नरेंद्र मोदी को माँ गंगा का आशीर्वाद मिलेगा?

प्रियंका को कांग्रेस यहां से नहीं उतारना चाहती थी क्योंकि चुनावी नतीजे से वो वाक़िफ़ हैं।


अंकुर पटेल 
विशेष संवाददाता

वाराणसी संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी का जहां आज रोड शो 7 किलोमीटर का बी एच यू गेट से दशाश्वमेध घाट तक संपन्न हुआ।

वही आज सपा बसपा गठबंधन प्रत्याशी शालिनी यादव को टिकट मिलने के बाद आज वाराणसी में उनका प्रथम आगमन था जिसमें काफी हर्षोल्लास के साथ गठबंधन के कार्यकर्ताओ ने उनका भव्य स्वागत स्वागत किया।

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वहीं आज भाजपा के कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी के रोड शो को भव्य एवं एतिहासिक बनाने में कोई कसर छोड़ना नही चाहते थे,रोड शो शाम के 5:00 बजे से BHU मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दशाश्वमेध घाट तक संपन्न हुआ ,जहां वह आरती में भी सम्मिलित हुए।


प्रियंका गांधी का वाराणसी से चुनाव लड़ने के तमाम अटकलों के बीच कांग्रेस ने वाराणसी लोकसभा सीट से अजय राय का नाम अपने प्रत्यासी के रूप में घोषित कर दिया।

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, "प्रियंका को कांग्रेस यहां से नहीं उतारना चाहती थी क्योंकि चुनावी नतीजे से वो वाक़िफ़ हैं।"

वो कहते हैं, "2014 में वाराणसी प्रधानमंत्री की सीट नहीं थी लेकिन अब यह एक प्रधानमंत्री की सीट है और बीते पांच वर्षों में उन्होंने इसे बदल डाला है, लोगों में इसे लेकर नाख़ुशी नहीं दिखती और ऐसा लगता है कि मतदाता किसी अन्य उम्मीदवार को अपना वोट नहीं दे सकेंगे।"

क्या था 2014 चुनाव का  परिणाम 

पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 3 लाख 71 हजार 784 वोटों के अंतर से हराया था। मोदी को 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे। केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार 238 मतों से ही संतोष करने पड़ा था। तब कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय 75 हजार 614 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भी प्रत्याशी उतारा था।बसपा के प्रत्याशी विजय प्रकाश जायसवाल को 60 हजार 579 मत और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कैलाश चौरसिया को 45 हजार 291 मत मिले थे। 

सपना पूरा करने का दावा नहीं लेकिन पूरा करने की रफ़्तार सही है

गुरुवार को रोड शो और गंगा आरती के बाद मोदी ने वाराणसी में कहा कि वो काशी को अलौकिक रूप देने के महायज्ञ में जुटे हैं।

उन्होंने कहा, "पहले एयरपोर्ट से आने वाले रास्ते, शहर में बिजली की लटकती तारों, गंदगी के ढेर को देखकर बहुत पीड़ी होती थी।17 मई 2014 को गंगा तट पर कुछ संकल्प ले रहा था तो मन में एक सवाल था कि काशी की उम्मीदों पर खरा उतर पाउंगा क्या। लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि बदलाव को काशीवासियों समेत पूरा देश महसूस कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "सपना पूरा हो गया ये दावा नहीं करता हूं लेकिन उसे पूरा करने की रफ़्तार सही है।आध्यात्मिक, व्यावहारिक और मानवीय पहलू हैं। ये आपस में जुड़े हैं, जो यहां के सभी लोगों के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं।"

वाराणसी लोकसभा सीट का इतिहास

यह सच है की,नरेंद्र मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने के बाद से यह देश की सबसे अधिक चर्चित लोकसभा सीट बन गई है लेकिन यह भी तथ्य है कि, 1991 को छोड़कर, यहां पहले से ही बीजेपी उम्मीदवार जीतते आए हैं। 1952 से 1962 तक तीन लोकसभा चुनावों में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत हासिल की,जबकि 1967 के चुनाव में भाकपा ने पहली और आखरी बार अपना नाम यहां से दर्ज कराया। 1971 में एक बार फिर कांग्रेस को यहां से विजय हासिल हुई,लेकिन 1977 में जनता लहर के दौरान कांग्रेस हारी और चंद्रशेखर ने परचम लहराया।1980 में एक बार फिर कांग्रेस लौटी और 1984 में भी जीती। 1989 में जनता दल से अनिल कुमार शास्त्री जीते। इसके बाद चार चुनावों में भाजपा ने परचम लहराया। एक बार शिरीष चंद्र दीक्षित, तीन बार शंकर प्रसाद जायसवाल को जीत मिली। 2004 में कांग्रेस ने वापसी की और राजेश मिश्रा सांसद बने। 2009 में बीजेपी ने फिर सीट अपने कब्जे में की और डॉ. मुरली मनोहर जोशी सांसद बने।
वाराणसी के सांसद 
  • 1952 रघुनाथसिंह कांग्रेस
  • 1957 रघुनाथसिंह कांग्रेस
  • 1962 रघुनाथसिंह कांग्रेस
  • 1967 सत्यनारायण सिंह भाकपा
  • 1971 राजाराम शास्त्री कांग्रेस
  • 1977 चंद्रशेखर जनता पार्टी
  • 1980 कमलापति त्रिपाठी कांग्रेस (इंदिरा)
  • 1984 श्यामलाल यादव कांग्रेस
  • 1989 अनिल कुमार शास्त्री जनता दल
  • 1991 शिरीषचंद्र दीक्षित भाजपा
  • 1996 शंकर प्रसाद जायसवाल भाजपा
  • 1998 शंकर प्रसाद जायसवाल भाजपा
  • 1999 शंकर प्रसाद जायसवाल भाजपा
  • 2004 डॉ. राजेश कुमार मिश्रा कांग्रेस
  • 2009 डॉ. मुरली मनोहर जोशी भाजपा
  • 2014 नरेंद्र मोदी भाजपा
अब देखना यह है कि वाराणसी से संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी गठबंधन प्रत्याशी शालिनी यादव तथा कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय आपस में एक दूसरे को कितना टक्कर देते हैं और बनारस की जनता दो स्थानीय प्रत्याशी पर विश्वास जताती है या भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को अपना मतदान कर दोबारा प्रधानमंत्री के लिए चुनती है।


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