जमुई के इकलौते स्‍टेडियम पर सुरक्षाबलों ने किया 'कब्‍जा', खिलाड़ी ऐसे करते हैं प्रैक्टिस।


पटना(बिहार ब्यूरो:मुकेश कुमार)। बिहार के जमुई जिले में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुके हैं। इन खिलाड़ियों के और भी आगे बढ़ाने के लिए एक स्टेडियम की जरूरत है,जहां सिर्फ खेल की बात हो और तमाम सुविधाएं मौजूद हों,लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। हालांकि यहां 10 साल पहले स्‍टेडियम का निर्माण शुरू हुआ था,लेकिन यह अभी भी अधूरा है।हां,ये अलग बात है कि स्टेडियम का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कर दिया।वैसे स्टेडियम खेल का मैदान कम सुरक्षाबलों को ठहराने का स्थान ज्यादा है।जमुई शहर में स्‍टेडियम ना होने की वजह से युवा खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए कभी कॉलेज तो कभी स्कूल के मैदान में में अभ्‍यास करते हैं।जबकि कई बार उन्‍हें नदी के किनारे अभ्यास करते हुए देखा गया है।हालांकि दु:ख की बात है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाला स्टेडियम खेल के लिए नहीं बल्कि सुरक्षाबलों और शहर के लोगों के मॉर्निंग वॉक का जरिया बन गया है।

वैसे तो जमुई जिला ना सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्र है बल्कि पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। यही वजह है कि यहां शिक्षा का फीसदी भी काफी कम है। लेकिन युवाओं में खेल को लेकर गजब का जज्बा है।यही कारण है कि पिछले सालों में कई खिलाड़ी राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुके हैं।खासकर कर एथलेटिक्स के क्षेत्र में चाहे वो एथलीट सुदामा यादव हों या रोशन कुमार या फिर अंजनी। जेवलिन लांग जम्प - हाई जम्प में कई मेडल जीतने वाले जूनियर एथलीट हों या सीनियर।बिहार की रग्‍बी टीम में जिले के खिलाड़ी स्‍थान बना चुके हैं।लेकिन दु:ख की बात है कि इन खिलाड़ियों को खेल का मैदान नहीं मिल पाया।करोड़ों रुपए की लागत से शहर में श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम बना था,जो कि छोटा होने के कारण खिलाड़ियों के काम नहीं आता है।

स्‍टेडियम में होता है ये काम 

करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम सरकारी आयोजनों के लिए मशहूर है।राजनीतिक दलों की कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है या फिर सिर्फ मॉर्निंग वॉक के लिए।जबकि इस स्टेडियम में सुरक्षा बल ठहराए जाते हैं, क्योंकि जमुई जिला नक्सल प्रभावित है जिस कारण सीआरपीएफ,एसएसबी और एसटीएफ के पुलिस बल यहां रहते हैं।इसका नुकसान खिलाड़ियों को होता है।यही नहीं,सुरक्षाबलों के रहने के कारण स्टेडियम में जाने से खिलाड़ी भी हिचकिचाते हैं। स्टेडियम परिसर में बना जिम खिलाड़ियों के काम नहीं आता क्‍योंकि यहां सुरक्षा बल या फिर प्रशासन के लोग ही रहते हैं।नतीजन खिलाड़ी केकेएम कालेज,स्कूल के मैदान या फिर शहर से सटे किउल नदी के घाट पर अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए मजबूर हैं।

बिहार एथलेटिक्स के जैवलिन के कोच आशुतोष की मानें तो कॉलेज की मैदान में अभ्यास करने में काफी परेशानी होती है,क्योंकि वहां एक साथ कई खेल लोग खेलते रहते हैं। जबकि जमुई जिला रग्बी के खिलाड़ियों को कोच करने वाले मनोज ने कहा कि यहां उचित स्थान और सुविधा न होने के कारण वह खैरा के नरियाना स्थित किउल नदी के घाट पर दर्जनों खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते हैं।

जमुई के डीएम ने कही ये बात 

खेल के मैदान और खिलाड़ियों की समस्या के बारे में पूछे जाने पर जमुई के डीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि सीएसआर योजना के तहत जमुई नगर क्षेत्र में 1 करोड़ 20 लाख की लागत से एक स्पोर्ट्स कॉम्‍लेक्स का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए स्थल का चयन किया जा रहा है।स्थल चयन होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।इसके साथ ही जिले के आठ प्रखंड इलाकों में स्टेडियम का भी निर्माण सरकार के द्वारा कराया जा रहा है।जमुई स्टेडियम में सुरक्षाबलों के ठहराने की बात पर डीएम धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि क्योंकि यह नक्सल प्रभावित जिला है,लिहाजा सुरक्षाबलों की तैनाती रहती है।जल्‍दी ही सुरक्षाबलों को स्टेडियम से हटा दिया जाएगा।
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