवाचार की संभावनाओं को तलाशना है, क्योंकि नवाचार सिर्फ तकनीक तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवा भी समाज के हित में कुछ नया करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अनुराग दवे ने सोशल मीडिया की विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उसकी खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और साथ ही यह भी कहा कि यहां आपकी बुद्धिमत्ता ही आपको सतर्क रख सकती है। सावधानी की शुरुआत घर से करें। एन. के. सिंह के व्याख्यान को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए आत्मचेतना बहुत जरुरी है।

जनसंचार एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने व पत्रकारिता के छात्र छात्राओं की सोच को उचित दिशा देने के उद्देश्य के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अभिकल्प नवप्रवर्तन केंद्र द्वारा आयोजित ‘इनोवेशन इन मॉस कम्युनिकेशन’ विषयक सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ दुग्ध एवं पशुपालन विभाग स्थित कामधेनु सभागार में हुआ| कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक एवं कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. बाला लखेंद्र व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नेहा पांडेय ने दिया। संयोजन डॉ. धीरेन्द्र राय व कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा चंद्राली मुख़र्जी ने किया। इस अवसर पर प्रो. रामानंद राय, डॉ. मयंक नारायण सिंह, आनंद कुमार समेत गणमान्य व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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