साहेब,यह राजनीति के गिरते स्तर और झूठ का चरम ही तो है!

राजनीती


भारत की संस्कृति का यह कतई हिस्सा नहीं के किसी स्वर्गीय को अपमानित कर सत्ता पाया जाय। न ही गंगा-जमुनी तहज़ीब, गंगा-गटर तहज़ीब है,जैसा विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाले एक महानुभाव बताते हैं। बहरहाल,इसे राजनीति के गिरते स्तर का चरम ही कहा जा सकता।

सत्ता पाने और खोने के की राजनीतिक लड़ाई में नरेंद्र मोदी जी ये भी भूल गए कि राजनीति लोकलाज से चलने वाली चीज़ है। जिस अटल बिहारी वाजपेयी की नरेंद्र मोदी को पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका रही, उन्हीं अटल बिहारी वाजपेयी की जानलेवा बीमारी का इलाज राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए कराया था, जिसकी भनक तक उन्होंने किसी दूसरे को लगने नहीं दी थी।

इस बात का खुलासा राजीव गांधी की मौत के बाद खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था कि वे राजीव गांधी की बदौलत ही जीवित हैं।
बहरहाल, राजनीति में 'सच का अभाव' कहने से कोई बुरा नहीं मानेगा, लेकिन 'झूठों की भरमार है' कहने से तो नेता और उनके समर्थकों की भावनाएँ आहत होने लगती है।
बीते दिनों अपने चुनावी भाषण में प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आपके पिताजी को आपके राग दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था. गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन मिस्टर क्लीन चला था। लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया।"
ढाई दशकों तक अपनी पहचान छिपाकर रखने वाले स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि बोफोर्स घोटाले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ़ घूस लेने के कोई सबूत नहीं है।Source:BBCHindi
राहुल गांधी ने अपने पिता पर लगाए गए आरोप पर ट्वीट कर प्रतिक्रिया देते हुए कहा "मोदी जी, युद्ध समाप्त हो चुका है. आपके कर्म आपका इंतज़ार कर रहे हैं। खुद को लेकर अपनी सोच को मेरे पिता पर डालने से आप बच नहीं पाएंगे। प्यार और जोरदार झप्पी। राहुल"
Photo:Source(telegraph)
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