धारा -144 : पढिए,अंग्रेज़ों के द्वारा बनया इस क़ानून के बारे में


उर्जांचल टाइगर"विशेष" 

नागरिकता क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ भारत के कई राज्यों में लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक प्रदर्शनों में बदलने से रोकने के लिए प्रशासन ने कई राज्यों में धारा 144 लगा दी है। जानकारों का मानना है कि प्रदर्शनों के दौरान हो रही हिंसा को रोकने के बहाने राज्य सरकारें औपनिवेशिक युग के जमाने का एक कठोर कानून का प्रयोग कर रही हैं जिसको ‘CRPC की धारा-144’ नाम से जाना जाता है।

कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CRPC) के अंतर्गत आने वाली धारा-144, देश के किसी भी ज़िले के बड़े पुलिस अधिकारियों DM,SDM या Executive Magistrate को यह अधिकार देती है कि वो क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से एक आदेश जारी कर अपने क्षेत्र में इस निषेधाज्ञा कानून यानि धारा- 144 को लागू कर सकते हैं. इसके अलावा किसी इलाके में धारा 144 लागू करने के बाद प्रशासन को इंटरनेट सेवाओं को ठप करने की ताकत भी मिल जाती है। हाल ही में यूपी और पश्चिम बंगाल में यह देखने को मिला। हालांकि, इसके लिए अलग से कानून बनाया गया है।

1अप्रैल 1974 को देश में लागू दण्ड प्रक्रिया संहिता (CRPC) देश में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून हैं। जो साल 1973 में पारित हुआ था।
जानिए क्या है धारा-144?

किसी इलाके में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए CRPC की धारा-144 लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानि जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करता है। जिस जगह भी धारा 144 लगाई जाती है, वहां 4 या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे खड़े नहीं हो सकते हैं इसके साथ ही उस स्थान पर हथियारों (गन, लाठी, नुकीला हथियार और आग लगाने का कोई सामान) के लाने ले जाने पर भी पाबन्दी लगा दी जाती है।

कितने दिनों के लिए लगाई जा सकती है धारा-144?

किसी इलाके में धारा-144 को 2 महीने से ज्यादा समय तक के लिए नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन एक विशेष परिस्थिति में अगर राज्य सरकार को लगता है कि इंसानी जीवन को खतरा टालने या फिर किसी दंगे को टालने के लिए इसकी जरूरत है तो इसकी समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है। इस स्थिति में भी धारा-144 की अवधि को अधिक से अधिक 6 महीने से तक ही बढ़ाया जा सकता है।

धारा 144 का उल्लंघन करने पर क्या सजा मिलती है?

CRPC की धारा 144 का उल्लंघन करने का दोषी पाये जाने पर उस शख़्स को अधिकतम 3 साल की जेल हो सकती है।धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है।वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति सुरक्षा में तैनात पुलिस या सुरक्षाबलों को उनका काम करने से रोकता है तो उसके लिए भी सजा का प्रावधान है। 


ब्रिटिश सरकार के द्वारा बनाए गए इस कानून को कब-कब दी गयी चुनौती

हमेशा से कई लोगों का मानना रहा है कि विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के लिए प्रशासन द्वारा इस क़ानून का दुरुपयोग किया जाता रहा है।ब्रिटिश शासन काल में साल 1939 में पहली बार इस क़ानून को चुनौती दी गई थी। इसके बाद में साल 1961, 1967 और 1970 में भी इस धारा -144 के कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। लेकिन, हमेशा ही सरकरों द्वारा इस तर्क दिया गया की: 
जिस समाज में पब्लिक ऑर्डर नहीं होगा, वहाँ लोकतंत्र की रखवाली कैसे की जाएगी।
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