सिंगरौली : आज भी चितरवई कला गांव में लोग ढ़िबरी और लालटेन के सहारे जी रहे हैं।


धर्मेन्द्र शाह

सिंगरौली जिला का एक ऐसा गांव जहां अभी लोग 24 घंटे बिजली आज भी दिव्य स्वपन सा लगता है। गांव में लोग चिमनी/ढ़िबरी और लालटेन के सहारे जी रहे हैं। बच्चों का भविष्य अंधकरमय हो रहा है।ग्रामीणनों ने शासन प्रशासन से कई बार गुहार लगाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई,लोगों का कहना है कि जे.ई.-डी.ई.- ए.सी. - कलेक्टर सभी को आवेदन के साथ निवेदन कर गुहार लगा चुके हैं, फिर भी अभी तक हमें कोई सुधार नहीं हुआ है। 
शैलेंद्र कुमार शाह का कहना है की हम जे.ई., डी.ई., ए.-सी., कलेक्टर से मिलकर अपने गांव में 24 घंटे बिजली आपूर्ति करवाने को लेकर आवेदन के साथ मिले, पर आश्वासन के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने बताया हमें जहां जहां पता चला हम वहां वहां आज 3 महीने से भटक रहे हैं। पर गांव में अभी तक 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है। 


चुनाव के समय में 23/04/2019 से 24/05/2019 तक वोट बैंक की राजनीति के लिए इस गांव के साथ राजनीति का खेलवाड कर 24 घंटे बिजली दिलवाया गया। इसके पहले शाम को 6:00 से 10:00 तक एवं सुबह 6 से 12 तक लाइट रहा करती थी। चुनावों के बाद से उनकी हालत फिर कुछ दिनों तक वैसे ही रह गई इसके बाद अब तो लाइट केवल दिन में 8 बजे से 4 ही मिलती है। लाईट न रहने से बच्चों की पढ़ाई नही हो पता जिससे उनका भविष्य अंधकरमय होता दिख रहा है।

  • ग्रामीणों का कहना है कि रात में लाइट न होने के कारण घर में कई तरह के जानवर घुस जाते हैं जिसका लोगों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ रहा है।
  • ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव में अभी भी मेरे पास 305 लोगों का घरेलु कनेक्शन की बिल है, जिस गांव में यताना ज्यादा कनेक्शन होने के बाद भी विजली की आपूर्ति न हो तो कनेक्शन लेने का मतलब सरकार को फ्री में पैसा देना है।
यह इस गांव का दुर्भाग्य कहें या सौभाग्य जिस गांव से लड़के जज, विदेशों में इंजीनियर, डॉक्टर बन रहे हैं, वहाँ के लोगों को आज भी लालटेन और चिमनी का सहारा लेना पड़ रहा है।

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