स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाज़ा दो मासूमों को अपनी जान दे कर चुकाना पड़ा !


अब्दुल रशीद 

अब वह दौर शायद ख़त्म हो गया है,जब स्कूलों को शिक्षा का मंदिर और बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता था। अब शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है,और बाजार के मुनाफाखोर संचालकों पर से आए दिन हादसों की ख़बर आने से अभिभावकों के लिए  बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर खतरा साफ मंडरा रहा है। यहां के स्कूल नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। पढ़ाई के नाम पर मनमाने ढंग से फीस  वसूलने वाले ज्यादातर विद्यालय व शिक्षण संस्थानों की बिल्डिंग मानक के अनुरुप है ही नहीं। SAPIENT INTERNATIONAL ACADEMY के दो बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई  लेकिन  मध्यप्रदेश  कमलनाथ सरकार के जिम्मेदार अफसरों ने मामले में खानापूर्ति करते हुए सारा दोष ड्राइवर पर मढ दिया, वहीं सांसद,विधायक और सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधियों की  चुप्पी ने इस दर्द को और भी तकलीफ़देह बना दिया है।



क्या था मामला 

तारीख़ 28 अगस्त 19 दिन बुधवार दोपहर मोरवा थाना क्षेत्र के खनहना में स्थित सेपिएन्ट स्कूल में अध्ययनरत दो मासूमों की स्कूल बस के नीचे आ जाने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा स्कूल की छुट्टी के समय करीब 1:45पर हुआ। स्कूल में अध्ययनरत छात्र 12 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव एवं 10 वर्षीय छात्रा अदिति श्रीवास्तव पिता गोपाल श्रीवास्तव निवासी डाला हाल मुकाम अनपरा अपने मामा अविनाश कुमार के साथ घर जाने के लिए मोटरसाइकिल पर बैठे ही थे की स्कूल द्वारा संचालित स्कूल बस की चपेट में आ गए। बताया जाता है कि स्कूल बस का ड्राइवर धर्मेंद्र बिना पीछे देखे व खलासी को बताए बिना तेजी से बस बैक किया,जिससे मोटरसाइकिल पर बैठे दोनों बच्चों व मोटरसाइकिल चालक को रौंदते हुए बस आगे निकल गई। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में लोगों द्वारा तीनों को बस से केंद्रीय चिकित्सालय मोरवा लाया गया जहां डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।बच्चों के मामा जो मोटरसाइकिल चालक था को मामूली  चोटें आई। 

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाज़ा दो मासूमों को अपनी जान दे कर चुकाना पड़ा!  

मोटी फीस लेने वाले प्राइवेट स्कूल मुनाफाखोरी के चक्कर में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सीमा पर एकांत में बनाए गए सेपिएन्ट स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बतया जाता है की अनुभवी चालक को छोड़ नए चालक और गूंगे-बहरे खलासी  के हाथ में स्कूल बस की कमान सौंप दी गई थी,जिसका खामियाजा एक ही घर के दो मासूम बच्चों को अपनी जान दे कर चुकाना पड़ा।

हादसे होने के बाद जनप्रतिनिधियों की चुप्पी दुःखद है 

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में लगभग आधे शिक्षण संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है। इनमें से अधिकतर संस्थानों के मालिक किसी न किसी दल के साथ जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि, स्कूलों में बच्चों के साथ हादसा होने पर भी कोई कार्रवाई नही हो पाती।

क्या खलासी और ड्राइवर ही दोषी है,स्कूल प्रबंधन नहीं? 

जिले के कलेक्टर के.वी.एस. चौधरी एवं एसपी अभिजीत रंजन द्वारा अधिनस्थ अधिकारियों कि आवश्यक बैठक बुलाते हुए केंद्र सरकार द्वारा स्कूल बस संचालन परिचालन को लेकर जारी निर्देशों के मुताबिक सख्ती से पालन करने कदम उठाए गए हैं।लेकिन सवाल यह है की बस इतना सा क़दम उठा लेने से ही रूह को कंपा देने वाली घटना के पीड़ित को न्याय और दोषियों को सज़ा मिल जाएगा,क्या यही इंसाफ है? जिन अधिकारियों ने ऐसे स्कूलों को जो मानक के अनुरूप नहीं है को मान्याता दिया है, क्या उनकी जांच नहीं होनी चाहिए? क्या खलासी और ड्राइवर ही दोषी है,स्कूल प्रबंधन नहीं? 

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