"हम भारत के लोग"


शैला अहमद 
देशभक्त हिन्दुस्तानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के बाद गुलामी के बेड़ियों को तोड़ते हुए ब्रिटिश शासन से मुक्ति हुए। लोकतंत्र को मज़बूत आधार देने का काम हमारे संविधान ने किया है।जो हर आम नागरिक को एहसास करता है कि वह एक खुदमुख्तार मुल्क का आज़ाद ख्याल बाशिंदा हैं।

देश के संविधान का प्रस्तावना "हम भारत के लोग" ही यह बाताने के लिए काफी है की आज़ाद भारत में नागरिकों  के साथ  भेद-भाव  नहीं होगा,स्वतंत्रता होगी,समानता होगी, भाईचारा होगा,उपासना की स्वतंत्रता,और एक बेहतर समाज बनेगा। 

आजादी के 73 साल बाद स्वराज का सपना तो साकार नहीं हुआ,अलबत्ता,हमारी भावनाओं का राजनीतिक तुष्टीकरण करके हमकों खेमें में बांट दिया गया। भले ही हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के निवासी हो,खुद  को धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र कहते हैं, पर दूसरे धर्म के लोगों को भीड़ के दम पर “जय श्रीराम” बोलने के लिए मजबूर कर रहे हैं।भीड़ के आड़ में पशुता कर रहें हैं। 

आज़ादी की वास्तविक आत्मा को बचाने के लिए हमको पहले लोकतांत्रिक होना होगा, जो आज़ादी के इतने सालों के बाद भी हम नहीं हो पाए हैं।आइए हम सब मिलकर स्वतंत्रता दिसव पवन अवसर पर देश के संविधान की प्रस्तावना को जीवंत करने संकल्प लें,और हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई के बजाय हिन्दुस्तानी बनें।

लेखक : शैला अहमद पूर्व सांसद हैं।
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