"महान विस्थापित एवं श्रमिक संघ"के बैनर तले कल विस्थापित व श्रमिक हिंडाल्को का विरोध


के.सी.शर्मा

सिंगरौली।बिड़ला ग्रुप की "हिंडाल्को इंडस्ट्रीज" बरगवां के उपेक्षित विस्थापित एवं शोषित श्रमिक कल "महान विस्थापित एवं श्रमिक संघ" के आवाह्न पर 21 जुलाई रविवार को "हिंडाल्को इंडस्ट्रीज" के गेट न03 के सामने ग्राम पंचायत बड़ोखर के खेल मैदान में खुली पंचायत एवं आम सभा करने का एलान किया है।जिसकी सप्ताह भर से तैयारी चल रही है।जिसमे हजारो की संख्या में परियोजना के उपेक्षित विस्थापित एवं शोषित श्रमिक शिरकत करेंगे।जहा से वे अपने साथ होरहे शोषण,उत्पीड़न,उपेक्षा, के खिलाफ भरेंगे "हुंकार" और करेंगे आर- पार के "जंग" का एलान।
विस्थापितो द्वारा किये जाने वाले इस आंदोलन के मद्देनजर परियोजना प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस भी सतर्क है और वे भी इस पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है।
विस्थापित संघ ने सौपा है ज्ञापन!

हिंडाल्को महान ऐल्युमिनियम स्मेल्टर एवं कैप्टिव पावर प्लांट बरगवां एवं म प्र शासन के साथ किये गए करारनामे का उल्लेख करते हुए "महान विस्थापित एवं श्रीमक संघ" ने लिखा है कि किये गए करारनामे का कम्पनी प्रवंधन अनदेखी करते हुए खुला उलंघन कर रहा है ,जिसके चलते विस्थापितो की स्थिति बद से बदतर होती जारही है और अब वे भुखमरी के कगार पर आगये है।उनके साथ हुए करारनामे के अनुसार नौकरी,पैकेज, पुनर्वासनीति के तहत उनको मिलने वाली मूलभूत सुविधाओ का भी उपलब्ध नही कराया जा रहा है।वर्षो बीतने के बाद भी कम्पनी प्रबंधन द्वारा समस्याओ को समय से हल नही किये जाने से अब विस्थापितो व श्रमिको में व्यापक पैमाने पर असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त होगया है। 


विस्थापित संघ ने दिए गए ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि परियोजना के ग्रामओडगड़ी,धौडर, वरैनिया, गिधेर, की भूमि,मकान,वृक्ष,आदि सभी जीवका के स्रोतों को कम्पनी द्वारा 2006-7 में पूरी तरह अधिग्रहीत कर लिया गया है।अधिग्रहित गांवों के परिवारों की संख्या1628 है। इनमें जिनकी सिर्फ भूमि अधिग्रहित की गई है उनकी सँख्या 1347 है। उसमें धारा 4 के समय जिनकी उम्र 16-17वर्ष थी उनकी संख्या लगभग 600 है जो इस समय 26-27वर्ष के होगये है। 
इन सभी विस्थापितो की कुल संख्या इस समय(1628+1347+600=3575) है।लेकिन कम्पनी ने एक दशक बाद भी इनमें अभी तक मात्र 357 लोगो को ही परियोजना में स्थायी नॉकरी उपलब्ध कराई गई है।
"विस्थापित संघ" ने मांग की है कि शेष विस्थापितो को भी स्थायी नौकरी मुहैया कराया जाय।

"संघ" का कहना है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रण के समय जो सुनहरे सब्ज बाग दिखाए गए थे उनमें जमीन के बदले जमीन, घर के बदले प्लाट, सहित स्थायी नॉकरी, पैकेज व पुनर्वासनीति के तहत सभी मूल भूत सुबिधाये मुहैया कराई जाएगी, जिसका दशको बीतने जारहे है,अनुपालन नही किया जारहा है।

"संघ" के अनुसार दिनांक 15/05/2009 पुनर्वास योजना 443/76/08/28भोपाल दिनांक 09/07/2008 के माध्यम से धारा4,6,9 तथा धारा 12 के तहत नोटिस दिया गया था। हम लोगो की जमीन तीन फसली थी जिसका मुवावजा मात्र 96000 प्रति एकड़ की दर से अर्जन अधिनियम 1894 की धारा अधीन एवार्ड में गड़ना किया गया था। 

परन्तु करारनामे के अनुसार व शर्त के मुताविक कोई ,भी सुविधा उपलब्ध नही कराई गई और न ही करारनामे का ईमानदारी से अनुपालन ही कराया गया ।जिससे क्षुब्ध हो कर हम विस्थापित व शोषित श्रमिक आंदोलन की राह पर जाने को विवस कर दिए गए है।

"विस्थापित्त संघ" ने 39 सूत्रीय ज्ञापन सम्बंधित अधिकारियों को 8/7/2019 को प्रेषित कर विस्तार से विन्दुवार अपनी मांगों का उल्लेख किया है और ज्ञापन के साथ किये गए करारनामे की क्षाया प्रति अवलोकनार्थ संलग्न किया है।

विभिन्न संगठनो ने भी विस्थापितो के आंदोलन को दिया है समर्थन!

कल होने जारहे विस्थापितो के इस आन्दोलन को उर्जान्चल के विभन्न समाजिक संगठनों, श्रमिक संगठनों,राजनैतिक दलों ने भी अपना समर्थन दिया है। जिससे आंदोलन मे बड़ी सँख्या में लोगो के इकठ्ठा होने की संभावना है।जिसकी तैयारी भी विस्थापित संघ द्वारा जोरदार ढंग से की जारही है। इस आंदोलन में कई संगठनों के नेताओ के शिरकत करने की बात बताई गई है।

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