वादा याद दिलाना असंवेदनशीलता है,तो इंसान के मौत की तुलना कुत्ते से करना क्या है?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा की सिख विरोधी दंगों के संबंध में की गई कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुये कहा कि यह इस पार्टी के ‘‘चरित्र और मानसिकता’’ को दिखाता है।

मोदी ने रोहतक के जनसभा में कहा, ‘‘कांग्रेस, जिसने अधिकतम समय तक शासन किया वह असंवेदनशील है और यह कल बोले गए तीन शब्दों से प्रकट होता है। ये शब्द यूं ही नहीं कहे गए हैं, ये शब्द कांग्रेस की मानसिकता और मंशा हैं।’’ 

उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर गुरूवार को पित्रोदा की टिप्पणी का उल्लेख करते हुये कहा, ‘‘और ये शब्द कौन से हैं .. ये हैं..हुआ तो हुआ।’’ मोदी ने दोहराते हुये कहा, ‘‘हुआ तो हुआ’’ 

उन्होंने मौजूद जनसमूह से कहा कि उन्हें अचरज हो रहा होगा कि प्रधानमंत्री क्या कह रहे हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘हम तीन शब्दों से उन लोगों की आक्रामकता को बहुत आसानी से समझ सकते हैं जो कांग्रेस चला रहे हैं- हुआ तो हुआ।’’ 

मोदी ने कहा, ‘‘कल कांग्रेस के एक बड़े नेता ने ऊंची आवाज में 1984 को लेकर कहा कि ‘84 का दंगा हुआ तो हुआ’। क्या आप जानते हैं वो कौन है, वह गांधी परिवार के बहुत निकट है। यह नेता राजीव गांधी का निकट मित्र था और कांग्रेस ‘नामदार’ अध्यक्ष का गुरू है।’’

सैम पित्रोदा ने कहा, ‘‘1984 में मुश्किल समय में अपने सिख भाइयों-बहनों के दर्द का मुझे अहसास था और उन अत्याचारों के बारे में आज भी महसूस करता हूं। परंतु ये चीजें अतीत की हैं और इस चुनाव में प्रासंगिक नहीं हैं। यह चुनाव इस पर लड़ा जा रहा है कि मोदी सरकार ने पांच वर्षों में क्या किया है।’’
सैम पित्रोदा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "मोदी सरकार ने क्या किया और क्या दिया, हमारे पास इस पर चर्चा करने के लिए तमाम मुद्दे हैं।मुझे खेद है।मेरे कमेंट को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैं माफी मांगता हूं।" इससे पहले कांग्रेस ने अपनी ओर से लेटर जारी करके मामले पर सफाई दी थी।

जब मौजूदा समय में चुनाव किस मुद्दे पर हो रहा है के तरफ ध्यानाकृष्ट कराना असंवेदनशीलता हैं तो इंसान के मौत की तुलना कुत्ते से करना क्या है?

 माचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में 2002 में हुए दंगों पर पछतावा होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अगर कोई कुत्ते का बच्चा भी आपकी कार के नीचे आकर मारा जाता है तो आपको दुख होता है।"
दरअसल, अपने विफलताओं पर पर्दा और इतिहास को कुरेदना,मुख्य मुद्दा से भटकाकर वोट बटोरने की राजनीती है। यह उसी तरह है जब कोई छात्र कंप्युटर की परीक्षा देने जाय और शिक्षक से ही सवाल करे के क्या आपके समय में कंप्युटर था,नहीं था तो आप कौन होते हैं सवाल पूछने वाले आप अनपढ़ हैं,जब शिक्षक पूछता है के हमारे समय की बात छोड़ो आप साल भर क्या पढ़े हो उस आधार पर परीक्षा दो,तब छात्र कहता है आप आपने जमाने में कंप्युटर न पढ़ने का पाप किया है।और पापियों के सामने बैठकर प्रश्नपत्र का जवाब क्यों लिखूं। 


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