केन्द्रीय कारागार में बन्दी कैदी अब स्वलंबी हो रहे हैं।- ए.डी.जी जेल चन्द्र प्रकाश


अजीत नारायण सिंह 
ए.डी.जी जेल चन्द्र प्रकाश ने बताया कि बंदियों मे सुधार के लिए जरूरी हैं कि उन्हें सकारात्मक कार्यों मे व्यस्त रखा जाए इसके लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा रोजगार कार्यों में शामिल करना होगा ताकि सुधार कुशलता के साथ साथ उनकी आमदनी भी होती रहे जिससे वे अपने परिजनों की आर्थिक मदद कर सके।

18 अक्टूबर 1938 को डॉ सम्पूर्णानन्द जी ने राजकीय कारागार उद्योग की आधारशिला रखी थी जिसके तहत जेल के अंदर रहते हुए बन्दियों द्वारा निर्मित किए गए सामानों की बिक्री किया जासके प्रदेश के पहले आउटलेट का उद्घाटन आज वाराणसी में ए.डी.जी कारागार के द्वारा किया गया।

वाराणसी की केन्द्रीय कारागार मे कैदियों के द्वारा बनायीं जा रही सामग्री का इस्तेमाल अब आम जनता के लिए खोल दिया गया है। वहीं वाराणसी के शिवपुर केन्द्रीय कारागार मे कैदियों के द्वारा निर्मित सामग्री अब जेल के बाहर खुले में आउटलेट के जरिये बिक्री के लिए रखी जाएगी। इस आउटलेट का उद्घाटन एडीजी ने पूजन अर्चन के बाद किया। इस आउटलेट में कैदियों के द्वारा बनायीं गई सामग्री फर्नीचर, बेडशीट, चादर, बिस्किट जैसी सामग्रियों की बिक्री की जाएगी।

एक सवाल के जबाब मे बताया कि प्रशिक्षित बन्दियों द्वारा तैयार सामग्री बहुत ही अच्छी क्वालिटी के हैं।

जैन ने यह भी बताया कि केन्द्रीय कारागार के भीतर कमर्शियल लॉन्ड्री मशीन द्वारा नर्सिंग होम, होटल आदि के चादरें, पर्दे एवं अन्य कपड़ेधुले जायेगा जिससे कम से कम 50-60 बन्दियों को रोजगार मिलेगा। इस मौके पर सिडबी के सह-प्रबंधक जेलर के.पी.सिंह समेत जेल के समस्त अधिकारी मौजूद रहे।



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