लोकसभा चुनाव 2019- भाजपा के रणनीति से मात खा रही कांग्रेस?


ब्दुल रशीद 
भले ही भाजपा पर यह आरोप लगता हो की यह पुरानी सोंच की पार्टी है जो देश में मनुवाद लागू करना चाहती है। हो सकता है यह सच हो लेकिन इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता के भाजपा तकनीक से लेकर हर तरह के आधुनिक साधन के उपयोग करने में अव्वल है,यानी भारतीय जनता पार्टी समय के साथ चलना और खुद को समय के अनुरूप ढालना बख़ूबी जानती है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी में युवा सोंच की बात जोर शोर से तो कहा जाता है लेकिन हकीकत में कुछ ख़ास दिखाई नहीं पड़ता भले तीन राज्यों के चुनाव के बाद मुख्मंत्री के चयन में हो या चुनाव जीतने की रणनीति हो।कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी यह है की,वह अपने संदेश अपने समर्थकों तक पहचानें में ज्यादा कामयाब नहीं दिखाई पड़ती। राजीव गांधी के समय पर जनकल्याण योजना के पैसे पहुंचने में जो तकनीकी कमी उस वक्त रही है,राहुल गांधी के समय तक उस कमी का अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप में बना रहना युवा सोंच को ही दरकिनार करता है।    
  
मौजूदा समय में जनता से जुड़े कई स्थानीय मुद्दें हैं,जैसे रोजगार,जो चुनाव के समय कांग्रेस बतौर विपक्ष उठाकर जनता को अपने पक्ष में कर सकती थी,लेकिन कमजोर रणनीति के कारण न केवल पूरे देश में बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी क्षेत्र में ही जीत के वटवृक्ष को न केवल डगमगा दिया,बल्कि समर्थकों को भी असमंजस की स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया है  

भाजपा ने राहुल गांधी को उनके चुनावी क्षेत्र में घेरने के लिये स्मृति ईरानी के रूप में अपना सबसे बड़ा दांव चला 2014 के लोकसभा चुनाव में 1 लाख वोट से हारने के बाद भी स्मृति ईरानी को मंत्री बनाया यही नहीं पूरे 5 साल स्मृति ईरानी अमेठी चुनाव क्षेत्र में सक्रिय रही।भाजपा के जमीनी स्तर पर किए गए कार्य का असर यह हुआ के 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ने जाना पड़ा हो सकता है राहुल गांधी अमेठी से चुनाव जीत ले लेकिन इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता के भाजपा के रणनीति के सामने कांग्रेस की रणनीति फिसड्डी सा दिखाई देने लगा है, जिसका भरपूर फायदा भाजपा चुनावी जनसभाओं में करके जनता को अपने पक्ष में करने की हरसंभव कोशिश करती दिख भी रही है दूसरी तरफ़ कांग्रेस की कमज़ोर रणनीति का परिणाम यह हुआ की दमदार प्रत्याशी होने के बावजूद भाजपा के बड़े नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ समय रहते कोई दमदार प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार पाई 
लोकसभा में जनता कांग्रेस के साथ खड़े होने के लिए तैयार है ऐसा मान भी लिया जाय तो भी कांग्रेस के कमज़ोर चुनावी प्रबंधन के कारण ठीक उसी तरह से साथ छोड़ देगी जिस तरह से लेटलतीफ चलने वाले लग्ज़री बस के बजाय सामान्य बस से समय पर पहुँचने के लिए  यात्री छोड़ देते हैं 
चुनाव में समय सीमा के अंदर सही क़दम उठाने वाले को जीत का सेहरा मिलता है,जो राजनितिक दल इस बात को समझ कर सही समय पर सही क़दम उठाने में कामयाब होगा,जीत उसकी है तय है 

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