केन्द्रीय बजट में कुछ भी ऐसा नहीं जो गांव,गरीब और किसान,के जीवन को ‘‘अधिक सरल'' बना सके। - शैला अहमद


अब्दुल रशीद 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को बजट पेश करते हुए एक ऐसे भारत का जिक्र कर रहीं थीं जो सबके लिए हसीन ख्वाब जैसा है,लेकिन क्या हकीक़त में ऐसा है? विपक्षी दलों की बजट पर आई प्रतिक्रिया से साफ़ झलकता है,वे इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते।   
कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद शैला अहमद ने केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की, यह बजट उंची दूकान फीकी पकवान जैसा है,जिसमें बाते तो बड़ी बड़ी है लेकिन आधारहीन। इस बजट में कुछ भी ऐसा नहीं जो गांव,गरीब और किसान,के जीवन को ‘‘अधिक सरल'' बना सके।
उन्होंने कहा की,इस बजट में देश के युवाओं के लिये रोजगार की कोई योजना नहीं है, यही नहीं महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की कोई योजना का जिक्र नहीं है।पेट्रोल-डीजल के दामों में अतिरिक्त सेस लगने से 2.50 रूपए प्रतिलीटर की वृद्धि होगा जिससे परिवहन मंहगा होगा तो जीवनोपयोगी चीजों के दाम भी बढ़ेंगे।  किसान डीजल का उपयोग सबसे ज्यादा करता है,तो किसान को ज्यादा नुकसान होगा।

बेरोजगारी की मार और आर्थिक तंगी से गुजर रहे युवा,किसान और आम आदमी के लिए  बैंक से अपना पैसा निकालना और भी मंहगा हो जाएगा कुल मिलाकर मोदी सरकार का यह बजट हर वर्ग पर अतिरिक्त कर लादने वाला है जो देश के थैलीशाहों के आलावा सभी वर्गों को मायूस  करता है।

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