#UPL,#CSR यूपीएल में नही है सीएसआर विभाग ?


सिंगरौली।सोनभद्र।देश की महारत्ना बिजली कम्पनी एनटीपीसी और रिलायन्स की ज्वाइंट वेंचर यूपीएल के प्रबंधन  पर सवाल उठाते ख़बरों का ज़वाब देने के बजाय ख़बर करने वाले पत्मेंरकार के विषय में जानकारी जुटाना यक़ीनन कंपनी के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार की तरफ़ इशारा करता है।   

कुछ और नए सवाल इस उम्मीद के साथ की ख़बरनवीस की ख़बर ढूंढने के बजाय सवालों के जवाब दिए जाएंगे!

रहस्यमय नियुक्ति निति के कारण नहीं मिलता विस्थापितों को लाभ 

क्षेत्रीय लोगो का कहना है की यूपीएल प्रबंधन अपने संस्थान में नियुक्ति कैसे करता है इसके उनके क्या नियम कायदे है? यह तो वही जाने? परन्तु आम आदमी तो इससे अनभिज्ञ ही है।

जिसके परिणाम स्वरूप एनटीपीसी की परियोजनाओं से विस्थापित हुए परिवारों के बेरोजगार युवाओं को इस कम्पनी में रोजगार के अवसर नही मिल पाते हैं,वही जिन विस्थापितो की जमीन पर एनटीपीसी स्थापित है, उसी एनटीपीसी में यूपीएल संविदाकार की महत्वपूर्ण भूमिका में सेवारत है और इस यूपीएल मे विस्थापितो की कोई पूछ नही है।

जबकि एनटीपीसी के अधिकांश पैकेज इसी कम्पनी को मिलते हैं। जिससे वह प्रति वर्ष करोड़ो रूपये मुनाफा कमाती है।साथ ही इनको मिलने वाले काम के पैकेजों का भी लाभ ज्यादेतर आउटसाइडर कांट्रेक्टर और वर्कर उठाते हैं, जिससे एनटीपीसी के विस्थापित परिवार के संविदाकारो व वेरोजगार युवाओं में व्यापक असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।जो कभी भी जनांदोलन में परिवर्तित हो जाये कि सम्भावना से इनकार नही किया जा सकता है।

क्षेत्रीय सांसद,विधायक और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच समय - समय पर होने वाली वैठको में भी उठता रहता है यह मुद्दा!

यूपीएल पर क्यो है एनटीपीसी मेहरबान?

सिंगरौली परिक्षेत्र के एनटीपीसी की तीनों परियोजनाओं में कार्यरत यूपीएल की कार्यप्रणाली एक जैसी ही है।यह कम्पनी भले ही एनटीपीसी की जवाईंट वेंचर क्यो न पर यह कई सवालों के घेरे में आके खड़ी हो चुकी है।क्यो की एनटीपीसी देश के सवा अरब से अधिक लोगो से सरोकार रखने वाली भारत सरकार की एक महारत्ना बिजली कम्पनी है,जिसके लाभ हानि से भी सभी का सरोकार है।यूपीएल पर क्यो है एनटीपीसी मेहरबान? क्यो नही आन लाइन टेंडर में कराती है भागीदारी?

एक तरफ देश मे सरकार फिजूल खर्चे की कटौती में लगी हुई है और सभी तरह के काम आन लाइन बिडिंग करा के न्यूनतम दर वाले को ही काम दे रही है, जिससे इसमें अधिक से अधिक वेंडर आते हैं और खुली प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिसके चलते पारदर्शित बनी रहती है, वही कोई गड़बड़ी या पक्षपात का आरोप भी नही लगता और सही दर के वजह से देश को बचत भी होती है।

फिर सवाल उठता है कि एनटीपीसी प्रवंधन बगैर खुली बिडिंग कराये ज्वाइंट वेंचर की आड़ में यह काम कर देश क्यो क्षति पहुंचा रही है? यह तो वही जाने कि उसके इस नीति से देश और एनटीपीसी को क्या लाभ मिल रहा है? इस सवाल का जबाब तो सार्वजनिक होना ही चाहिए?

बगैर बिडिंग कराये यूपीएल को काम दिया जाना क्या देश की बर्तमान सरकार के नीतियों के अनरूप है? या नही? इसका जबाब तो देना ही होगा?


दीमक की तरह एनटीपीसी को चाटने वाली यूपीएल का लाभांश क्या देश को मिल रहा है? या किसी निजी ओद्योगिक घराने को?यह तो यूपीएल और एनटीपीसी को देश सार्वजनिक करना चाहिए।

यूपीएल में नही है सीएसआर विभाग क्या?

जब सरकार ने नीति बनाया है कि हर कम्पनी को अपना सालाना मुनाफा सार्वजनिक करना होगा और उसका 2% सीएसआर फंड में जमा करना होगा और उसका उपयोग उसके नीतियों के अनरूप जन उपयोग में करना होगा।क्योकी यह अंश कटने के बाद देश की लोक सम्पत्ति हो जाता है।इस लोक सम्पत्ति का क्या कोई लेखा जोखा यूपीएल के पास है? है,तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए?नही तो क्यो नही है? क्योकी लोक सम्पत्ति में गड़बड़ी होना एक गम्भीर अपराध है?

एनटीपीसी के सिंगरौली,विन्ध्यनगर,रिहन्द नगर, से इस कम्पनी ने प्रतिवर्ष कितने रुपये का काम किया? और कितना मुनाफा कमाया? और कितना सीएसआर के मद में जमा किया? और कितना इन परियोजनाओं के आस पास और विस्थापितो के बस्तियों में किस किस किस मद में खर्च किया? यह तो सवाल उठा है तो उसे इसे जनता को बताना ही चाहिए?, क्योंकि सीएसआर का फंड लोक सम्पत्ति होता है। जिसपर आम नागरिक का अधिकार है।

उर्जांचल टाइगर की डिजिटल टीम ने जब यूपीएल के वेबसाइट पर जाकर कंपनी के सीएसआर नीति को पढ़ना चाहा तो एक Social Responsibility का बटन वेबसाइट के मुख्य मेनू में दिखा लेकिन उसे क्लिक करने पर कोई लिंक नहीं खुलता टेक्नीकल भाषा में यह सिर्फ दिखावे के लिए बनाया गया बटन है। सवाल यह है के इतने बड़े कंपनी में ऐसा दिखावा क्यों? ऐसे में तो कंपनी की नीति और नियत दोनों पर सवाल उठता है?
उर्जांचल टाइगर ने इस संबंध में प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए मेल किया है लेकिन अभी तक कोई ज़वाब नहीं आया है,जवाब आते ही अपडेट कर दिया जाएगा।

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