पंखुड़ियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकट्ठा करते - रवीन्द्रनाथ टेगोर

दो देशों के राष्ट्रगान रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर से जुडी कुछ रोचक तथ्य


नोबल पुरस्कार से सम्मानित रवीन्द्रनाथ टैगोर की यादों का गुलदस्ता

राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"
7,मई, टैगोर जयंती कलकत्ता ब्रिटिश भारत मे 7 मई 1861 को देवेन्द्रनाथ टेगोर व माता शारदा देवी के घर जन्में रवीन्द्रनाथ टैगोर देश के सुप्रसिद्ध लेखक,कवि,नाटककार,संगीतकार एवम चित्रकार थे। वे बांग्ला व अंग्रेजी भाषा के जानकार थे। उनके साहित्यिक आंदोलन को आधुनिकतावाद की संज्ञा दी गई। साहित्य के क्षेत्र में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका विवाह मृणालिनी देवी से हुआ था। उनके पांच संतान हुई।जिनमे से दो का बचपन मे ही निधन हो गया था। वे बचपन से ही साहित्य के क्षेत्र में रुचि रखते थे। छन्द लिखना, कविताओं को लिखना। उनकी भाषा गज़ब की थी। शब्दों का खजाना था उनके पास। पहली कविता लिखते समय उनकी उम्र आठ वर्ष की थी। छोटे से बच्चे में ऐसी प्रतिभा के दर्शन हुए। 1877 में उनकी पहली लघुकथा का प्रकाशन हुआ था। जब वे सोलह साल के थे। 

भारतीय संस्कृति में नव चेतना फूंकने वाले टैगोर युगदृष्टा थे। उन्होंने साहित्य का विपुल सृजन किया। उनके सृजन में प्रमुख हैं गीतांजलि, पूरबी प्रवाहिनी, शिशु भोलेनाथ,परिशेष, पुनश्च, शेषलेखा चोखेरबाली, महुआ, वनवाणी, कणिका,क्षणिका,नैवेद्य मायेर खेला आदि हैं। दर्शन,साहित्य,संस्कृति न केवल भारत की वरन विदेशों तक कि टैगोर ने अंगीकार की। 

इनके पिताजी ब्रह्म समाज को मानते थे। ये भी ब्रह्म समाजी बन गए। इन्होंने सनातन धर्म मे रुचि लेते हुए आगे बढ़ाया। नर व नारायण के मध्य सम्बन्ध को भी इन्होंने प्रतिपादित किया। साहित्य की प्रत्येक विधा में आपने उत्कृष्ट सृजन कर कालजयी कृतियाँ लिखी। इनके प्रबंध,शिल्पकला, कविता,गान,नाटक,कथा,उपन्यास निबंध, सभी लिखे।इनकी कई पुस्तको का अंग्रेजी में अनुवाद भी हुआ। उनके गद्य के बजाय पद्य रचनाएँ ज्यादा पसंद की गई। 

उन्होंने यात्रा व्रतांत उपन्यास निबंध के साथ साथ हज़ारों गाने भी लिखे। उनकी बाल कहानियां बांग्ला में बहुत पसंद की गई। उनके व्याख्यान कई खण्डों में प्रकाशित हुए। अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ उनकी बातचीत के परिशिष्ट काफी लोकप्रिय हुए। टेगोर के कार्यों का विशाल संकलन द एस्टियल टेगोर प्रमुख हैं।प्रकृति प्रेमी टेगोर ने शांतिनिकेतन की स्थापना की। पेड़ो बाग बगीचों पुस्तकालय का ये प्रमुख केन्द्र है । वे संगीत के शौकीन थे। उन्होंने अलग अलग रागों में गीत गाये। उन्होंने 2230 के लगभग गीत लिखे। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के शौकीन टेगोर ठुमरी पसंद करते थे। वे एक बड़े चित्रकार भी थे। मनुष्य व ईश्वर के सम्बंध को चित्र द्वारा अभिव्यक्त किया।संशय निराशा के भाव उनके चित्रों की विशेषता थी। 

उनकी काव्य रचना गीतांजलि के लिए 1913 में साहित्य का नोबल पुरस्कार दिया। नाइटहुड की उपाधि को इन्होंने लौटा दिया था। 

आज इनकी रचनाएँ लाखों पाठकों के दिलों में है जो युवाओं को उन्नति के पथ पर बढ़ा रही है। विश्व विख्यात कवि साहित्यकार दार्शनिक के बताए मार्ग पर आज देश को चलने की जरूरत है। 
टैगोर कहते थे मित्रता की गहराई परिचय की लंबाई पर निर्भर नहीं करती। किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये,क्योंकि वह किसी और समय मे पैदा हुआ है। 
दो देशों के राष्ट्रगान रचयिता थे रवींद्रनाथ टैगोर

भारत के राष्ट्रगान जन गण मन के रचयिता टैगोर ने इस राष्ट्रगान को 27 दिसम्बर,1911 में लिखा था।1911 में इसे धुन में बांधा जिसे लोगों ने काफी पसन्द किया।इसे गायन करने में निर्धारित समय 52 सेकेंड लगते हैं।24 जनवरी 1950 को इसे संविधान सभा ने भारत के राष्ट्र गान के रूप में घोषित किया।

अमार शोनार बांग्ला (मेरा सोने का बंगाल या मेरा सोने जैसा बंगाल), बांग्लादेश का राष्ट्रगान है, जिसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। यह बांग्ला भाषा में है। गुरुदेव ने इसे बंग भंग के समय सन 1906 में लिखा था जब मजहब के आधार पर अंग्रेजों ने बंगाल को दो भागों में बांट दिया था। यह गीत बंगाल के एकीकरण के लिये माहौल बनाने के लिये लिखा गया था।

स्वतन्त्र होने के बाद बांग्लादेश ने सन 1972 में इस गीत की प्रथम दस पंक्तियों को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया।
लेखक - राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" शिक्षक एवम साहित्यकार 98,पुरोहित कुटी श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान।
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