बिहार : 'नेताओं' की किस्मत, अबोध 'जनता' की मौत 'चमकी'


आकाश @ सबकी बात,सबके साथ 

नेताओं को आतंकवादी समझिये। ख़ुद AC में रहते हैं दिन रात, वे क्या जानें सूरज की तपन को। क्या समझें लू से मरने वालों को। उनके लिए तो सड़क के कुत्ते और आम आदमी की मौत बराबर ही है।

सुशासन का ढोल पीटने वाले इतने वर्षों में भी अस्पताल दो चार न खुलवा सके। ICU में AC न चलवा सके, बेड की संख्या न बढ़ा सके ( एक एक बेड पर 3,4 बच्चे भर्ती हैं। 
'TRP बटोरन कश्यप' से लाख गुना बेहतर हैं 'काफिल खान' जैसे डॉक्टर, जिन्होंने चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के लिए मुजफ्फरपुर में फ्री चेकअप कैम्प लगा लिया है। सलाम है ऐसे नेकनीयत इंसान को-आकाश 
रैलियों में दहाड़ना एक बात है, और जब पके आम की तरह बच्चे एक एक करके मौत के आग़ोश में जा रहे हैं, तब जनता के सवालों से मुँह फेर लिया है, चुप्पी साध ली है।

नीतीश बाबू ने कार का शीशा चढ़ा लिया, और नेता विपक्ष लंदन में ऐश कर रहे हैं।

'आयुष्मान योजना' का कोई क्या करे। जब जियेंगे तब तो आयुष्मान होंगे। 
बिहार में 'नेताओं' की किस्मत 'चमकी'
अबोध 'जनता' की मौत 'चमकी' !!
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