राजनीतिक पार्टियों को देना होगा दानकर्ताओं का ब्योरा - सुप्रीम कोर्ट

क्या होता है चुनावी बांड आसान भाषा में समझिए


उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनावी बांड्स की रसीदों और दानकर्ताओं की पहचान का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में चुनाव आयोग को सौंपे। शीर्ष अदालत ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनाव पैनल को 30 मई तक दान राशि एवं दानकर्ता बैंक खाते का ब्यौरा सौंपे।यह निर्देश प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने दिया।

यह आदेश एक स्वयं सेवी संगठन की याचिका पर दिया गया। इसमें इस योजना की वैधता को चुनौती देते हुये कहा गया था कि या तो चुनावी बांड्स को जारी करना स्थगित हो या चुनावी प्रक्रिया में शुचिता बनाए रखने के लिए दानकर्ताओं के नाम उजागर किए जाएं।

सरकार ने दो जनवरी, 2018 को चुनावी बांड योजना को अधिसूचित किया था।योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बांड्स को ऐसा कोई व्यक्ति खरीद सकता है जो भारत का नागरिक है या कंपनी जो भारत में स्थापित है।एक व्यक्ति, व्यक्तिगत तौर पर, एकल या अन्यों के साथ संयुक्त तौर पर चुनावी बांड्स खरीद सकता है। 

जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29क के तहत केवल ऐसे पंजीकृत राजनीतिक दल जिन्होंने गत चुनावों में कम से कम एक प्रतिशत तक मत हासिल किए हों, वे ही चुनावी बांड्स प्राप्त करने के अहर्ता धारण करेंगे।इन बांड्स को योग्य राजनीतिक दल एक प्राधिकृत बैक के बैंक खाते के माध्यम से नकदी में बदल सकेंगे।

क्या होता है चुनावी बांड आसान भाषा में समझिए 

  1. चुनावी बांड को ऐसा कोई व्यक्ति खरीद सकता है जो भारत का नागरिक है या कंपनी जो भारत में स्थापित है। एक व्यक्ति, व्यक्तिगत तौर पर, एकल या अन्यों के साथ संयुक्त तौर पर चुनावी बांड्स खरीद सकता है।
  1. इन चुनावी बॉन्ड के मूल्य कुछ इस प्रकार से तय होते हैं। ये 1,000 रुपए, 10,000 रुपए, एक लाख रुपए, 10 लाख रुपए और एक करोड़ रुपए के मूल्य में उपलब्ध हैं।
  1. इसमें प्रावधान ये है कि दान देने वाला शख्स केवल ऐसे पंजीकृत राजनीतिक दल जिन्होंने गत चुनावों में कम से कम 1% तक मत हासिल किए हों, वे ही चुनावी बांड्स प्राप्त करने के अहर्ता धारण करेंगे। जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29क के तहत ये प्रावधान हैं।
  1. बॉन्ड के लिए दानकर्ता को अपनी संपूर्ण जानकारी (केवाईसी) बैंक को देनी होगी।.इन बांड्स को योग्य राजनीतिक दल एक प्राधिकृत बैक के बैंक खाते के माध्यम से नकदी में बदल सकेंगे।
  1. अहम बात ये है कि चुनावी बॉन्ड खरीदने वालों के नाम गोपनीय रखा जायेगा। इसके अलावा इन बांड्स पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नही दिया जायेगा।
  1. इन बॉन्ड को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनिन्दा शाखाओं से ही खरीदा जा सकेगा। साथ ही इन बैंक के पास इस बात की जानकारी होगी कि कोई चुनावी बॉन्ड किसने खरीदा है।
  1. बॉन्ड खरीदने वाले को उसका जिक्र अपनी बैलेंस शीट में भी जरूर करना होगा। बांड्स को जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्तूबर महीने में खरीदा जा सकता है। बॉन्ड खरीदे जाने के 15 दिन तक मान्य होंगे।
  1. इतना ही नहीं राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग को भी बताना होगा कि उन्हें कितना धन चुनावी बॉन्ड से मिला है।


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