सोनभद्र -NTPC के रवैया और रेलवे के फरमान से नाराज विस्थापितों ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान


क्तिनगर के चिल्काडाड में एनटीपीसी के विस्थापितों को को पुनर्वासित कर तीन दशक पूर्व में बसाया गया था।तबभी से यह बस्ती असुरक्षित व आवागमन की दिक्कतों, से लगातार जूझ रही है।इस पुनर्वास बस्ती की जनसंख्या इस समय लगभग 25 हजार की होना बताई जाती है। यह पुनर्वास बस्ती परियोजनाओं की अदूरदर्शिता व अनियोजितता की शिकार रही है।यह पुनर्वास बस्ती एक "टापू" बन कर रह गयी है और दशको से उपेक्षा का दंश झेलते हुए अपने दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। इस पुनर्वास बस्ती की भौगोलिक स्थिति इस तरह है कि इस बस्ती को वर्षो पहले ही आयुक्त मिर्जापुर ने असुरक्षित मान इसे सुरक्षित जगह स्थानांतरित करने की संस्तुति कर दी थी,लेकिन सोनभद्र के राज नेताओ व प्रशासनिक अधिकारियों तथा एनटीपीसी/एनसीएल प्रबन्धन के वेरुखी का शिकार हो यह बस्ती मौत के मुहाने पर बैठी हुई है।

यह बस्ती एनसीएल खडिया परियोजना के खदान क्षेत्र के असुरक्षित जोन में उसके ओ बी के पहाड़ के ठीक नीचे बसी हुई।इस पुनर्वास बस्ती से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही एनसीएल का हाल रोड है।जिसके चलते यहा निवास रत हजारो रहवासियों को 24सो घण्टे जानलेवा भयंकर प्रदूषण का शिकार होना पड़ता है।साथ ही खदानों में होने वाली हैवी ब्लास्टिंग से निकलने वाले खतरनाक बारूदी धूल हवा में घुल इनके शरीर मे प्रवेश करती रहती है।जो इनके लिए जानलेवा बीमारियों को जन्म देती है, परिणाम स्वरूप कई लोग असमय काल कवलित हो गए और न जाने कितने लोग तरह तरह की नई नई बीमारियों के शिकार हो विकलांग हो गए है और तड़प तड़प के जीने को विकास के नाम पर विवश कर दिए गए।

इनकी सुधि लेने वाला कोई नही है।

बस्ती एक तरफ रेलवे लाइन,की कई विछायी गयी लाइनों, दूसरी तरफ "ओ बी" के पहाड़ व हाल रोड,तीसरी तरफ एनसीएल की सीएचपी, चौथी तरफ एनसीएल के खदान रोड से घिरी गयी है।इस बस्ती में जहा 25 हजार से अधिक जनसंख्या निवास करती है, वह वर्षात के 3 महीने "ओ बी" के "लैंड स्लाइड" के भय से भयाक्रांत रहते है।वही आवागमन की दिक्कतों से इन्हें हमेशा दो- चार होना पड़ता है।

चुनाव बहिष्कार क्यो?

एक ताजा घटना क्रम ने एक नया मोड़ ले लिया है।इसका कारण है रेलवे के विस्तारीकरण के तहत नई लाइनों को विछाने व पुलिया बनाए जाने के कारण उत्तपन्न हुवा है।इस वजह से इस बस्ती में जाने के लिए रेलवे स्टेशन के बगल की पुलिया के निचे से निकले मार्ग को बंद करने की रेलवे की तैयारी से है।कल इसी मामले को लेकर चिल्काडाड के पंचायत भवन के सामने रामलीला मंच पर ग्रामीणों की एक बैठक हुई। जसमे बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए थे।जिसमें यह निर्णय लिया गया कि यदि चुनाव के पहले "ओवर ब्रिज" नही बनाया जाता है,तो आवागमन सुविधा की मांग को लेकर वृहद आंदोलन शुरू किया जाएगा।

इसी के क्रम में चिल्काडाड़ के बूथ क्रमांक 6 से 10 पर चुनाव बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से बैठक में निर्णय लिया गया। जिससे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।इस बैठक में एनटीपीसी के उपेक्षात्मक रवैये से नाराज विस्थापितों ने आवागमन सुविधा की समय रहते व्यवस्था नही करने पर रेल से हो रहे कोल परिवहन को भी ठप्प कर देने का निर्णय लिया गया है।चुनाव बहिष्कार और आंदोलन करने की तैयारी भी शुरू हो गयी है ।इसके लिए बैठकों का दौर जारी है।इस बैठक एनटीपीसी का रेलवे से होने वाले कोल परिवहन को भी ठप्प करने का निर्णय लिये जाने की खबर ने हलचल मचा दिया है।बैठक में यह भी तय हुआ है कि गांव के हर टोलों में संयोजक बनाने व कोर कमेटी गठन किया जाएगा। जिस पर काम चल रहा है।

बैठक को जिन प्रमुख नेताओ ने सम्बोधित किया उनमें  बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पन्नालाल, सपनेता व ग्राम प्रधान चिल्काडाड रविन्द्र सिंह यादव, भाजपा मंडल महामंत्री कमलेश गुप्ता, सेक्टर अध्यक्ष राम अनुग्रह गुप्ता, पूर्व प्रधान भाजपा मंडल उपाध्यक्ष नन्दलाल भारती, क्षेत्र पंचायत सदस्य रंजीत कुशवाहा, पूर्व उप प्रधान नर्वदा कुशवाहा, समाज सेवी राम सुभग शुक्ला आदि रहे।कल शाम को दिया पहरी पर भी आन्दोल को लेकर तैयारी बैठक हुई ,जिसका क्रम आगे भी जारी रहने वाला है।




के सी शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार) 

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