तीन तलाक़ बिल का पुरज़ोर समर्थन करने वाले आरिफ मोहम्मद बने केरल के नए राज्यपाल


तीन तलाक़ बिल का पुरज़ोर समर्थन व शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा अमान्य घोषित करने के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले मुस्लिम नेता आरिफ मोहम्मद खान को मोदी सरकार ने केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है।

सरकार ने रविवार को खान के अलावा भाजपा के कई नेताओं को भी विभिन्न राज्यों के राज भवनों में भेजा है।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भाजपा नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी (77) को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं भाजपा की तमिलनाडु अध्यक्ष तमिलसाई सुन्दरराजन (58) को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

वहीं हाल ही में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त किए गए पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र को राजस्थान भेजा गया है।

कौन हैं,आरिफ मोहम्मद खान

यूपी के बुलंदशहर में पैदा होने वाले आरिफ मोहम्मद खान ने दिल्ली के जामिया स्कूल से पढ़ाई की और आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। आरिफ मोहम्मद छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़ गए थे। वो शुरुआत से ही मुस्लिम समुदाय की प्रगतिशीलता की पैरवी करते रहे हैं। जिसके चलते वो अक्सर मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग के निशाने पर भी बने रहते हैं।

1977 में 26 साल की उम्र में वो पहली बार विधायक बने और उसके बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। लेकिन नब्बे के दशक में प्रसिद्ध शाहबानो केस के चलते राजीव गांधी के स्टैंड के खिलाफ आवाज उठाई और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी भी छोड़ दी। बाद में वो जनता दल और बहुजन समाज पार्टी से भी जुड़े। इसी क्रम में साल 2004 में वो भाजपा में शामिल हो गए। लेकिन भाजपा पार्टी में उचित तवज्जो नहीं मिलने पर 2007 में भाजपा से भी किनारा कर लिया।

मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक विधेयक लाये जाने पर खान ने उसका पुरज़ोर समर्थन भी किया।और इस बिल को बनाने की पूरी प्रक्रिया में मोहम्मद आरिफ खान अहम भूमिका निभाई है।
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