हिंडाल्को महान परियोजना : प्रबंधन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध लामबंद हुए विस्थापित,स्थाई श्रमिक और ठेका श्रमिक


बरगवां(सिंगरौली)।"महान विस्थापित एवं श्रमिक संघ" ने कल रविवार 21/07/2019 को हिंडाल्को के गेट नंबर - 3 के पास ग्राम पंचायत बड़ोखर के खेल मैदान में विशाल आम सभा का आयोजन किया था।


जिसमें हजारों की संख्या में हिंडाल्को परियोजना में कार्यरत स्थाई श्रमिक, ठेका श्रमिक और ग्राम ओड़गड़ी, धौड़ार, बरेनिया, गिधेर के विस्थापितों ने पूरे उत्साह और जोश खरोश के साथ हजारो की संख्या भाग लेकर बिड़ला प्रबंधन के खिलाफ भरी हुंकार।

संगठन के अध्यक्ष नारायणदास विश्वकर्मा को श्रमिक जन प्रतिनिधि और नागेश्वर जायसवाल को महामंत्री को कार्यकारी अध्यक्ष चुनकर एक स्वर में उदघोष किया कि हिंडाल्को प्रबंधन की दमनकारी नीतियां अब और आगे कायम नहीं रह सकती बस अब बहुत हो चुका। 

सभा में भारतीय किसान मजदूर परिषद के अध्यक्ष  के.सी.शर्मा, कोयला श्रमिक सभा (एचएमएस)के महामंत्री अशोक कुमार पांडेय, अध्यक्ष एस.के.सक्सेना, निगाही परियोजना के शाखा अध्यक्ष प्रेमलाल पटेल, "संयुक्त श्रमजीवी पत्रकार महासंघ" के जिलाध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय, ब्रम्हण एकता महासभा उ प्र के कार्यकरी अध्यक्ष प0 बिमलेश दूबे, भीम आर्मी के अध्यक्ष श्री मोहर सिंह ,"महान विस्थापित एवं श्रमिक संघ" के संरक्षक गौरव प्रताप सिंह , कार्यकारी अध्यक्ष  राजेन्द्र पटेल ,कोर केमटी पदाधिकारियों में  रितेश बर्मन, मंगलनाथ, रमाशंकर सिंह, विश्वजीत, धीरेन्द्र कुशवाहा, कैलाशपति आदि ने सभा को

सम्बोधित करते हुए विस्थापितो, ठेका श्रमिको, स्थायी श्रमिको के साथ कम्पनी प्रबंधन द्वारा किये जारहे शोषण,उपिडन, और अन्याय के खिलाफ जम के भड़ास निकाली।

वक्ताओ ने हिंडाल्को प्रबंधन को चेतावनी भरे लहजे में चेताते हुए अपना ओजश्वी वक्तव्य दिया और कहा कि महान परियोजना के विस्थापितों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, पूर्व में हुए लिखित करार के वावजूद भी उन्हें अनदेखा करना, डरा धमकाकर प्रताड़ित करने और उनके अधिकारों का हनन करना जैसे हालात कम्पनी प्रबंधन ने बना दिये है।

वही परियोजना में कार्यरत देश के सभी दिशाओं से आए हुए स्थाई श्रमिकों को सभी प्रकार की सुविधाओं से मरहूम रखना, ना आवास न स्कूल न अस्पताल और ना ही वर्तमान तकनीक, महगांई, स्किल के अनुसार वेतन आदि समस्यायें जस की तस बनी हुई है।बेचारो को किराए के कमीशन वाले हॉस्टलों में जहां पीने के पानी और बिजली तक की ढंग से व्यवस्था नहीं है, वहां घुट घुटकर जीने के लिए उन्हें छोड़ दिया गया है। 

कुछ मात्र श्रमिकों को परियोजना से लगभग 30 कि. मी. दूर जो कि उचित दूरी नहीं है सिंगरौली में लगभग 50 वर्ष पुरानी कॉलोनी में फैमिली अवास दिया भी गया है तो उसमें ढेर सारी मेंटेनेंस की समस्या बनी हुई है जो की शिकायत के बाद भी समय पर निदान नहीं हो पा रहा है उल्टा ये कहा जाता है कि समस्या है तो नॉकरी छोड़कर जाओ।

ठेका श्रमिको का तो जैसे कोई माई बाप ही नहीं, धोबी के कुत्ते जैसी हालात है। उपरोक्त समस्याओं के समाधान के लिए सभी ने "महान विस्थापित एवं श्रमिक संघ" के साथ जुड कर अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एक जुट होरहे है।जो भविष्य के ओद्योगिक शांति के लिए शुभ संकेत नही है, वही बिड़ला प्रबंधन का असफल (आई आर)प्रबंधन का पूरी तरह फेल होना भी कहा जा सकता है। 

श्रमिको ने एक स्वर में कहा कि अभी तो अंगड़ाई है!,आगे असली लड़ाई है!!

श्रमिको ने आवश्यकता पड़ने पर संगठन द्वारा यदि शक्ति प्रदर्शन किये जाने की आवश्यकता पड़ी तो श्रमिक ,विस्थापित, ठेका श्रमिकों ने पुरजोर सहमति जताते हुए संगठन द्वारा आहूत जनांदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया।जंगी प्रदर्शन,आम सभा का संचालन बृजेश विश्वकर्मा ने किया।इस मौके पर जनाक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल की व्यवस्था की गई थी।

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