सिंगरौली :तबादला आदेश को ठेंगा दिखा रहा दशकों से एक जगह पदस्थ वनरक्षक, मामला ओबरी का


ब्यूरो,सिंगरौली (मध्य प्रदेश)

वन मंडल सिंगरौली के अंतर्गत वन परिक्षेत्र बरगवां के बीट ओबरी में सियम्बर सिंह वनरक्षक पिछले 10 सालों से एक ही जगह में पदस्थ है। तमाम शिकायतों और आदेशों के बावजूद एक जगह दशकों से पदस्थ रहना चर्चा का विषय बना हुआ है।

 वर्ष 2017 से आज तक सभी आदेश बेअसर 

ज्ञात हो वनरक्षक का स्थानांतरण बीट ओबरी से बीट पुरैल के लिए वर्ष 2017 में स्थानांतरण हुआ था और बीट ओबरी में प्रेम लाल कुशवाहा वनरक्षक की परिस्थिति की गई थी लेकिन सियम्बर सिंह वनरक्षक अधिकारियों से मिलीभगत और अपने रसूख के दम पर प्रेमलाल वनरक्षक को 11 महीने बाद वीट ओबरी का प्रभार बड़े जद्दोजहद के बाद दिया था और 6 माह बाद अपने जातीय समीकरण और अधिकारियों से मिलीभगत कर प्रेम लाल कुशवाहा को बीट ओवरी में निलंबन करवा दिया। प्रेम लाल बन रक्षक के निलंबन के उपरांत स्वयं बीट ओवरी के प्रभार ले लिया।



इसके बाद वनमंडल अधिकारी सिगरौली द्वारा बीट ओवरी के लिए अनिल कुमार साकेत वनरक्षक की परिस्थिति हुई। उक्त आदेश के पता चलते ही आनन-फानन में फिर से अनिल कुमार साकेत वनरक्षक की बीट ओबरी में लगाई गई ड्यूटी को निरस्त करवा कर वन परिक्षेत्र बरगवां अंतर्गत बीट झुरही में बदलवा दिया।अनिल कुमार साकेत वनरक्षक की पदस्थिति बीट झुरही होने के कारण में उन्होंने वन परिक्षेत्र गोरबी से वन प्रक्षेत्र बरगवां में आज दिनांक तक उपस्थित ही नहीं हुए।

सियम्बर सिहं वनरक्षक के विरुद्ध तमाम तरह की शिकायतें होने के बावजूद वन परिक्षेत्र अधिकारी बरगवां वन मंडल अधिकारी सिंगरौली के निर्देशानुसार अपने आदेश द्वारा सियम्बर सिंह को बीट ओबरी का संपूर्ण मोहम्मद सिराज अहमद सिद्धकी वन रक्षक को प्रदाय कर वन मंडल कार्यालय सिंगरौली में उपस्थित होने हेतु निर्देश दिया गया।

वनरक्षक के भय से चुप रहते हैं ग्रामीण!

आज दिनांक तक वनरक्षक सियम्बर सिंह बीट ओवरी में पदस्थ है उनके खिलाफ की गई शिकायत में उनके बीट में पदस्थ रहते हुए की जाती हैं जिससे शिकायतकर्ता और संबंधित गवाह वनरक्षक के डर की वजह से जांच में आए अधिकारियों के समक्ष सही बयान देने में कहीं न कहीं असहज महसूस करते हैं और आरोपी वनरक्षक हर बार बच जाता है।सूत्रों की माने तो वनरक्षक द्वारा आए दिन ग्रामीणों को वन विभाग के चक्रव्यूह में फसाने की धमकी दी जाती है,साथ ही शराब पीकर ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करना उसके लिए आम बात है।

ग्रामीणों को खाना बनाने की लकड़ी से लेकर पालतू मवेशियों के चारा और तमाम तरह के दैनिक जीवन की आवश्यकताएं जंगल से ही पूर्ण होती हैं ऐसे में वनरक्षक के द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार को सहने के लिए ग्रामीण जनता मजबूर है।कई बार उनके खिलाफ कुछ लोग आगे आकर शिकायत भी किए लेकिन उसी की उपस्थिति में बीट मे पदस्थ रहते हुए अधिकारियों द्वारा जांच किया जाना कहीं न कहीं उनके मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

सरकार के तबादला नियम को ठेंगा दिखा रहा वनरक्षक 


अभी हाल मे ही जुलाई 2019 में स्वयंवर सिंह का स्थानांतरण हो चुका है और बीट ओबरी के लिए नए वनरक्षक की परिस्थिति हुई है लेकिन 1 माह बीत जाने के बाद भी बीट ओवरी का प्रभार नहीं दिया जाना और अधिकारियों द्वारा नही दिलाया जाना कहीं न कहीं फिर संदेह पैदा करता है कि सियंबर सिह अपनी रसूख और अपने आला अधिकारियों को मिलाकर अपनी परिस्थिति यथावत रखवा पाने में फिर कामयाब हो रहा है

मध्यप्रदेश के नए तबादला नीति के अनुसार तबादला आदेश जारी होने के बाद दो सप्ताह के भीतर संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त होना होगा। इसके बाद एकतरफा रिलीव कर दिया जाएगा। तबादले के बाद रिक्त होने वाले पद की पूर्ति उसी के समकक्ष अधिकारी से की जाएगी। किसी को दोहरा प्रभार नहीं दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए मांग की है की इस मामले को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्यवाही की जाय जिससे इस बार हुए चर्चित वनरक्षक का तबदाला हो सके।जनचर्चाओं की माने तो यदि इस बार भी तबादला रुकता है तो नरक्षक के दुर्व्यवहार से परेशान ग्रामीण उग्र आन्दोलन कर सकते हैं?


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