बीएचयू के डाक्टरों की टीम के 3 घंटे का अथक प्रयास ने मौत के मुंह से निकाल कर बचाई जान


वाराणसी।। 20 वर्षीय पिकअप चालक जो कि भोपाल का निवासी है चुनाव प्रचार के सिलसिले में यूपी आया हुआ था जब उसने अपनी तेज रफ्तार पिकअप ट्रक एक दूसरे ट्रक में भिड़ा दी। प्रोफेसर सिद्धार्थ लखोटिया विभागाध्यक्ष कार्डियो थोरेसिक सर्जरी विभाग, बीएचयू जिन्होंने ऑपरेशन करने वाली टीम का नेतृत्व किया बताया कि दुर्घटना इतनी भयावह थी की ट्रक का लगभग 2 फीट लंबा और ढाई इंच मोटा लोहे का सरिया चालक के दाएं छाती को चीरता हुआ छाती के पीछे से गर्दन के नीचे वाले हिस्से से बाहर निकल गया। इसकी वजह से उसके दाएं फेफड़े में गंभीर चोट आई थी तथा दाएं छाती में हवा भर गई थी एवं रक्त स्त्राव हुआ था। साथ ही साथ उसके मस्तिष्क में भी गहरी चोट आई थी। दाएं चेहरे दाई आंख एवं दाएं पांव में भी चोटें लगी थी दुर्घटना के बाद मछली शहर की पुलिस ने बड़ी तत्परता से उसे चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करवाई। 

जब यह मरीज हमारे पास ट्रामा सेंटर में आया तब यह बेहोश था एवं इसकी स्थिति को देखते हुए इसका बच पाना मुश्किल लग रहा था ऐसी गंभीर स्थिति में ऑपरेशन कर राड को निकालना एवं ईश्वर से प्रार्थना ही एकमात्र साधन नजर आ रहा था। 

मरीज भोपाल निवासी था अतः उस के साथ कोई भी साथी नहीं था ऐसी अवस्था में चिकित्सकों, अस्पताल एवं पुलिस की टीम ने अपना दायित्व निभाते हुए उसे यथासंभव इलाज की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई । प्रोफेसर एस के माथुर विभागाध्यक्ष एनेस्थीसिया विभाग एवं चिकित्सा अधीक्षक सर सुंदरलाल चिकित्सालय ने बताया कि ऐसी अवस्था में मरीज को बेहोशी देना एक चुनौती एवं जटिल कार्य होता है दुर्घटना की तीव्रता की वजह से लोहे का सरिया मरीज की छाती को भेदने के बाद मुड़ गया था जिस कारण इसे बिना काटे मरीज की छाती से बाहर निकालना संभव भी ना था। 

चिकित्सालय के यांत्रिकी विभाग के कर्मचारियों ने बड़ी कुशलता पूर्वक लोहे के रॉड के मुड़े हुए हिस्से को काटा तत्पश्चात डॉ सिद्धार्थ लखोटिया एवं उनकी टीम नेे ऑपरेशन कर इसे बाहर निकाला। यह ऑपरेशन लगभग 3 घंटे चला। मरीज अब चिकित्सालय के सीटीवीएस आईसीयू में स्वास्थ्य लाभ कर रहा है एवं कुछ दिनों में उसे छुट्टी दे दी जाएगी। इस तरह की चोट के बाद ज्यादातर लोगों की मृत्यु दुर्घटना स्थल पर ही हो जाती है। गति सीमा एवं ट्रैफिक नियमों का पालन ही बचाव का कारगर उपाय है। छाती में इस तरह की चोट की सर्जरी की सुविधा सिर्फ पूर्वांचल बी0एच0यू0 अस्पताल में ही उपलब्ध है।



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