हाशिये के लोगों को मुख्य धारा में लाने का उपक्रम है भारतीय संविधान - श्रीनाथ त्रिपाठी



अंकुर पटेल (विशेष संवाददाता)
  • 70वे संविधान दिवस के उपलक्ष्य में हरिश्चंद्र महाविद्यालय में आयोजित हुई गोष्ठी
  • संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों पर हुई चर्चा
वाराणसी,26 नवंबर।। "हमारा इतिहास गवाह रहा है कि जब कभी नकारात्मक शक्तियों को मर्द परास्त करने में असफल रहे हैं, नारी शक्ति ने उनका दमन तत्काल किया। ऐसी ही कुछ शक्ति भारतीय संविधान में निहित है। जिन समस्याओं का हल व्यक्ति के मूल्य,संस्कार और सामंजस्यता नहीं हो सकता उन सभी का मूल्यपरक समाधान संविधान से ही संभव है।जरूरत इस बात की है कि संविधान की आत्मा कभी न मरे,क्योंकि यही एकमात्र ऐसी आशा की किरण है जो समाज में हाशिये के लोगों को भी मुख्य धारा में लाने की वकालत करता है।"उक्त विचार वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने व्यक्त किये। वह बतौर मुख्य अतिथि हरिश्चन्द्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 70वें संविधान दिवस* के उपलक्ष्य में आयोजित एक दिवसीय गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि सही मायनों में 400 साल से ज्यादा पुराने विवाद में संविधान के अनुसार न्याय हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने संविधान की रक्षा का आह्वाहन करते हुए कहा कि आत्म केंद्रित रहने भर से न समाज का भला होगा न ही राष्ट्र का।ऐसे में हर एक भारतीय का ये दायित्व है कि संविधान की रक्षा को सामने आए और विधि अनुसार ही आचरण करे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि जिस प्रकार महिलाओं की तरह सामाजिक नियम कायदे बनाये गए हैं उसी तरह आज की महती आवश्यकता यह है कि पुरुषों के लिए भी कठोर नियम बनें। आज की राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग पर तंज कसते हुए प्रोफेसर सिंह ने कहा कि यह लोकतंत्र के विरुद्ध आचरण है जिस पर संविधान की आत्मा तार तार हुई है।

इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह द्वारा निशुल्क कानूनी सहायता केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। इस केंद्र में विभागाध्यक्ष डॉ अशोक सिंह के नेतृत्व में प्राध्यापकों की टीम द्वारा क्षेत्र के जरूरतमंद जनता को निशुल्क कानूनी सलाह सहायता प्रदान की जाएगी।

इस अवसर पर बड़ी संख्या मे विधि विभाग के छात्र छात्राएं व अध्यापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर विजय कुमार राय व धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर छत्रधारी सिंह ने किया।
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