आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए सभी कर्ज माफ होंगे - मुख्यमंत्री कमल नाथ


भोपाल।।  प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ होंगे। इससे प्रदेश के डेढ़ करोड़ आदिवासी साहूकारों के कर्ज से मुक्त होंगे।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आज छिंदवाड़ा में अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बताया कि सरकार ने इसके लिए सभी औपचारिक व्यवस्थाएँ कर ली हैं। सभी 89 अनुसूचित क्षेत्रों में यह कर्ज 15 अगस्त तक माफ होना शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाये जाने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदिवासी वर्ग की मांग पर अनुसूचित जनजाति विभाग का नाम बदलकर आदिवासी विकास विभाग किया जायेगा।


  1. अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ होंगे।
  2. 15 अगस्त 2019 को साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे।
  3. जेवर, जमीन यदि गिरवी रखी है, तो वापिस की जाएगी।
  4. भविष्य में कोई साहूकार अनुसूचित क्षेत्र में साहूकारी का धंधा करना चाहता है तो लायसेंस और नियमों का पालन करेंगे।
  5. बगैर लायसेंस के साहूकारी का धंधा या नियमों का उल्लंघन किया तो ऐसा कर्ज नहीं चुकाया जाएगा।
  6. आदिवासियों को डेबिट कार्ड दिए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर ए.टी.एम. से निकाल सकेंगे 10 हजार रूपए।
  7. हर हाट बाजार में खोले जायेंगे ए.टी.एम।
  8. खारिज वनाधिकार पत्रों का फिर से परीक्षण होगा और वनाधिकार पत्र जारी होंगे।
  9. 'मुख्यमंत्री मदद योजना' में आदिवासी परिवार में जन्म होने पर आधा क्विंटल और मृत्यु होने पर 1 क्विंटल खाद्यान्न मिलेगा। भोजन बनाने के लिए बड़े बर्तन भी उपलब्ध होंगे।
  10. सभी वन ग्राम राजस्व ग्राम बनेंगे।
  11. 40 नये एकलव्य विद्यालय खुलेंगे ।
  12. 40 हाईस्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन होगा।
  13. आदिवासी क्षेत्रों में 7 नये खेल परिसर बनेंगे।
  14. आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ाने वाले 53 हजार अध्यापकों को शासकीय शिक्षक के समान सुविधाएँ मिलेंगी।
  15. अनुसूचित जनजाति विकास विभाग का नाम अब आदिवासी विकास विभाग होगा।
मुख्यमंत्री  कमल नाथ ने अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कई ऐतिहासिक कामों का खुलासा किया। उन्होंने साहूकारों से लिए कर्ज माफ करने के संबंध में कहा कि किसी आदिवासी ने कर्ज लेने के लिए अपनी जेवर, जमीन गिरवी रखी है तो वह भी उन्हें वापिस होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में कोई साहूकार अनुसूचित क्षेत्र में साहूकारी करेगा तो उसे लायसेंस लेकर नियमानुसार धंधा करना होगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर बगैर लायसेंस के किसी ने अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी का धंधा किया तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसे गैरकानूनी माना जायेगा। यह कर्ज आदिवासी नहीं चुकाएंगे।

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