मध्यप्रदेश में भाजपा की नज़र कांग्रेस के असंतुष्टों पर !


खिरी वक्त में दाव बदल कर खेल चुनावी खेल जितने में निपुण मानी जाने वाली भाजपा इस लोकसभा चुनाव में  एक बार फिर कांग्रेस के हौसले पस्त करने की रणनीति बना रही है। भाजपा इस चुनाव में भी पिछले चुनाव की तरह कांग्रेस के घोषित उम्मीदवारों से पाला बदलवा कर परिणाम से पहले ही मनोवैज्ञानिक जीत हासिल करने की जुगत में है।


भाजपा की नजर कांग्रेस के असंतुष्टों पर

भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी का जोर जाहिर तौर पर जिताऊ उम्मीदवारों पर है। इसके लिए बीजेपी ने अब तक जिन सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं, उनके लिए पार्टी के संभावित नामों के साथ कांग्रेस के असंतुष्टों और पाला बदलने के लिए बैठे लोगों पर नजर गड़ाए हुए हैं। 


पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐसा करतब कर दिखाया था। भिंड में हुए दल बदल ने हर किसी को चौंका दिया था। कांग्रेस ने डॉ. भागीरथ प्रसाद को उम्मीदवार घोषित किया था। फॉर्म बी भी पार्टी की ओर से भेज दिया गया था, मगर डॉ. भागीरथ प्रसाद नामांकन भरने के एक दिन पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। भागीरथ प्रसाद चुनाव जीत गए। भागीरथ ही नहीं, बीजेपी ने होशंगाबाद से कांग्रेस के सांसद उदय प्रताप सिंह से भी 2014 में चुनाव से पूर्व दल बदल करा लिया था।

राकेश सिंह के बीजेपी में शामिल होने से हुई थी कांग्रेस की किरकिरी 
उदय प्रताप सिंह वर्तमान में बीजेपी के सांसद हैं। इससे बड़ा झटका बीजेपी ने कांग्रेस को वर्ष 2013 में दिया था। विधानसभा में कांग्रेस की ओर से शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, और तत्कालीन उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने विधानसभा में ही अविश्वास प्रस्ताव पर सवाल उठाकर बीजेपी को कवच प्रदान किया था। कांग्रेस विधायक के रवैए के कारण ही अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई थी। बाद में राकेश सिंह बीजेपी में शामिल हो गए। इससे कांग्रेस की जमकर किरकिरी हुई थी। 

कांग्रेस के कई नेता बीजेपी के संपर्क में 

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया कहते हैं, ‘राजनीति में जब चुनाव जीतना ही सबसे बड़ा आधार बन जाए तो कुछ भी संभव है।बीते एक दशक पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ है कि कांग्रेस के कई दावेदारों ने बीजेपी का दामन थामा है। संजय पाठक, नारायण त्रिपाठी ने कांग्रेस छोड़ी और बाद में बीजेपी के विधायक बने। इससे पहले भागीरथ प्रसाद व उदय प्रताप सिंह बीजेपी से सांसद बने। अब कांग्रेस के कई नेता बीजेपी के संपर्क में है, वहीं बीजेपी के नेता भी कांग्रेस में जाने को तैयार हैं। दल बदल कराने में कांग्रेस से बीजेपी ज्यादा माहिर है।’ 

भाजपा सूत्रों का दावा है कि इस बार के लोकसभा चुनाव से पहले भिंड का घटनाक्रम दोहराया जा सकता है। भाजपा की उन ‘भागीरथों’ पर नजर है, जो कांग्रेस से नाखुश हैं और जिनका जनाधार अच्छा है। देखना अब यह है कि बीजेपी के लिए कांग्रेस से कौन-कौन ‘भागीरथ’ बनता है। राज्य में लोकसभा की 29 सीटें है, जिनमें से 26 पर बीजेपी का कब्जा है। तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं।छिंदवाड़ा से कमलनाथ, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और रतलाम से कांतिलाल भूरिया कांग्रेस के सांसद हैं।

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