शासकीय हाई स्कूल गोभा : कीड़ा युक्त चावल से बना मध्यान भोजन स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है?


श्रीराम विश्वकर्मा
मध्याह्न भोजन योजना के अन्तर्गत विद्यालयों में मध्यावकाश में बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन दिये जाने का प्रावधान है। प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराये जा रहे भोजन में कम से कम 450 कैलोरी ऊर्जा व 12 ग्राम प्रोटीन एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 700 कैलोरी ऊर्जा व 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध होना चाहिए । शासकीय हाई स्कूल गोभा में मिड डे मील योजना के ठेकेदारों कों कौन बताय के कीड़ा युक्त चावल और सड़ी गली सब्जी से स्वादिष्ट और पोष्टिक भोजन नहीं बनाता है। अब देखना है के जिले के जिम्मेदार ऐसे गैरजिम्मेदारों पर कार्यवाही करते हैं या चुप्पी साधकर मौन सहमति देते हैं मासूम बच्चों का हक़ डकारने का। 

 क्या है मध्याह्न भोजन योजना की गाइडलाइंस

  1. मिड डे मील स्कीम को जिन भी स्कूलों में चलाया जाता है उन सभी स्कूलों के लिए सरकार ने गाइडलाइंस तैयार की हैं और इन गाइडलाइंस का पालन हर स्कूल को करना पड़ता है। 
  2. मिड डे मील से जुड़ी प्रथम गाइडलाइन के मुताबिक जिन स्कूलों में मिड डे मील का खाना बनाया जाता है, उन स्कूलों को ये खाना रसोई घर में ही बनाना होता है। कोई भी स्कूल किसी खुली जगह में और किसी भी स्थान पर इस खाने को नहीं बना सकता है। 
  3. दूसरी गाइडलाइन के मुताबिक रसोई घर, क्लास रूम से अलग होना चाहिए, ताकि बच्चों को पढ़ाई करते समय किसी भी तरह की परेशानी ना हो। 
  4. स्कूल में खाना बनाने में इस्तेमाल होनेवाले ईंधन जैसे रसोई गैस को किसी सुरक्षित जगह पर रखना अनिवार्य है।  इसी के साथ ही खाना बनाने वाली चीजों को भी साफ जगह पर रखने का जिक्र इस स्कीम की गाइडलाइन में किया गया है। 
  5. जिन चीजों का इस्तेमाल भी खाना बनाने के लिए किया जाएगा, उन सभी चीजों की क्वालिटी एकदम अच्छी होनी चाहिए और पेस्टिसाइड वाले अनाजों का प्रयोग किसी भी प्रकार के खाने में नहीं किया जाना चाहिए। 
  6. खाने बनाने के लिए केवल एगमार्क गुणवत्ता और ब्रांडेड वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाने का उल्लेख भी इस योजना की गाइडलाइन में किया गया है। 
  7. खाना बनाने से पहले सब्जी, दाल और चावल को अच्छे से धोने का नियम भी इस स्कीम की गाइडलाइन में जोड़ा गया है। 
  8. गाइडलाइन के मुताबिक जिस जगह यानी भंडार में खाने की सामग्री को रखा जाएगा उस भंडार घर की साफ पर भी अच्छा खासा ध्यान देना होगा। 
  9. जिन रसोइयों द्वारा बच्चों को दिए जानेवाला ये खाना बनाया जाएगा, उन रसोइयों को भी अपनी साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। खाना बनाने से पहले रसोइयों को अपने हाथों को अच्छे से धोना होगा और उनके हाथों के नाखून भी कटे होने चाहिए। इसकी के साथ जिस व्यक्ति द्वारा बच्चों को खाना परोसा जाएगा उसे भी अपनी साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। 
  10. खाना बनने के बाद उस खाने का स्वाद पहले दो या तीन लोगों को चखना होगा और इन दो तीन लोगों में से कम से कम एक टीचर शामिल होना चाहिए। 
  11. समय समय पर बच्चों को दिए जाने वाले इस खाने के नमूनों का टेस्ट स्कूलों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में करवाना होगा। 
  12. जैसे ही बच्चों के देने वाला खाना बना लिया जाएगा, तो उस खाने को बनाने में इस्तेमाल हुए बर्तनों को साफ करके ही रखना होगा. गाइडलाइन के मुताबिक बच्चों को ये खाना केवल साफ जगह पर ही परोसा जाना चाहिए। 

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