मिशन चंद्रयान में बड़हिया ने भी किया कदमताल,गांव एवं जिला के नाम का परचम फहराया।


  • गांव और शहर में समाजसेवियों एवं बुद्धिजीवियों में खुशी का लहर।
  • बड़हिया के सोनू इसरो में है वैज्ञानिक, चन्द्रयान की टीम में किया है काम
  • रहने को नहीं था मकान, फूस से बनी झोपड़ी में रह गुजारा है छात्र जीवन
  • बालिका विद्यापीठ लखीसराय के है पूर्ववर्ती छात्र

पटना(मुकेश कुमार) भारत का बहुप्रतिक्षित चंद्रयान-2 मिशन पर देश ही नहीं दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई है। सोमवार की दोपहर 2:43 में इसरो ने चन्द्रयान का सफल प्रक्षेपण किया है। अमरीका, रुस और चीन के बाद भारत अब चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन गया है।मिशन मून के सफल प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष में एक और सफलता की ओर बढ़ रहे भारत के साथ लखीसराय जिले के बड़हिया भी कदमताल कर रहा है। जिले को गौरव का यह खूबसूरत पल दिया है ।
बड़हिया इन्द टोला निवासी ललन सिंह के पुत्र हैं।सोनू बड़हिया इन्दटोला निवासी ललन सिंह के पुत्र हैं। जो गरीबी छात्र जीवन गुजरा खर संघर्ष कर आईआईटी कर वैज्ञानिक  बना।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान इसरो में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत हैं।

सोनू इस समय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) में वैज्ञानिक हैं और देश के इस मिशन मून में वैज्ञानिकों की टीम में योगदान दिया है।सोनू गरीब परिवार में जन्म लेकर झोपड़ी में छात्र जीवन गुजरा सोनू एक बहुत ही गरीब परिवार में ललन सिंह के पुत्र के रूप में जन्म लिया था काफी आर्थिक तंगी को झेला, छात्र जीवन फूस से बनी झोपड़ी में गुजारा लेकिन अपनी कड़ी मेहनत से सफलता के परचम को लहराया।

प्राथमिक शिक्षा बड़हिया एवं 12वी विद्यापीठ से लिया।

सोनू ने अपनी प्राथमिक शिक्षा बड़हिया से की तथा 12वीं बालिका विद्यापीठ लखीसराय से लिया पठने लिखने में काफी मेधावी था।मेधावी रहने से आई आई टी मेंस एवं डब्लूबी मेंस प्रतियोगिता निकाली।सोनू मेधावी एवं कड़ी मेहनत के बल पर आईआईटी मेंस और डब्लूबी मेंस को निकालकर जाधवपुर यूनिवर्सिटी बंगाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और आज इसरो में बतौर वैज्ञानिक सेवा दे रहे है।

सोनू के मित्र बताया।

सोनू के बचपन के मित्र सौरव ने बताया की सोनू बचपन से ही विश्वप्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिकविद् अल्बर्ट आइंस्टीन को प्रेरणाश्रोत मानते थे और आज अपनी मेहनत व लगन से सपने को सच कर दिखाया है।


पिता ने पुत्र सोनू के परचम पर नाज है।सोनू के पिता ललन सिंह किसान है और उन्हें अपनी बेटे की सफलता पर नाज है। बताते चलें कि इसरो द्वारा 978 करोड़ रुपए की लागत से बने 3877 किलोग्राम के चंद्रयान-2 को भारत ने अब तक के सबसे ताकतवर 640 टन वजनी स्पेसक्राफ्ट रॉकेट जीएसएलवी मार्क-III से लॉन्च किया।।

बड़हिया के नौजवानों देश राज्य में परचम लहरा रहा।

जिले के बड़हिया के बैज्ञानिक , साहित्य योग, कवि ,चिकित्सक प्रचार, नेता में परचम लहरा रहे हैं। जिसमें कवि में स्व मथुरा प्रसाद नवीन, योग में रबर बॉय रमनीष वत्स, साहित्य में रत्नेश्वर कुमार, सतेंदर अरुण नेता में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, प्रचार में ट्रिवागो बाय कंट्री हेड अभिनव कुमार, चिकित्सक में विजय नारायण सिंह अप्रवासी इंग्लैंड में डॉ रामसागर सिंह डॉ राकेश , पहलवान में स्व विश्वनाथ पहलवान, आईएएस में सलोनी, सुनील कुमार आईपीएस में विपुल आनंद, आईपीएस सह केंद्रीय राज्य रक्षा मंत्री ललित विजय सिंह, विज्ञानिक में अप्रवासी डॉ कृष्ण पाल एवं इसरो में सोनू सहित दर्जनों देश विदेश और राज्य में परचम लहरा रहे हैं।

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