चमकी बुखार : क्या वाकई मुजफ्फरपुर में हो रहे बच्चों की मौत की वजह लीची है?



चमकी बुखार :2016 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक अस्पताल में 125 से अधिक मौतें हुई थी।

बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में कहर बनकर टूट रहा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार की वजह से अब तक करीब 130 बच्चों की मौत हो चुकी है। यह मामला जब से सामने आया, तब से ही यह ख़बर फैलाई गई कि लीची खाने की वजह से बच्चों की मौत हो रही है। ऐसे अपुष्ट ख़बरों की वजह से लोगों में लीची को लेकर शक पैदा हुआ और इसे खाने से कतराने लगें। लेकिन के वाकई ऐसा है,नहीं यह सच नहीं।दरअसल दिमागी बुखार की वजह से हो रही बच्चों की मौत की असली वजह लीची नहीं बल्कि कुपोषण है।

 कुपोषण 

कुपोषण का शिकार होने की वजह से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अब तक अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम AES जिससे बच्चों की मौत हुई या फिर जिन बच्चों का इलाज चल रहा है, अगर उनकी प्रोफाइल पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि वे सभी बेहद गरीब परिवार से आते हैं। यह भी इस इलाके की बड़ी समस्या है जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा है।

क्यों लीची को कारण बताया गया 

लीची का सीजन में गरीब परिवार के कुपोषित बच्चे दिनभर भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लीची के बाग में जाते हैं और आधी कच्ची,आधी पकी,सड़ी-गली जैसी भी लीची मिलती है बड़ी तादाद में खा लेते हैं और शाम को घर वापस आकर बिना खाना खाए ही सो जाते हैं। ऐसे ही बच्चों में अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम AES के गंभीर लक्षण देखने को मिल रहे हैं।

हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से भी दौरे पड़ने लगते हैं।

'द लैन्सेट' नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च की मानें तो लीची में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले टॉक्सिन पदार्थ होते हैं जिन्हें hypoglycin A और methylenecyclopropylglycine (MPCG) कहा जाता है। ये शरीर में फैटी ऐसिड मेटाबॉलिज़म बनने में रुकावट पैदा करते हैं। इसकी वजह से ही ब्लड-शुगर लो लेवल में चला जाता है जिसे हाइपोग्लाइसीमिया भी कहते हैं और मस्तिष्क संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं और दौरे पड़ने लगते हैं।यही वजह है कि अगर कोई स्वस्थ बच्चा लीची खाता है तो उसे अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम AES का खतरा नहीं होगा लेकिन कुपोषित बच्चे में इसका खतरा बढ़ जाएगा। लिहाजा लीची इस बीमारी की वजह नहीं बल्कि सिर्फ एक फैक्टर है जो इस बीमारी को ट्रिगर कर रहा है।

चमकी बुखार के लक्षण 

एईएस के लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, भ्रम की स्थिति, गर्दन में अकड़न और उल्टी शामिल है। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों और नाबालिगों को निशाना बनाती है और इससे मौत भी हो सकती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल (एनएचपी) के अनुसार, एईएस बीमारी ज्यादातर विषाणुओं से होती है लेकिन यह जीवाणुओं, फफुंदी, रसायनों, परजीवियों, विषैले तत्वों और गैर-संक्रामक एजेंटों से भी हो सकती है।

एनएचपी के अनुसार, जापानी बुखार का विषाणु भारत में एईएस का मुख्य कारण है।

पोर्टल ने कहा कि भारत में एईएस के फैलने के कुछ अन्य कारण हरपीज, इंफ्लुएंजा ए,वेस्ट नील और डेंगू जैसे विषाणु हैं। हालांकि, एईएस के कई मामलों के कारणों का पता अब तक नहीं चल पाया है।

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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान पत्रिका में प्रकाशित 2017 के अध्ययन में कहा गया कि 2008 से 2014 के बीच इस रोग के 44 हजार से अधिक मामले सामने आए और इससे करीब छह हजार मौतें हुईं।पत्रिका में कहा गया कि 2016 में, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक अस्पताल में 125 से अधिक मौतें हुई थी।

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