जहां “राम नाम”चुनकर जनता बनाती है सांसद


अब्दुल रशीद 
लखनऊ से 367.1 किलोमीटर और दिल्ली से 867.1 किलोमीटर दूरी पर बसा रॉबर्ट्सगंज, उत्तर प्रदेश का एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है,जिसका जिला मुख्यालय सोनभद्र है।रॉबर्ट्सगंज लोकसभा,अपने गर्भ में प्रकृतिक धनसंपदा को संजोए रखने के बावजूद आज जनप्रतिनिधियों और परियोजनाओं के उदासीनता के कारण प्रदूषण के प्रकोप से अभिशापित और विकास के किरण को मोहताज हैं। इस शहर का नामकरण ब्रिटिश-राज में अंग्रेजी सेना के फिल्ड मार्शल फ्रेडरिक रॉबर्ट के नाम पर हुआ था। 

जिले के शहरी क्षेत्रों को छोड़ दें तो ग्रामीण इलाकों में इंसानी जीवन के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। इसे संयोंग ही कहेंगें के मुलभूत सुविधाओं को तरसते जिले के विस्थापितों के वोट से चुने गए प्रत्याशियों के नाम में ‘राम’ जुड़े हुए हैं। जी हां उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज संसदीय सीट पर अभी तक 15 सांसद चुने जा चुके हैं,चुने गए ज्यादातर सांसदों के नाम में ‘राम’ लगा हुआ है,आंकड़ो के अनुसार से 10 सांसदों के नाम में ‘राम’ और तीन सांसदों के नाम में ‘लाल’ जुड़ा हुआ है। राजनीती में “राम” का नाम लेकर सत्ता के शिखर पर नेता तो पहुँच गए लेकिन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र राबर्ट्सगंज की जनता की आंख विकास की राह देखते देखते पथरा गई है। 

2009 में सपा के टिकट पर जीते  पकौड़ी लाल कोल 2019 भाजपा गठबंधन के उमीदवार होंगें 

राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर 1962 में कांग्रेस के टिकट पर राम स्वरूप पहली बार सांसद बने थे। स्वरुप ने 1967 और 1971 के आम चुनावों में भी कांग्रेस के ही टिकट पर जीत हासिल की। 1977 में राबर्ट्सगंज में जनता पार्टी के उम्मीदवार शिव संपत्ति राम ने लोकसभा चुनाव जीत हासिल की। 1980 और 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के राम प्यारे पानिका को जीत मिली थी। 

भाजपा के हिस्से में पहली बार यह सीट 1989 के लोकसभा चुनाव में यह सीट आई। भाजपा के टिकट पर सूबेदार प्रसाद ने जीत दर्ज की थी, लेकिन, भाजपा के पास यह सीट ज्यादा समय तक नहीं रह सकी। 1991 के लोकसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर जनता पार्टी के खाते में चली गयी। वर्ष 1991 में जनता पार्टी के प्रत्याशी राम निहोर राय को चुनाव में सफलता मिली। वर्ष 1996, 1998 और 1999 के चुनाव में यह सीट भाजपा के पास रही। भाजपा के टिकट पर प्रत्याशी राम शकल तीन बार सांसद रहे। 

वर्ष 2004 में बसपा यह सीट अपने हिस्से करने में कामयाब रही, बसपा के टिकट पर लाल चंद्र कोल को जीत मिली थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी के अपना परचम लहराया,समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर पकौड़ी लाल ने पहली बार चुनाव जीता। 2014 के मोदी लहर में इस सीट का समीकरण बदला और भाजपा के प्रत्याशी छोटेलाल को जीत मिली। 

2009 में सपा के टिकट पर जीते पूर्व सांसद पकौड़ी लाल कोल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और अपना दल (एस) ने गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार होंगे।

विस्थापित कर सकते हैं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार 

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला उर्जांचल के नाम से भी जाना जाता है।प्रकृति की गोद में बसा यह जिला सिर्फ उत्तर प्रदेश को ही रौशन नहीं करता बल्कि कई अन्य राज्य को भी रौशन करता है।देश प्रदेश को रौशन करने वाले आदिवासी बाहुल्य जिले में विकास की हकीकत यहां के मूल निवासियों की आंखो में साफ़ झलकता है।
न पीने को साफ़ पानी न सांस लेने को स्वच्छ  हवा और तो और विकास के नाम पर ठगे गए इन लोगों को विस्थापित कर ऐसे जगह पर बसा दिया जहां मुलभुत सुविधाओं के नाम पर टोटका को ही सामाजिक दायित्व निभाना परियोजनाओं द्वारा परिभाषित कर दिया गया। परियोजनाओं की विस्थापितों के प्रति सकारात्मक सोंच का इससे बेहतरीन उदाहरण क्या होगा के कई रत्नों से सम्मानित परियोजनाओं के विकासशील सोंच ने डेंजर जोन में ही शक्तिनगर का चिल्काटांड विस्थापित बस्ती बसा दिया। जहां जिंदगी कब काल के गाल में समा जाए पता नहीं। 
अब इन अभागों पर रेलवे विभाग ने भी अपना मानवीय पक्ष दिखाने में तनिक भी संकोच नहीं करते हुए इनका आवागमन बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार सोनभद्र जिले के जिलाधिकारी ने इनकी पीड़ा सुनी है। अपने समस्याओं से तंग विस्थापितों ने न केवल अपनी पीड़ा जिलाधिकारी को सुनाया बल्कि समाधान न होने पर लोकतंत्र के महापर्व में भाग न लेने की बात कही है।

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget