सीधी : वेयर हाऊस देशी शराब ठेकेदार उड़ा रहे नियम-कानून की धज्जियां


सीधी से ज्ञानेंद्र गोस्वामी

वेयर हाऊस देशी शराब ठेकेदार द्वारा मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी गाईड लाईन की खुले आम धज्जियॉ उड़ाई जा रही हैं। जिलें में चर्चाओं का बाजार गर्म है जिसमें खास बात तो यह है कि वर्तमान लाईसेंस प्रिंस सिंह के नाम पर है और संचालन नागेन्द्र सिंह कर रहे हैं। आप को बतातें चलें कि पूर्व डी०ओ० आबकारी एस एन चर्तुवेदी ने मारपीट व शासकीय कार्य में वाधा पहुॅचाने के चलते धारा ३५३ के तहत तथाकथित वर्तमान ठेकेदार नागेन्द्र सिंह के विरूद्व प्रकरण पंजीवद्व करा चुके हैं। आवकारी आयुक्त के जारी आदेश के अनुसार मध्य प्रदेश आपकारी नीति के तहत ठेकेदार को आयोग्य घोषित कर दिया गया। इन सबके बाबजूद उचित विधिक कार्यवाही के अभाव में देशी शराब वेयर हाऊस का लाइसेंस प्रिंस के नाम पर है और संचालित कर रहे एनपी सिंह। 

नियम विरूद्व दसकों से पदस्त हैं शबनम 

उपनिरीक्षक आबकारी शबनम विगत कई दसकों से शासकीय नियमों को धता बता कर जिला मुख्यालय में पदस्थ हैं। इनके विरूद्व कई बार प्रमाणों के साथ आपकारी आयुक्त कार्यालय ग्वालियर एवं प्रमुख सचिव बल्लभ भवन भोपाल में सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की जा चुकी है किन्तु ऊचीं पकड़ होने के कारण आज दिनांक तक किसी भी प्रकार से दण्डित या उचित विधिक कार्यवाही नहीं हो सकी है। समाज में हो रही चर्चायें यहीं पर नहीं थमती हैं, लोगों की मानें तो उपनिरीक्षक आबकारी शबनम के विरूद्व मध्य प्रदेश विधान सभा सत्र में सवाल भी उठ चुका है। लोकप्रिय जन प्रतिनिध मनगॅवा विधायक शीला त्यागी ने उचित तत्थयों एवं सबूतों के आधार पर कई गंभीर विषयों पर प्रकाश डाला गया था।

वेपटरी हुई वेयर हाऊस व्यवस्था

देशी मदिरा वेयर हाऊस की सुचारू व्यवस्था विगत कई माह से वेपटरी हो चुकी है। एक ओर तो प्रत्यक्ष प्रणाली लागू होने के कारण कुल मॉग और खपत प्रतिदिन का आन लाईन रिकार्ड दर्ज होता है। जिसे आपकारी आयुक्त कार्यालय ग्वालियर एवं प्रमुख सचिव बल्लभ भवन भोपाल से सक्षम अधिकारियों के द्वारा देख रेख एवं व्यवस्था पर लगाम कसी जा सकती है। जानकारों की मानें तो जिला मुख्यालय स्थित वेयर हाऊस में महीने भर की कुल खपत के हिसाब से लगभग पॉच दिन का स्टाक होना अनिवार्य है किन्तु जिले में संचालित वेयर हाऊस के प्रबंधक की लचर व्यवस्था के कारण एक दिन का भी कुल खपत देशी मदिरा उपलब्ध कराने में अपने आप को असहाय सा महसूस कर रहे हैं। जिले के लगभग ठेकेदारों की हालत इतनी दयनीय सी हो गयी है कि प्लेन मदिरा हेतु किसी ठेकेदार द्वारा चालान बारह सौ पेटी का बनवाया जाता है तो उसे थोडा बहुत देकर किसी भी ढंग से काम चलाने को मजबूर किया जा रहा है।

शासन को ड्यूटी शुल्क चुकाये बगैर बिक रही शराब 

जिले में अफवाहों का बाजार गर्म है, क्या हकीकत है और क्या फसाना ये कह पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। ऐसे ही तथाकथित एक शराब विक्रेता की मानें तो जिले में लाखों रूपये के वारे न्यारे हो रहे हैं और कई गुना अधिक मिल रहे मुनाफे को आपस में बदंर बॉट करके मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाता है। दबी जुबान में हो रही आम चर्चा के अनुसार शासन को ड्यूटी शुल्क चुकाये बगैर ही वर्तमान समय में मदिरा मुख्यालय में आ रही है। जिसका सबसे बडा प्रत्यक्ष प्रमाण तो यह है कि डिपो से सीधी वेयर हाऊस माल सप्लाई करने वाला वाहन एक निश्चित समयावधि में एक से ज्यादा चक्कर लगाना साथ ही डिपो से एक बार मिली अनुमति का प्रयोग करके कई चक्कर मारना अपने आप में संदेह को जन्म दे रहे हैं। किये जा रहे दावों पर विश्वास किया जाये तो ऐसे कई सीसीटीव्ही कैमरे हैं जहॉ ये पूरा काला कारनाम कैद है जरूरत है तो बस शासन द्वारा एक टीम गठित कर उचित जॉच की, और डिपो प्रबंधक सहित कई अधिकारी सीधे सलाखों के पीछे पहुॅच जायेगें। इन्ही चर्चाओं के आधार पर लोग आपस में चर्चा करते सुने जाते हैं कि कहीं देशी शराब वेयर हाऊस बना तस्करी का अड्डा तो नही बन कर रह गया है।

ओवर रेट में बिक रही शराब 

सरकारी आबकारी नीति के चलते पूर्व शराब माफिया और नए दुकानदारों सहित सेल्समैन और ग्राहकों के बीच आये दिन संघर्ष का माहौल बना रहता है। माफिया द्वारा मनमर्जी से ओवर रेट बिक रही शराब को लेकर जिले में तनाव की स्थिती निर्मित हो रही है, फिर भी पुलिस आंखे मूंदे हुए है। बीयर के ओवर रेट को लेकर सैल्समैन व ग्राहकों के बीच प्रतिदिन तू तू मैं मैं होती रहती है, कई बार स्थित तो मारपीट तक बन जाती है। सूत्रों की मानें तो जिले में शराब व बीयर की दुकानों पर जमकर ओवर रेंटिग की जा रही है। जिसकी लगातार शिकायतों के बाद भी अबकारी व पुलिस विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा। जिसको लेकर आए दिन सेल्समैन व ग्राहकों के बीच गालीगलौच व मारपीट होना आम बात हो गई है। अगर प्रशासन ने ओवररेट पर अंकुश नहीं लगाया तो किसी दिन ओवररेट को लेकर बडा बवाल सामने आ सकता है। 

शासन की नीति को धता बता कर मनमर्जी खुलती है वेयर हाऊस 

मध्य प्रदेश शासन भले ही देशी शराब की वेयर हाऊस को खोलने व बंद करने का समय निर्धारित कर रखा हो, लेकिन सीधी वेयर हाऊस सुबह दस बजे से पॉच बजे की बजाय मनमर्जी ढंग से संचालित होता है। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर इसका संचालन रात के अंधेरे में होता है, जिसके चलते मनमर्जी ढंग से माल का स्टाक व निकसी किया जा रहा है। सबसे खास बात तो यह है कि जिला मुख्यालय में भले ही ठेकेदारों द्वारा पूर्व में ही शासन खाते में पैसे जमा किये जाये किन्तु उसके बदले में देशी शराब प्रदाय करने की बात पर चुरहट व मझौली के ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाती है।

भोपाल व ग्वालियर पहुॅची शिकायत

जिले में लम्बे समय से अव्यवस्था का दंश झेल रहे शराब ठेकेदारों ने जिला मुख्यालय के वरिष्ट अधिकारियों से उक्त प्रकरण की लिखित शिकायत कि फिर भी उचित व त्वरित न्याय न मिलने की स्थिती में रजनीश श्रीवास्तव आपकारी आयुक्त कार्यालय ग्वालियर एवं प्रमुख सचिव बल्लभ भवन भोपाल की ओर शिकायत पत्र भेज दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर बात यहीं पर नहीं रूकी बल्कि तथाकथित नागेन्द्र सिंह प्रबंधक देशी मदिरा वेयर हाऊस सीधी के ऊपर अन्य कई गंभीर आरोप लगाये गये हैं। देखना अब यह होगा कि वरिष्ट अधिकारियों के द्वारा क्या उचित विधिक कदम उठाये जाते हैं। या फिर विगत शिकायतों की भॉति इस शिकायत को भी ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाता है। 

मेरे व मेरे बेटे दोनों के नाम से लाइसेंस है, रही रात्रिकालीन वेयर हाऊस संचालन की बात तो प्रभारी मैडम शबनम जी के पास कार्य भार की अधिकता है जिसके चलते समय मेंटेन नहीं हो पाता है। चुरहट व मझौली में माल की डिंमाड अधिक रहती है जिस कारण खपत भी अधिक रहती है। मेरे ऊपर लगाये गये आरोपों की बात करें तो पूर्व डी०ओ० एस०एन० चर्तुवेदी द्वारा आवेश में आकर धारा ३५३ की कार्यवाही करायी गयी थी।
नागेन्द्र सिंह 
प्रबंधक देशी मदिरा वेयर हाऊस सीधी
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