NTPC को दीमक की तरह चाट रही है "यू.पी.एल" !


सिंगरौली।सोनभद्र।एनटीपीसी लिमिटेड देश में सबसे बड़ी विद्युत उत्‍पादन कंपनी है।लेकिन "यू पी एल" नामक एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इस कंपनी की शाख पर बट्टा लगा रही है।



यू पी एल एन टी पी सी को कैसे दीमक की तरह चाट रही है 

दशको पहले एन.टी.पी.सी के ही सेवानिवृत अधिकारियों और कुछे  प्रोफेशनल द्वारा यू.पी.एल नामक कम्पनी, कम्पनी एक्ट के तहत पंजीकृत कराया।कंपनी बनने के बाद से एन.टी.पी.सी. में आउटसोर्सिंग सहित अन्य एनटीपीसी का कार्य उसकी सहयोगी कम्पनी और संविदाकार के रूप में करती चली आरही है। परन्तु यह कम्पनी अन्य संविदा कम्पनियों व एजेंसियों से हटकर एक सहयोगी कम्पनी के रूप में भूमिका निभा रही है।इस कम्पनी को एन टी पी सी के इस्टीमेटेट कास्ट के अतिरिक्त एक निश्चित प्रतिशत लाभांश सर्विस देने का कमीशन देती है। इतना ही नही आवासीय और चिकित्सकीय सुविधा भी एनटीपीसी द्वारा मुहैया कराया जाता है।जबकि अन्य संविदा कम्पनियों और एजेंसियों को यह सुविधा उपलब्ध नही है। यू पी एल भी एन टी पी सी से काम अर्जित कर, फिर वह भी निविदा आमंत्रित कर नियुन्तम दर वाले संविदा एजेंसियों को काम आवंटित कर, काम कराती हैं।जबकि कुछ काम एनटीपीसी भी सीधे निविदा आमंत्रित कर कराती है।दोनो कामो पर पड़ने वाले खर्च में जमीन आसमान का अंतर होता है।और अतिरिक्त व्यय भी एन टी पी सी को नही करना पड़ता है।इसीलिए एन टी पी सी में कार्यरत अन्य संविदा एजेंसियों से हट कर अलग है, इस प्रकार देखा जाय तो करोड़ो रूपये प्रतिवर्ष एन टी पी सी अन्य संविदा एजेंसी की तुलना में भुगतना करती है। 

NTPC के सेवानिवृतों और उनके भाई भतीजो की चारा गाह बन गई है यू पी एल !

इस कंपनी के गठन से इनके उच्च प्रबंधन पद पर विराजमान पदाधिकारियों पर गौर किया जाय तो पता चलता है की यह सब एन टी पी सी के सेवानिवृत्त अधिकारी ही हैं,यही नहीं कंपनी के नीचे के पदों पर भी अधिकांश इनके ही भाई भतीजे पदस्थ पाए जाते है।

सेवानिवृत्त होने के बाद और सेवानिवृत्त होने के बीच की लकीर ही भ्रष्टाचारमय कार्य शैली की ओर इशारा करता है,यू पी एल के तंत्र के इस खेल से एन टी पी सी प्रवंधन अनभिज्ञ है या उनकी भी मिलीभगत है? यह जांच का विषय है,लेकिन एन टी पी सी और यू पी एल का अघोषित गठजोड़ को लेकर जो चर्चा है उसे एक सिरे नकारा भी नहीं जा सकता।

कंपनी की नीति से स्थानीय ठेकेदार हो रहें हैं बर्बाद 

ठेकेदारों की माने तो यू पी एल उनका बिल येन केन प्रकारेण कोई न कोई कमी निकाल के वर्षो कुछ ठेकेदारों का तो कहना है तीन वर्ष तो कम से कम बिल लटकाया ही जाता है। ऐसा करके यू पी एल तो अपना काम और बैलेंस बढ़ाने में कामयाब हो पाती है,लेकिन बैंक और बाहर से कर्ज लेकर बिजनस करने वाले ठेकेदार बैंको के लोन का ब्याज भरते भरते बर्बाद हो जाते है। 

देखा जाय तो यह कंपनी एक तरफ एन टी पी सी से ज्यादा मुनाफ़ा कमा रही है,तो दूसरी तरफ छोटे और मझोले किस्म के स्थानीय ठेकेदारों को भी बर्बाद कर रही ह। इस खेल की यदि निष्पक्षता से जांच हो जाय तो न केवल बड़े बड़े अधिकारियो की संलिप्तता उजागर हो जाएगी बल्कि यह देश का यह महा घोटाला साबित हो सकता है।

क्षेत्रीय विधायक के निर्देशों का नही है यू.पी.एल को परवाह! 

यू.पी.एल. नामक इस कम्पनी का प्रवन्ध तंत्र इस कदर वेख़ौफ़ है कि वे अपने परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक और क्षेत्रीय विधायक तक के निर्देशों को ठेंगा दिखा देने का भी दुस्साहस करने से गुरेज नही करते,क्योकी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए ये जिसका जुगत करते हैं, उसी अस्त्र से सब ठीक कर लेने का विस्वास बनाये रखते हैं।

गत महीने एक फर्म ने एन टी पी सी शक्तिनगर के मुख्य महाप्रवन्धक को पत्र लिख उक्त स्थित से अवगत कराया था।इतना ही नही गत दिनों क्षेत्रीय विधायक के साथ एनटीपीसी प्रवंधन के समक्ष यह बात विधायक ने उठाते हुए पेंडिग मामले शीघ्र निस्तारण करने को कहा था और यू पी एल के रवैये में परिवर्तन लाने का निर्देश दिया था।किंतु इस कम्पनी के ढर्रे और रवैये में कोई परिवर्तन नही आया है।

उठ रही निष्पक्ष जांच मांग 

यू.पी.एल में व्याप्त भ्र्ष्टाचार,स्थानीय विस्थापितो को रोजगर न देना,आदि अनेकों मुद्दे को लेकर सांसद और विधायक के समक्ष यू.पी.एल. का मामला स्थानीय विस्थापितो और सम्विदाकारो ने उठाने के लिए तय कर लिया है।

विस्थापितो,स्थानीय संविदाकरो,बेरोजगारो, एवं भाजपा नेताओं ने तय किया है कि सांसद विधायक के माध्यम से एनटीपीसी प्रबंधन और देश के ऊर्जामंत्री से दिल्ली में मिल कर उनके समक्ष पूरा मामला रखते हुए यू.पी.एल को NTPC से बाहर कर पुरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेगा।


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