छठ के गीतों में छिपा है बेटियों का प्यार और महत्व..।


मुकेश कुमार
पटना।। कार्तिक माह के शुरू होते ही आस्था का महापर्व छठ मईया के गीत गूंजने लगते हैं। खासकर दीपावली के बाद छठ के पारंपरिक गीतों से माहौल भक्तिमय बन जाता है। छठ के पारंपरिक गीतों की महत्ता को देखते हुए ऐसा लगता है कि छठ के पारंपरिक गीतों के बिना सूर्योपासना का महापर्व अधूरा है।
छठ मईया से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का इससे बेहतर दूसरा माध्यम नहीं हो सकता। जोड़े-जोड़े नारियल मईया तोहरे चढ़ाईवो ना, केलावा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया, दरस देखाव ए दीनानाथ, उगी है सुरुजदेव, हे छठी मइया तोहर महिमा अपार, काच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय, जैसे पारंपरिक छठ गीतों की महत्ता आज भी कायम है। समय के साथ छठ के पारंपरिक गीतों में आधुनिकता अवश्य प्रभावी हुआ, लेकिन इन गीतों की लोकप्रियता में तनिक भी कमी नहीं आई है।

पारंपरिक गीतों के बिना अधूरा है छठ पूजा 

सूर्योपासना का महापर्व छठ में पारंपरिक लोकगीतों की महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गीतों के माध्यम से भगवान सूर्य की आराधना करती महिलाएं अपने परिवार के कल्याण को लेकर छठ मईया से गीतों के माध्यम से कई अरज करती हैं। महिलाओं द्वारा छठी मईया की आराधना में गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों पर गौर किया जाए तो इन गीतों में कई मार्मिक रहस्य का पता चलता है जिसका संबंध सीधे प्रकृति से है। हमेशा की तरह इस वर्ष भी अनेक भोजपुरी गायकों के नए-नए छठ गीत बाजार में बिक रहे हैं। बावजूद छठ व्रत से जुड़े पुराने गीतों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। पारंपरिक छठ गीतों की बात हो तो शारदा सिन्हा को भुलाया नहीं जा सकता है। जिन्होंने छठ की महिमा को जन-जन तक पहुंचाया है। देवी, मालिनी अवस्थी, कल्पना, अनुराधा पौडवाल, मनोज तिवारी,पवन सिंह द्वारा गाए छठ गीत भी पसंद किया जा रहा है।

छठ के गीतों में है बेटियों के लिए प्यार

छठ के पारंपरिक गीतों में भगवान सूर्य एवं प्रकृति की आराधना के साथ-साथ बेटियों के लिए प्यार भी छिपा है। रुनकी-झुनकी बेटी मांगी, सभा बैठावे के बेटवा मांगीली, गोड़वा लगन के पतोह जैसे छठ गीतों में बेटियों के लिए सम्मान सदियों से देखा जा रहा है। कहते हैं कि पारंपरिक छठ गीत आधुनिक समाज में बड़ा संदेश प्रदान करता है। साथ ही सभ्यता एवं संस्कृति का अद्भूत तालमेल छठ पर्व एवं पारंपरिक गीतों में देखने को मिलती है। वर्तमान समाज के लिए कई सार्थक संदेश है जो चेतना जगाने का काम करती है।

छठ गीत के मधुर स्वर लोगों को करते हैं आकर्षित

छठ पूजा के गीतों का अपना एक अलग महत्व है। इस पावन पर्व के गीतों में भी इतनी आस्था है कि गीत बजते ही लोगों का सिर श्रद्धा से झुक जाता है। लोक आस्था का महापर्व छठ अपने धार्मिक एवं लोक महत्व के साथ ही पारंपरिक गीतों की वजह से भी लोकप्रिय हुआ है। छठ पूजा के मौके पर घाटों पर बजने वाले गीत जल्दी जल्दी उगी हे सुरुज देव, कैली बरतिया तोहार हे छठी मईया, दर्शन देही हे आदित्य देवा जैसे पारंपरिक छठ गीतों से घाट गुंजायमान हो उठता है। छठ के मौके पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों के स्वर एवं धुन इतने मधुर हैं जो छठ प्रेमियों को अपनी और आकर्षित करता है खासकर भोजपुरी में गाए गीतों को जिन्हें समझ में नहीं आता उन्हें भी गीतों के मधुर स्वर बेहद आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि गीतों में पारंपरिक संगीत का प्रयोग बरसों से छठ गीतों की महत्ता को बनाए हुए हैं।

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