कोल ट्रांसपोर्टरों के आंदोलन के पीछे कहीं कोल माफियाओं का तो हाथ नही ?


के.सी.शर्मा 

सिंगरौली के मूल निवासी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी दुबे के विगत 6 वर्ष पूर्व शुरू किए गए संघर्ष ने अब अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पूरे सिंगरौली परिक्षेत्र के औद्योगिक अंचल में बीते एक सप्ताह से भूचाल सा आगया है।कही गम तो कही खुशी का माहौल है।पिछले पांच दशक में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा कि सिंगरौली परिक्षेत्र के उर्जान्चल को चारागाह समझने वालों और आम उर्जान्चलवासियों की रहे अलग अलग हो गयी है।

उर्जान्चल में पूंजीवादी लोग आंदोलन की राह पर चल पड़े है तो उर्जान्चल के आम जन भी अधिबक्ता अश्वनी दूबे के पक्ष में तथा बढ़ते प्रदूषण के विरोध लामबन्द होना शुरू कर दिए है।बीते रविवार कल सिंगरौली परिक्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संगठनों व आम नागरिक अलग अलग बैठक करते दिखे,जो आज के स्थानीय समाचार पत्रों की खूब सुर्खियां बटोरे हुए है।

इस मामले में आग में घी डालने का काम तब हुवा जब पूंजीवादी शक्तियों एवं कोल माफियाओं के गुर्गों ने अधिवक्ता अश्वनी दूबे को खुलेआम जान से मारने की धमकी देने और आपत्ति जनक नारा लगाया जाने लगा और जिला प्रशासन को भी खुली चुनौती  यह कह के दिया जाने लगा कि सिंगरौली को भी धनवाद  जैसा बना देंगे?
इस विषय पर इस समय हर चट्टी चौराहे पर आम से खास की जुबान पर एक ही यही चर्चा व्याप्त है और सबकी नजरें आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।

आज सुप्रीम कोर्ट में एक तरफ होंगे सिंगरौली के लाल समाजसेवी ,पर्यावरणविद, अधिबक्ता अश्वनी दूबे, तो दूसरी तरफ होंगे देश के नामी गिरामी दो दर्जन से अधिक कार्पोरेट घरानों,व सार्वजनिक प्रतिष्ठानों, भारत सरकार के अधिबक्ता, जहा देश के टॉप थ्री प्रदूषित शहरों में सुमार सिंगरौली के पर्यावरणीय भविष्य का आज फैसला होने वाला है।

इसीलिए सिंगरौली परिक्षेत्र में 50 लाख से अधिक के संख्या में निवास रत देश के कोने कोने से आये नागरिकों ने सिंगरौली परिक्षेत्र को मिनी भारत बना दिया है। उनकी नजरे आज कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।

उनके लिए और सिंगरौली परिक्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक दिन होगा।जिसका सिंगरौली के इस विकास यात्रा के इतिहास में महत्वपूर्ण उल्लेख होगा।
अधिवक्ता अश्वनी दूबे

आपको बता दे कि सिंगरौली निवासी अधिवक्ता अश्वनी दूबे के कारण जहाँ सिंगरौली के जनता को अमूल्य लाभ हुआ है, वहीँ उन लुटेरे नेताओं, कोल माफियाओं, पुलिस, प्रसाशन,प्रवंधन,जिला पंचायत के वैरियर ठीकेदारों, परिवहन विभाग, आदि को भारी नुकसान हुआ है जो डंपरों से हर ट्रिप के पैसे लेते थे, उन मोटर मालिकों का नुकसान हुआ है जो इसमें अपना करियर तलाश रहे थे और आमदनी होती थी, उन लुटेरी कंपनियों का नुकसान हुआ है जो मुनाफा के लिए वातावरण में जहर घोल रही थी। उन बैरियर वालों का टोल वालों का नुकसान हुआ है जो पैसे वसूल रहे थे।

उन मोटर कंपनियों का नुकसान हुआ है जहाँ से कोल परिवहन के लिए गाड़ियां खरीदी जाती थीं, उन पेट्रोल पम्प वालों का नुकसान हुआ है जहाँ से डीजल लिया जाता था, उन वर्कशॉप वालों का नुकसान हुआ है जहाँ गाड़ियां मरम्मत होती थीं। 

उन चालकों का नुकसान हुआ है जो इन गाड़ियों को चलाते थे। उन लेबरों का नुकसान हुआ है जो इसमें काम करते थे। उन कोयला चोरों का भी नुकसान हुआ है जो कोयला चोरी करते थे। उन दलालों का भी नुकसान हुआ है जो प्रशासन में बैठ के कमीशन खाते थे आदि आदि?

जाहिर सी बात है हर वर्ग के लोगों को नुकसान हुआ है तो विरोध में नारे तो लगेंगे ही, जान से मारने की धमकी तो मिलनी ही थी।आज ये सभी उक्त कथित उर्जान्चल को दीमक की तरह चाटने वाले एक साथ आकर अपने हितों को पूर्व की भांति साधने के लिए संगठित हो गए है।और बेरोजगारी बढ़ने का संवेदनशील हवाला देते हुए अपने निजी हितों वाले मुठ्ठी भर के पूंजीपतियों के आंदोलन को जन आंदोलन बनाने में लगे हुए है।

जनप्रतिनिधि,कुछेक कलमकारों की जमीर खरीद सुनियोजित तरीके से ट्रक ऑपरेटरों के निजी आंदोलन को कथित जनांदोलन बनाने का कुछ लोग असफल प्रयास कर रहे है।लेकिन ये सिंगरौली परिक्षेत्र की पब्लिक है, जो सब जानती है।

जनहित और सिंगरौली के माटी के प्रति प्यार के जज्बे ने इतने सारे एक साथ दुश्मन सिंगरौली के लाल अधिवक्ता अश्वनी दूबे ने खड़े कर लीये हैं।इस हिम्मत और हौसलेपूर्ण जज्बे को क्या सलाम नही करना चाहिए? 

मेरा तो इस निडर,साहसी, अपने कर्तव्य पथ पर अडिग, सिंगरौली के सासों में घुल रहे जहर से जान बचाने के लिए अपने जान को जोखिम में डाल लाखो लोगो को जीवनदान दिलाने के लिए अपने जान की बाजी लगा कृतसंकल्पित जज्बे को दिल से है सलाम!

इसी का परिणाम है कि अधिवक्ता अश्वनी के संघर्षों ने जब अपना असर दिखाना शुरू किया तो सिंगरौली की प्रकृति आज खुल कर लंबी सांस ले रही है जिसे प्रदुषण ने अपनी बेड़ियों में जकड रखा था।आज उस माँ को न्याय मिल गया जिसने अपने लाल को इन दानव रूपी डंपरों के चपेट में खोया था। आज उस बाप को न्याय मिल गया जिसने अपना वारिस खोया था।उन बच्चों को न्याय मिल गया जिसने अपने पिता को खोया था। 

आज जब सारे पूंजीपति, कोल माफिया,कारपोरेट घराने ,सरकार, सार्वजनिक प्रतिष्ठान का प्रबंधन, आदि सबके सब अधिवक्ता अश्वनी के खिलाफ खड़े हैं।इस लिए यह समय की मांग है कि सब स्वार्थ त्याग कर के जनता को निःस्वार्थ, प्रकृति के लाल अश्वनी जी के समर्थन में खड़ा होना चाहिए। आखिर उन्होंने ये सब सिंगरौली के लिए ही किया है नहीं तो उनके पास खरबों के चपत लगाने से बचने के लिए कई अवसर मिले होंगे। 

सड़क मार्ग से कोल परिवहन को लेकर अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर है टिकीं-!

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनजीटी की ओवर साइट कमेंटी द्वारा एनसीएल की खदानों से सड़क मार्ग द्वारा कोल परिवहन पर पूर्णता रोक लगा दी गई थी, जिसके बाद से ही हजारों की तादाद में ट्रक मालिक, ड्राइवर मैकेनिक व इस व्यवसाय से जुड़े लोगों पर बेरोजगारी के बादल मंडराने लगे है। वहीं एनसीएल प्रबंधन द्वारा 2 खदानों से सड़क मार्ग द्वारा कोल परिवहन जारी रखने के विरोध में सिंगरौली मोटर एसोसिएशन लामबंद होकर बीते 6 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे है।

गौरतलब है की एनसीएल की खदानों से प्रतिदिन करीब पौने दो लाख टर्न कोयले का उत्पादन किया जाता है। जिसमें से करीब 80 हजार टन कोयले का डिस्पैच सड़क मार्ग द्वारा होता है, जो बीते 6 दिनों से प्रभावित है।

अतः इस कारण कोल ट्रांसपोर्टरों से लेकर एनसीएल व उससे जुड़े बिजली घरों पर चिंता के बादल मंडरा रहे हैं और सबकी निगाहें अब आज सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकीं हैं।

इस मामले में प्रशासन भी सतर्कता बरते हुए हैं क्योंकि एनजीटी की ओवर साइट कमेटी द्वारा सिंगरौली व सोनभद्र जिलाधिकारी को यह सीधे निर्देश दिए गए हैं की सड़क मार्ग द्वारा कोल परिवहन करते किसी भी वाहन को जानकारी होते ही सीज़ करें।

साथ ही कमेटी द्वारा एनसीएल को यह निर्देशित किया गया है कि अपने सभी खदानों के एग्जिट पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी करें।

विधायक रामलल्लू वैश्य
कोल ट्रांसपोर्टर के समर्थन में आए सिंगरौली विधायक रामलल्लू वैश्य

कोल ट्रांसपोर्टर के समर्थन में आए सिंगरौली विधायक रामलल्लू वैश्य ने ट्रांसपोर्टरों की तरफ से एनसीएल निदेशकों से बीती शाम बात कर यह भरोसा जताया की उच्चतम न्यायालय द्वारा कल प्रबंधन के पक्ष में फैसला आएगा और आगामी 2 जुलाई से कोल ट्रांसपोर्टेशन पुनः शुरू हो जाएगा। 

हालांकि प्रबंधन और विधायक भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर हैं और कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।विधायक के इस पहल की काफी निंदा और विरोध भी शुरू हो गया है।


अधिवक्ता के पक्ष और विरोध में लग रहे नारे-!

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में परिवाद दाखिल करने वाले सिंगरौली निवासी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी दुबे के विरोध में जहां सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक नारे लग रहे हैं। लोग अधिवक्ता अश्वनी दुबे के विरोध में सड़क पर नारे लगा रहे हैं तो वही सोशल मीडिया में भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है।

वहीं प्रदूषण और दुर्घटना से निजात पाकर सिंगरौली की तमाम जनता व तमाम सामाजिक संगठन, विस्थापित संगठन, उनके पक्ष में आ खड़ी हुई है। कल दिन भर उर्जान्चल में उनके समर्थन में बैठकों का देर रात तक अलग अलग जगहों पर जारी रहा।

इन बैठकों में अधिवक्ता अश्वनी दूबे को जान से मारने की धमकी और आपत्तिजन नारो को लेकर लोगो मे गहरी नाराजगी दिखी, जीसका सामाजिक संगठनों ने कड़े शव्दों में निंदा करते हुए आक्रोश का भी इजहार किया है।

जहां सोशल मीडिया में उनके पक्ष में कसीदे कसे जा रहे हैं, वही रविवार शाम क्षेत्र के विभिन्न संगठनों द्वारा अनपरा के औड़ी मोड़ व शक्तिनगर, वैढ़न, आदि जगहों पर बैठक कर एनजीटी के आदेशों की सराहना की और निर्णय को सही ठहराते हुए अश्वनी दुबे के पक्ष में खड़े दिखे।

राहत नहीं मिली तो होगा भारी संकट-!

एनसीएल व अन्य बिजली घरों को अगर आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत नहीं मिलती है तो आने वाले समय में देश के कई हिस्सों में भारी बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है। क्योंकि सिंगरौली व देश के कई अन्य राज्यों में एनसीएल द्वारा कोल आपूर्ति की जाती है। जहां बिजली घरों के पास अब सीमित दिनों का स्टॉक बचा है। जिससे बिजली घरों के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। कई कंपनियों ने विद्युत उत्पादन में कमी कर दी गई है तो कई इसका विकल्प ढूंढने में लगे हैं।
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