एनजीटी के आदेश को ताक़ पर रखकर एनसीएल दो कोयला ट्रांसपोर्टर को पहुंचा रहा फायदा!



  • रोड़ पर कोयला परिवहन बंद होने के बावजूद खुले आम एनसीएल करवा रहा रोड़ परिवहन।
  • जयंत खदान से मोरवा का खुलेआम करवाया जा रहा है कोयला परिवहन।
  • गोरवी से मोरवा का भी करवाया जा रहा है कोयला परिवहन।

सिंगरौली से विनोद सिंह।।सुंदरम सिंह

उर्जांचल टाइगर।।मोरवा।। एनजीटी के आदेश के बाद से एनसीएल ने अपने सभी खदान से कोयले का रोड़ परिवहन बंद करवा दिया था लेकिन यह आधा सच है,पूरा सच यह है की एनसीएल ने एनजीटी के आदेश मानने का दिखावा करते हुए जयंत परियोजना से मोरवा का रोड़ परिवहन चालू रखा, साथ ही गोरवी से मोरवा का भी रोड़ परिवहन चालू रखा।
एनजीटी के आदेश में यह साफ लिखा हुआ है कि सिंगरौली मे कोयला का रोड में परिवहन नहीं चलाया जाएगा।
एनजीटी के आदेश को धता बताकर NCL एनसीएल द्वारा जयंत मोरवा एवं गोरवी मोरवा से कोयला का रोड़ परिवहन चालू रखने से जिले के दूसरे कोयला ट्रांसपोर्टर विरोध जताते हुए मोरवा मे कांटा मोड़ पर जयंत से कोयला लेकर आ रही सभी कोयला वाहनों को रास्ते पर ही रोक कर धरना शुरू किया गया। 
धरना कर रहे लोगों का कहना है जयंत से मोरवा मार्ग एनएच 135 तथा गोरबी से मोरवा मार्ग एनएच 39 रोड से जाना जाता है, तथा दोनों ही एनएच होने के कारण कोल ट्रांसपोर्टेशन नहीं किया जा सकता।

कोल ट्रांसपोर्टरों द्वारा दिए जा रहे धरने को देखते हुए किसी भी लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। मोरवा एसडीओपी डॉक्टर कृपाशंकर द्विवेदी व नगर निरीक्षक अनूप सिंह ठाकुर ने स्वयं पहुंचकर ट्रांसपोर्टरों को समझाया। हालांकि इस मामले में धरना दे रहे मोटर मालिक व ट्रांसपोर्टरों ने उन्हें आश्वस्त किया की छोटी गाड़ियों और अन्य वाहनों को नहीं रोका जाएगा एवं उनका यह धरना प्रदर्शन किसी निर्णय के बाद ही समाप्त होगा। उन्होंने इस मुद्दे पर पांच सूत्रीय ज्ञापन भी पुलिस अधिकारियों को सौंपा है।

मांग पूरा न होने पर होगा उग्र अनादोलन  


एनसीएल की इस दोहरी नीति से सिंगरौली एवं सोनभद्र के 4000 ट्रकों के पहिए रुक गए हैं। जिस कारण यहां के लोगों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगा है। धरना दे रहे लोगों का कहना है की,यदि एनसीएल प्रबंधन द्वारा जल्द ही कोई सकारत्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन उग्र करते हुए वे सभी अपने वाहनों को एनसीएल मुख्यालय में खड़ा करने पर मजबूर हो जाएंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही एनसीएल प्रबंधन की होगी।

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