आज के युग में आयुर्वेद का विश्व व्यापी स्वरुप हो चूका है। - कुलगुरु


कुलगुरु,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने पारम्परिक पुट संकुल का उद्घाटन किया। 


अजीत नारायण सिंह 
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, आयुर्वेद संकाय के रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग में आज प्रोफ वी के शुक्ला,कुलगुरु,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने पारम्परिक पुट संकुल का उद्घाटन किया। इस संकुल में आयुर्वेदिक भस्मों के बनाने के लिये अलग अलग माप के शास्त्रोक्त “पुट" बनाये गये है। यथा स्वर्ण भस्म बनाने के लिये कुक्कुट पुट,माक्षिक भस्म बनाने के लिये वाराह पुट एवं लौह भस्म बनाने के लिये गज पुट। इन तीन तरह के पुट से आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग की जाने वाली अधिकांश धात्वीय भस्मे बनायी जाती हैं। इस संकुल के निर्माण से विभाग के विद्यार्थियों को शास्त्रोक्त विधि से चिकित्सकीय रूप में प्रभावी भस्मो को बनाने में सहायता होगी।

प्रो0 वी.के.शुक्ल कुलगुरु,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने पारम्परिक पुट संकुल का उद्घाटन करते हुये कहा कि आयुर्वेदिक भस्म बनाने की इस प्रक्रिया का वैज्ञानिक विधि अपना कर भस्म बनने के सम्पूर्ण तापक्रम का मानकीकरण करना चाहिये जिससे की मरीजो को विषाक्तता से रहित,प्रभावी भस्मे मिल सकें। उन्होंने कहा कि आज के युग में आयुर्वेद का विश्व व्यापी स्वरुप हो चूका है। हमे आयुर्वेद के सिधान्तो की प्रमाणिक प्रतिपूर्ति कर इसके युगानुरूप विकास की सम्भावनाओ पर बल देना चाहिये। 

प्रो0 आर.के. जैन, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने आयुर्वेदिक औषधियों के गुणवत्ता पर ध्यान आकर्षित करते हुये इस दिशा में अन्तराष्ट्रीय माप दण्डो के अनुरूप बनाने हेतु शोध कार्य करने का सुझाव दिया। 

प्रो0 वाई.बी. त्रिपाठी, संकाय प्रमुख, आयुर्वेद संकाय ने कहा कि आने वाला समय आयुर्वेद का है और हमें इसके लिये परिश्रम करना चाहिये। 


इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो0 आनन्द चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार अर्पित करते हुये कहा कि इन सभी पुट के निर्माण से विभाग की शोध क्षमता में वृद्धि हुयी है। आयुष मन्त्रालय,भारत सरकार से भस्मो की मानकीकरण, विषाक्तता एवं प्रभाविता पर कार्य करने हेतु शोध प्रोजेक्ट लेने की प्रारम्भिक तैयारी कर चुके हैंI शीघ्रता से इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हो जायेगा। 

पारम्परिक पुट संकुल के उद्घाटन के पूर्व विभाग में स्थापित श्री रसेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया गया। ज्ञात हो की प्रत्येक हिन्दू मास के शुक्ल पक्ष के त्रयोदशी को रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के द्वारा श्री रसेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, विभाग में शोध हेतु तैयार की जाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों के उत्तम निर्माण के लिये किया जाता है।
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