मुस्लिम महिलाओं के मसीहा मोदी जी,गोधरा दंगा की पीडिता को मिले न्याय का स्वागत करेंगें?

सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार को गुजरात सरकार को बिलकिस याकूब रसूल को 50 लाख रुपये मुआवजा राशि देने और उसका पुनर्वास करने के आदेश दिए।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से कहा था की मुस्लिम बहनो के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे और आज केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक #TripleTalaq अध्यादेश को मंजूरी दे कर उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। उन्होंने #TripleTalaq को सामाजिक कुरूति बताया था

दंगा भी सभ्य समाज के लिए दाग़ है जैसे कुरीतियां। 2002गोधरा दंगे की पीडिता बिलकिस बानों को सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिला है,यह दंगा 2002 में हुआ था और उसवक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे। ऐसे में यह बात आम जनता के ज़ेहन में है के क्या मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय न होने देने का दावा करने वाले  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  दंगे की पीडिता को मिले सर्वोच्च न्यायालय न्याय का स्वागत करेंगें? क्योंकि ऐसा होता है तो न केवल पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगेगा बल्कि 2002 के दंगों को लेकर कई तरह के सवालों के धुंध भी साफ़ हो जाएगा 
सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार को गुजरात सरकार को बिलकिस याकूब रसूल को 50 लाख रुपये मुआवजा राशि देने और उसका पुनर्वास करने के आदेश दिए बिलकिस बानो के साथ 21 वर्ष की अवस्था में गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। उसके तीन वर्षीय बेटी को भी मार डाला गया था

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने पीड़िता की स्थिति के बारे में जानकर चिंता जताई, जिसमें बताया गया कि वह एक खानाबदोश जिंदगी जी रही है और चैरिटी के सहारे अपना जीवन-यापन कर रही है

अदालत ने गुजरात सरकार को उसे एक राज्य सरकार की नौकरी और उसकी पसंद के स्थान पर घर मुहैया कराने के आदेश दिए

सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार के वकील के उस पक्ष को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुआवजा राशि को अत्यधिक बताया गया और इसके बदले उसे केवल 10 लाख रुपये देने की अपील की गईइससे पहले, राज्य सरकार की ओर से उसे केवल पांच लाख रुपये मुआवजा दिया गया था

गुजरात सरकार के वकील ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में सबूतों से छेड़छाड़ करने वाले दोषी अधिकारियों को पेंशन संबंधी सारी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया और एक आईपीएस अधिकारी को दो रैंक तक पदावनत कर दिया गया है.

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