मस्जिद-ए-आएशा में ईद उल फितर की नमाज सुबह 8:30 पर अदा की जाएगी।


बैढन(सिंगरौली)।।ईद-उल-फितर हिजरी कैलेंडर के 10वें माह के पहले दिन मनाई जाती है। हिजरी कैलेंडर में नया माह चांद देखकर ही शुरू होता है।रमजान माह के खत्म होने के बाद ईद की नमाज़ अदा की जाती है।रमजान में रखे गए रोजों के एवज में रोजेदार कोअल्लाह ने ईद का तोहफा दिया है।


इस बार ईद 5 या 6 जून को मनाई जाएगी,हालांकि चांद की तस्दीक के बाद ही पता चलेगा कि ईद किस दिन मनाई जाएगी।मोहम्मद मकसूद कादरी ने बताया कि,मस्जिद-ए-आएशा बैढ़न वार्ड 39 मुस्तफा नगर में ईद उल फितर की नमाज सुबह 8:30 पर अदा की जाएगी। रमजान-उल-मुबारक बीतने के बाद ईद पर पढ़ी जाने वाली नमाज के लिए मस्जिद-ए-आएशा में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। नमाजियों को तपिश भरी गर्मी में परेशानी न हो इसका ख़ास ख़याल रखा गया है।


रमजान-उल मुबारक माह के बाद ईद-उल-फितर के इस मुबारक दिन नमाज के पहले हर मुसलमान के लिए फितरा अदा करना वाजिब है।इसका मकसद यह है कि गरीब भी ईद की खुशी मना सकें।ईद की नमाज के बाद इमाम खुत्बा देते हैं और दुआ फरमाते हैं।इसके बाद सभी एक-दूसरे के गले लगकर ईद की मुबारकबाद पेश करते हैं । ईद की सब से ज्यादा खुशी बच्चों में होती है।
ईदगाह जाते वक्त यह तकबीर पढ़ें, तकबीर यह है - अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, लाइलाहा इल्ललाह, अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, वलिल्लाहिलहम्द' (अल्लाह बड़ा है,अल्लाह बड़ा है,अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं,अल्लाह बड़ा है,अल्लाह बड़ा है,सारी तारीफें अल्लाह के लिए हैं)
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