PM मोदी की चेतावनी के बाद भी कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश पर कार्रवाई से क्यों बच रही है भाजपा


न्यूज डेस्क।।बीते मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में नगर निगम के एक अधिकारी की बल्ले से पिटाई करने वाले भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय की हरकत पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि इस तरह की हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं किया सकता है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे का नाम लिए बगैर पीएम मोदी ने कहा कि इस तरह की हरकत करने वाले लोगों को पार्टी से निकाल देना चाहिए।लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त टिप्पणी के बाद भी भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश पर पार्टी कारवाई करने से बच रही है। 

कारवाई का संदेश भी चला जाय और कारवाई हो भी न।

पार्टी इस पसोपेश में है कि आकाश पर कार्रवाई करने से क्या पश्चिम बंगाल में ममता के खिलाफ ​बीजपी के आक्रमक कैंपेन पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा।कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी हैं। आकाश पर किसी भी तरह की कार्रवाई का एक संदेश यह भी जाएगा कि हाई प्रोफाइल महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का कद छोटा किया गया है।

पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ​अमित शाह के बेहद करीबी लोगों में से एक हैं। विजयवर्गीय ने बंगाल में पार्टी को मेहनत कर लोकसभा चुनाव में एक सीट से 18 सीट तक पहुंचाया है। 2021 में बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। जहां बीजेपी इस बार ममता के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए मैदान में उतरी है। ऐसे में महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे पर की गई कार्रवाई से उसे नुकसान भी हो सकता है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिलेगा। मप्र भाजपा नेताओं के मुताबिक आकाश के खिलाफ कार्रवाई से भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर दिख सकता है। पार्टी इसी नफा-नुकसान का आकलन करने के बाद ही आकाश पर कार्रवाई करना चाहती है।

इसके अलावा पार्टी इस विकल्प की भी तलाश कर रही है कि आकाश के स्वागत समारोह में जिन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया था उन पर कार्रवाई कर इस मामले को रफा-दफा कर दिया जाए।

विधायक आकाश विजयवर्गीय पर कारवाई को लेकर गुरुवार को पूरे दिन आंख मिचौलील का खेल चलता रहा। भोपाल पहुंचे राज्य बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह दिनभर बीजेपी की अलग अलग मोर्चे की बैठक में शिरकत करते रहे पर नोटिस के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखा। इस मुद्दे पर बात करने पर सदस्यता अभियान की बात करने लगे। गुरुवार देर रात राकेश सिंह भोपाल से दिल्ली लौटे।

शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपी।अनुशासनात्मक कारवाई करने को लेकर बीजेपी पसोपेश में है कि कार्रवाई किस तरह की जाय कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। यानि प्रधानमंत्री की चेतावनी के बाद कारवाई का संदेश भी चला जाय और कारवाई हो भी न।

क्या  कहता है पार्टी का संविधान

भाजपा संविधान की धारा - 25 में अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानकारी दी गई है। इसकी उपधारा 6,7,8,9,10 में सुनवाई और सजाओं का उल्लेख किया गया है। किसी भी मामले में संज्ञान लेकर संबंधित व्यक्ति को शो कॉज नोटिस जारी कर सकते हैं। इसकी एक कॉपी अनुशासन समिति को दी जाती है। नियमों के मुताबिक 15 दिन के भीतर शिकायत की उस समिति के समक्ष मौजूद होकर जवाब देना होता है। इसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान केस से जुड़े सभी लोगों के बयान लिए जाते हैं. इससे जुड़े सबूत भी एकत्र किए जाते हैं। कोशिश होती है कि दो महीने में सुनवाई पूरी हो जाए। इसके बाद कमेटी रिपोर्ट व अनुशंसा अध्यक्ष को सौंपती है।

अनुशासन समिति अपनी रिपोर्ट में सजा का जिक्र करती है। प्रदेश अध्यक्ष सजा को कम और ज्यादा भी कर सकते हैं। अगर वह राज्य की अनुशासन समिति की ​रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हो तो केस को केंद्रीय अनुशासन समिति को भेज सकते हैं। अनुशासनहीनता के स्तर को देखते हुए कम से कम चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है। इसके अलावा अधिकतम छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया जा सकता है। पद से हटाने के अलावा पार्टी की सक्रिय सदस्यता भी वापस ली जा सकती है।
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